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राज्यपाल ने रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा, राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए रांची विश्वविद्यालय की बेहद अहम भूमिका

राज्यपाल ने रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा, राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए रांची विश्वविद्यालय की बेहद अहम भूमिका

Pawan Kumar | Last Modified - Nov 13, 2017, 04:54 PM IST

रांची।राज्यपाल डॉ. द्रोपदी मुर्मू ने कहा है कि रांची विश्वविद्यालय झारखण्ड राज्य का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। अपने स्थापना काल से ही इसने अनगिनत शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, प्रबंधक, कानूनविद, साहित्यकार आदि देकर अपनी क्षमता का परिचय देते हुए इस प्रदेश को गौरवान्वित किया है। राज्यपाल सोमवार को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोल रही थीं।


शिक्षा का उद्देश्य मात्र उपाधियां प्राप्त करना ही नहीं

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी देश या प्रदेश के विकास के लिए 21वीं शताब्दी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समाज के सर्वांगीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस शिक्षा में उच्चतर शिक्षा समाज के दैदीप्यमान नक्षत्रों की भांति होती है, जो सर्वत्र प्रदर्शित होती है।

ऐसे में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसीलिए आज विश्वविद्यालयों को मानववाद, सहिष्णुता, बौद्धिकता और सत्य के अहम केन्द्रों के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता है। शिक्षा का उद्देश्य मात्र उपाधियां प्राप्त करना ही नहीं है।

शास्त्रों में भी कहा गया है कि विद्या विनयशील बनाती है, विनयशीलता से पात्रता आती है, पात्रता से धन की प्राप्ति होती है और धन प्राप्ति से धर्म और सुख मिलता है। मनुष्य सामान्यतः सुख की अभिलाषा से जीवन जीता है। इसीलिए शिक्षा सुख प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन है।

उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों से झारखण्ड को काफी उम्मीदें

राज्यपाल ने कहा कि इस समारोह में उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों से झारखण्ड को काफी उम्मीदें हैं। आज के बाद उनके जीवन की एक नयी यात्रा का प्रारंभ होगा। प्रत्येक उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह के माध्यम से उपाधियों के रूप में ज्ञान की मशाल थमायी गई है। इसके प्रकाश से सामाजिक-आर्थिक संवृद्धि एवं सांस्कृतिक संपोषण को और अधिक बल मिलेगा तथा राष्ट्र उत्थान में अपनी महती भूमिका सुनिश्चित करेंगे। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि उपाधि केवल कागज के टुकड़े नहीं बल्कि भविष्य की चुनौतियों से लड़ने के लिए उन्हें सौंपी गयी समाज की वसीयत हैं। विद्यार्थी सफलता के शिखर पर पहुंचे एवं झारखण्ड को शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय प्रदेश बनाने में अपना सहयोग दें।

1459 विद्यार्थियों को मिली डिग्री

समारोह में 1459 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई। इनमें 47 विद्यार्थियों को 53 गोल्ड मिले। 53 गोल्ड में 37 गोल्ड छात्राओं के नाम रहा। 98 को पीएचडी की उपाधि मिली तो 11 को एमफिल की। 25488 विद्यार्थियों के डिग्री की स्वीकृति दी गई। समारोह में मंच संचालन रजिस्ट्रार डॉ. अमर कुमार चौधरी तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रतिकुलपति डॉ. कामिनी कुमार ने किया।

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फोटो : संजय कपरदार।

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