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लोकसभा में भाजपा सांसद ने कहा- गोड्डा साइबर क्राइम का अड्डा, होना चाहिए एनआईए का कार्यालय

9 महीने पहले
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लोकसभा में निशिकांत दूबे।
  • सांसद ने पाकुड़, देवघर, साहेबगंज, दुमका और जामताड़ा को भी बताया साइबर क्राइम का अड्डा
  • गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद हैं निशिकांत दूबे, साइबर क्राइम में दूसरे नंबर पर है झारखंड
  • 2012 से 2018 तक साइबर अपराध के 2752 केस हुए दर्ज, मात्र 707 मामलों का निपटारा हुआ
  • साल 2012 में पूरे झारखंड में साइबर ठगी के केवल 36 मामले दर्ज हुए थे, जो 2018 में बढ़कर 929 हो गए

रांची/नई दिल्ली. झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि गोड्डा साइबर क्राइम का अड्डा बन चुका है। उन्होंने गोड्डा के अलावा पाकुड़, देवघर, साहेबगंज, दुमका और जामताड़ा का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम पूरे देश के लिए चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि झारखंड में साइबर क्राइम वाले प्रभावित क्षेत्र में राष्ट्रीय जांच एजेंसी का एक कार्यालय होना चाहिए।
 

महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा साइबर क्राइम झारखंड में, 6 वर्ष में 25 गुणा बढ़े 
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड साइबर क्राइम के मामले में देशभर में दूसरे नंबर है। महाराष्ट्र का स्थान पहला है। वर्ष 2012 -13 तक झारखंड में 90 फीसदी लोग नहीं जानते थे कि साइबर अपराध क्या है और कैसे होता है। लेकिन जैसे-जैसे साल बीतते गए और देश डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ा झारखंड में साइबर अपराध छह साल में बढ़कर 2480 प्रतिशत हो गया। यानी लगभग 25 गुणा। वर्ष 2012 में झारखंड में साइबर अपराध के 36 केस दर्ज किए गए। लेकिन 2018 में आंकड़ा बढ़कर 929 पहुंच गया। वर्ष 2012 से 2018 के बीच पूरे राज्य में 2752 मामले दर्ज हुए। इसमें सबसे अधिक केस राजधानी रांची जिले में दर्ज हुए। यहां छह साल में 720 (साइबर थाना रांची को लेकर) दर्ज हुए। जबकि सबसे कम मामले खूंटी में मात्र 14 दर्ज हुए। पूरे झारखंड में साइबर अपराध के 707 मामलों का निपटारा हुआ और 1493 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी 2012 से 2018 के बीच पुलिस ने की। 
 

साढ़े तीन साल बाद भी नहीं बन सका साइबर फारेंसिक लैब 
रांची में 21 मार्च 2016 को साइबर थाना की शुरुआत हुई। लेकिन साढ़े तीन साल बाद भी यहां साइबर फारेंसिक लैब नहीं बन सका। सरकार दो बार टेंडर निकाल चुकी है। 1.64 करोड़ रुपए स्वीकृत किए जा चुके है। लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। साइबर सेल में संसाधनों का भी अभाव है। दो टेक्निकल ऑफिसर के सहारे पूरा थाना चल रहा है। ऑफिसरों को तकनीक के नाम पर कंप्यूटर व कुछ साफ्टवेयर को छोड़ कोई सुविधा नहीं मिली है। 
 

2012 से 2018 तक जिलों में दर्ज मामले 

जिला केस रजिस्टर्ड डिस्पोजल गिरफ्तारी
हजारीबाग 204 49 27
धनबाद 104 30 92
रांची 651 154 66
जामताड़ा 232 30 403
गोड्डा 36 02 03
साहेबगंज 34 05 08
देवघर 211 58 272
रांची (साइबर) 59 08 37
बोकारो 178 48 43
गिरिडीह 249 121 366
दुमका 37 07 31
रामगढ़ 67 09 19
लोहरदगा 28 11 11
खूंटी 14 01 04
गुमला 40 05 01
सिमडेगा 23 08 10
पलामू 35 09 07
चाइबासा 47 10 07
चतरा 66 16 14
कोडरमा 51 19 20
जमशेदपुर 267 87 45
लातेहार 26 03 07
गढ़वा 41 03 06

 

सबसे अधिक अपराध रांची में 720 मामले दर्ज हुए 
साइबर अपराध के सबसे अधिक मामले राजधानी रांची में हुए है। वर्ष 2012 से 2018 के दौरान रांची में साइबर अपराध के 720 (साइबर थाना रांची को लेकर) मामले दर्ज हुए। दूसरे स्थान पर जमशेदपुर है, यहां 267 मामले दर्ज हुए। गिरिडीह में 249 केस दर्ज हुए और वह तीसरे स्थान पर रहा। जिस जिले के साइबर अपराधी सबसे अधिक साइबर अपराध कर रहे है, उस जामताड़ा जिले में साइबर अपराध के 232 मामले दर्ज हुए। वहीं हजारीबाग में 204, बोकारो में 178 और धनबाद जिले में 104 साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए। 
 

सबसे कम खूंटी में 14 मामले दर्ज 
साइबर अपराध के मामले में सबसे सुरक्षित खूंटी जिला है। जहां 2012 से 2018 के दौरान मात्र 14 साइबर अपराध के मामले ही दर्ज हुए। वहीं दूसरे स्थान पर सिमडेगा जिला रहा जहां साइबर अपराध के 23 मामले दर्ज हुए। लातेहार जिला तीसरे स्थान पर रहा है जहां 26 मामले दर्ज हुए। वहीं लोहरदगा में 28, पलामू में 35 और दुमका जिले में 37 मामले दर्ज हुए। 
 

राज्य में साइबर अपराध 
 

वर्ष केस दर्ज निपटारा गिरफ्तारी
2012 36 23 32
2013 57 39 36
2014 194 96 66
2015 346 162 98
2016 439 124 215
2017 751 146 601
2018 929 117 445
कुल 2752 707 1493

 

अपराधियों को पकड़ने के लिए हैदराबाद पर निर्भर है पुलिस 
साइबर फारेंसिक में जो सुविधाएं होनी चाहिए उनमें हाई इंड फॉरेंसिक सर्विस वर्क स्टेशन, इंटीग्रेटेड डिस्क डाटा रिकवरी एंड फारेंसिक एनालिसिस सॉफ्टवेयर, हार्ड डिस्क इमेजिंग फॉरेंसिक टूल, राइट ब्लॉक किट, फाराडे बैग, सोशल मीडिया इंटेलिजेंस गैदरिंग साफ्टवेयर, सीडीआर एनालाइजर, लो इंड वर्क स्टेशन डेस्कटॉप व लैपटॉप और मल्टीफंक्शनल डिवाइस की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में पुलिस हैदराबाद के फॉरेंसिक लैब पर निर्भर है।
 
झारखंड में साइबर ठगी के बड़े मामले 
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर के साथ 23 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई। जांच करने पर पता चला कि साइबर ठगी झारखंड के साइबर अपराधियों ने ही उनके खाते से पैसे उड़ाए है। इसके बाद झारखंड पुलिस के सहयोग से पंजाब पुलिस साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया।
 


 

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