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समझा रही महिला थाना प्रभारी को मारा थप्पड़, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

पुलिस के लाठी चटकाने पर एक दर्जन से ज्यादा जामकर्ता जख्मी हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 14, 2018, 03:25 PM IST

    • लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने घसीटते हुए बस में डाला।

      घाटशिला(झारखंड)। मुसाबनी थाना क्षेत्र में यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया ( यूसील) की बागजाता माइंस का गेट जाम के दौरान शनिवार को पुलिस और विस्थापितों के बीच झड़प हो गई। दरअसल, जादूगोड़ा की महिला थाना प्रभारी विस्थापितों को समझाने की कोशिश कर रही थीं, उसी वक्त उनके ऊपर किसी महिला ने हाथ चला दिया और धक्का-मुक्की करने लगी। इसके बाद तो देखते ही देखते माइंस परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। पुलिस के लाठी चटकाने पर एक दर्जन से ज्यादा जामकर्ता जख्मी हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।


      -मालूम हो कि मुसाबनी-फुलझरी ग्रामसभा के बैनर तले बागजाता माइंस के विस्थापितों ने नौकरी की मांग को लेकर 11 जनवरी से माइंस का गेट जाम कर रखा था।
      -विस्थापितों ने अधिकारी और मजदूरों को माइंस में जाने से रोक रखा था। इससे माइंस का उत्पादन प्रभावित हो रहा था।
      -प्रशासन ने जाम कर रहे लोगों से कई बार प्रबंधन के साथ वार्ता भी की, लेकिन विस्थापित नौकरी देने तक आंदोलन जारी रखने की अपनी जिद पर अड़े रहे। शनिवार को बलप्रयोग के बाद गेट जाम खत्म कराया गया।
      -जादूगोड़ा की महिला थाना प्रभारी प्रियंका आनंद जब यूसील की बागजाता माइंस से बाहर निकलकर जादूगोड़ा जाने के लिए गेट से बाहर निकलीं, तो विस्थापितों ने उनके वाहन को भी रोक दिया।
      -वे विस्थापितों को समझाने की कोशिश कर रही थीं, उसी वक्त उनके ऊपर किसी महिला ने हाथ चला दिया और धक्का-मुक्की करने लगी। इसके बाद पूरा मामला बिगड़ गया।
      -मौके पर मौजूद पुलिस जवानों ने जाम कर रहे लोगों को खदेड़-खदेड़कर पीटा और उनके द्वारा लगाया गया तंबू, टेंट सब उखाड़ कर फेंक दिया।
      -प्रशासन के कड़े रुख के आगे विस्थापितों की एक न चली। प्रशासन ने बल प्रयोग कर बागजाता माइंस का गेट खाली करा दिया। गेट जाम हटने के बाद बागजाता माइंस में कामकाज शुरू हो गया है।

      नौकरी मिलने तक जाम नहीं हटाने की दी थी चेतावनी
      -विस्थापितों का कहना था कि जब तक यूसील प्रबंधन उन्हें नौकरी नहीं देता, वे किसी कीमत पर जाम नहीं हटाएंगे। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को भी अंचल अधिकारी की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय वार्ता की गई थी।
      -इसमें जाम हटाने को कहा गया था, लेकिन फिर भी जाम नहीं हटाया गया। यूसील प्रबंधन प्रशासन के आगे जाम हटाने को लेकर कोई उपाय नहीं बचा था।
      -प्रशासन और प्रबंधन जाम करने वालों से फिर वार्ता करने बागजाता माइंस परिसर पहुंचे थे, लेकिन उनके उग्र रूप को देखकर वार्ता नहीं हो सकी ।
      -प्रशासन बागजाता माइंस में काम करने वाले बी शिफ्ट के मजदूरों को जब गेट के अंदर भेजने लगा तो विस्थापितों ने इसका विरोध किया । उन्हें डरा धमका कर भगाया जाने लगा। प्रशासन ने इस पर आपत्ति की।
      -जब मजदूरों को लेकर जादूगोड़ा से आई बस माइंस में प्रवेश करने लगी, तो जाम कर्ता सड़क पर लेट गए और बस को रुकवा दिया।
      -मुसाबनी डीएसपी अजित कुमार विमल ने कहा कि बागजाता माइंस गेट जाम हटाने के क्रम में थाना प्रभारी पर हमला करने का प्रयास किया गया। कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है। जाम करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

      वीडियो: विजय कुमार।

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      विस्थापितों की पिटाई करती पुलिस।
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      पुलिस ने विस्थापितों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
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    Web Title: A Clash Between The Police And The Displaced In Musabani Police Station Area
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