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५०० क्विंटल मछली से कमा रहे १५ लाख रुपए, ऐसे ही इनकी कहानी

५०० क्विंटल मछली से कमा रहे १५ लाख रुपए, ऐसे ही इनकी कहानी

Gupteshwar Kumar | Last Modified - Dec 18, 2017, 10:22 AM IST

लातेहार(झारखंड)। कभी नक्सलियों की राजधानी के नाम से प्रसिद्ध सरयू क्षेत्र में अब नीली क्रांति जोर पकड़ने लगी है। लोग बंदूक छोड़कर तालाबों में मछली पालन करने लगे हैं। सरयू, रुद, कोटाम, चोरहा, घांसीटोला, मुरपा समेत अन्य कई ऐसे गांव हैं, जहां के एक हजार से अधिक ग्रामीण तालाबों, बांधों और डैम में बड़े पैमाने पर मछली पालन कर रहे हैं। बांध, डैम और तालाबों से 8-10 किलो की मछलियां निकल रही हैं। साल में करीब 1500 क्विंटल मछलियां निकल रही हैं। इससे ग्रामीणों को करीब 15 लाख रुपए का सालाना आय हो रहा है। इसके सूत्रधार सरयू के मुरपा गांव के रहने वाले मिथेंद्र लकड़ा हैं। मत्स्य मित्र बनने के बाद मिथेंद्र लागातार ग्राम गोष्ठी कर रहे हैं।

-इसमें ग्रामीणों को विभाग की ओर से चलाए जा रहे योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें प्रोत्साहित करने का भी काम कर रहे हैं।
-मिथेंद्र बताते हैं कि गोष्ठी से धीरे-धीरे लोगों के विचार बदल रहे हैं। समय थोड़ा जरूर लगेगा, लेकिन सरयू क्षेत्र को नीली क्रांति का गवाह बनाने में सफलता जरूर मिलेगी।

-जिस समय सरयू क्षेत्र में नक्सलियों की तूती बोलती थी, उस समय मिथेंद्र उस क्षेत्र में मछली पालन करने वाले इकलौते किसान थे।
-अपने घर के समीप के तालाब में ही उसने मत्स्य पालन का काम करना शुरू किया था। उस तक किसी को पता नहीं था कि यही मिथेंद्र एक दिन नीली क्रांति के सूत्रधार बनेंगे।
-बारीबांध गांव के चंद्रदेव बृजिया, नवल बृजिया, चिपरु के हरिलाल सिंह, डोराम के रामअवतार सिंह समेत अन्य ग्रामीण बताते हैं कि मिथेंद्र के प्रयास से ही आज सरयू समेत आसपास के दर्जन भर से अधिक गांव के एक हजार से अधिक ग्रामीण मत्स्य पालन के कार्य से जुड़कर आर्थिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ चुके हैं।

पहली बार सरयू क्षेत्र के 20 ग्रामीण ने लिया था रांची में प्रशिक्षण
-वर्ष 2014 में पहली बार सरयू क्षेत्र के दस ग्रामीण प्रशिक्षण के रांची भेजे गए। वहां उन्हें चार दिनों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण लेकर आए ग्रामीणों को विभाग ने 75 प्रतिशत अनुदान पर स्पॉन (मछली का अंडा) दिया।
-करीब एक महीने में बीज तैयार हुआ। उसे गांव के आसपास बेच दिया। इससे ग्रामीणों को 30-35 हजार रुपए की आय हुई।
-सरयू क्षेत्र में नीली क्रांति लाने में जिला मत्स्य विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रही। मिथेंद्र ने बताया कि वर्ष 2007 में मैं विभाग से जुड़ा। सीमित संसाधन में घर के पास के तालाब में मत्स्य पालन का काम शुरू किया।
-नक्सलियों का प्रभाव जैसे ही कम हुआ। विभाग ने अन्य लोगों को जोड़ने का आग्रह किया। वित्तीय वर्ष 2014-15 से लोगों ने जुड़ना प्रारंभ कर दिया।

मिथेंद्र के प्रयास से नीली क्रांति का गवाह बनेगा सरयू : मत्स्य विभाग
-जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार गुप्ता और मत्स्य प्रसार पदाधिकारी रणविजय कुमार बताते हैं कि यह मिथेंद्र लकड़ा की मेहनत का प्रतिफल है।

-उनके निरंतर प्रयास से ही सरयू और उसके आसपास के गांव के ग्रामीण विभाग की योजना से जुड़ रहे हैं। आनेवाले समय में सरयू क्षेत्र नीली क्रांति का गवाह बनेगा।

-पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मिथेंद्र लकड़ा को सम्मानित कर चुके हैं। उन्हें नौ अगस्त 2013 को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
-जिला प्रशासन ने उसे नील रत्न दिलाने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा है। वहीं जिला कृषि विभाग ने प्रशिक्षण के लिए इजरायल भेजे जानेवाले पांच किसानों में मिथेंद्र का नाम भी शामिल है।

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Web Title: mchhliyon se kmaa rahe 15 laakh rupaye, kuchh aisi hai inki kahani
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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