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मोस्टवांटेड ङ्कह्य ७ ढ्ढक्कस् : इस शख्स ने फरारी में कर ली शादी, पुलिस ६ सालों में छू तक ना सकी

मोस्टवांटेड ङ्कह्य ७ ढ्ढक्कस् : इस शख्स ने फरारी में कर ली शादी, पुलिस ६ सालों में छू तक ना सकी

Danik Bhaskar | Dec 07, 2017, 12:16 PM IST
आरोपी शशि। (फाइल) आरोपी शशि। (फाइल)

धनबाद (झारखंड)। यहां की एक अदालत ने कोल किंग और कांग्रेस नेता सुरेश सिंह हत्याकांड में नामजद आरोपी शशि सिंह को भगोड़ा बताकर केस की फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेजने का आदेश दिया है। इसकी जानकारी अभियोजन पक्ष को हुई तो केस री-ओपन करने के लिए पिटीशन दाखिल की गई। 7 दिसंबर 2011 को हुई इस हत्या के मुख्य आरोपी शशि सिंह को पकड़ने के लिए 7 आईपीएस ने दम लगा दिया, पर वे फेल रहे। फरार रहते हुए शशि सिंह ने शादी की और वो दो बच्चों का पिता भी बना। उसे पकड़ने के लिए रुपए पानी की तरह बहाए गए पर इसे पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो गया। 61 बार हुई रेड...


-7 दिसंबर 2011...। कोल कारोबारी सुरेश सिंह की हत्या के 6 साल पूरे होने को है। पुलिस इन छह सालों में हत्याकांड के मुख्य आरोपी शशि सिंह को गिरफ्तार नहीं कर पाई।
- 6 सालों में 7 एसपी आए। हर किसी ने शशि की गिरफ्तारी का दावा किया। किसी ने विशेष टीम बनाई तो किसी ने सीआईडी की मदद ली।

- धनबाद से बलिया (यूपी) तक 61 बार छापेमारी हुई। गिरफ्तारी के प्रयास में पैसा पानी की तरह बहाया गया। पर धनबाद का सबसे बड़ा इनामी (21 हजार रुपए) शशि सिंह नहीं पकड़ा गया।

- सिंह मेंशन परिवार के इस सदस्य को खोजने में पुलिस हांफ रही है। पुलिस के लिए यह स्थिति इसलिए शर्मनाक है क्योंकि शशि की गिरफ्तारी में राज्य के वैसे पुलिस अफसर फेल रहे, जिन्हें दबंग और तेज- तर्रार अफसरों में शुमार किया जाता है।

रिसेप्शन में मारी गई थी गोली

- 7 दिसंबर 2011 को धनबाद क्लब में आयोजित एक विवाह रिसेप्शन समारोह के दौरान सुरेश सिंह को गोली मारी गई थी।
- 8 दिसंबर 2011 को सुरेश सिंह के पिता तेजनारायण सिंह की लिखित शिकायत पर शशि सिंह, रामधीर सिंह एवं विधायक संजीव सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
- जांच में रामधीर सिंह एवं संजीव सिंह का नाम सामने नहीं आया। आईओ रवि ठाकुर ने शशि सिंह, आलोक वर्मा, मोनू सिंह एवं प्रमोद लाला उर्फ प्रमोद श्रीवास्तव के खिलाफ 105 पेज की चार्जशीट अदालत में सौंपी थी। इस केस में नामजद आरोपी शशि सिंह को गिरफ्तार करने में पुलिस नाकाम रही।

11 लाख से अधिक सिर्फ छापेमारी पर खर्च हुए

- थाने की ड्यूटी से इतर तैनाती पर पुलिस जवान से लेकर अफसरों तक का प्रतिदिन का देय तय है। कांस्टेबल से लेकर डीएसपी तक पर वेतन के अलावे अतिरिक्त खर्च होता है।
- पुलिस के अनुसार अब तक 33 बार पुलिस की विशेष टीम शशि की तलाश में बलिया गई। हर बार तीन से चार गाड़ी यानी करीब 15 से 20 जवान और 3 से 5 अफसर रेड में शामिल हुए।
- इस हिसाब से देखें तो केवल छापेमारी पर धनबाद पुलिस 11 लाख से अधिक खर्च कर चुकी है। अगर मॉनिटरिंग और प्लानिंग करने वाले अधिकारियों का वेतन भी जोड़ा जाए तो छह सालों में यह खर्च 20 लाख के पार पहुंच जाता है।

आगे की स्लाइड्स में जानिए किस IPS ने क्या किया...