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चारा घोटाले में जिसकी जांच पर लालू समेत 56 आरोपियों को सजा, अब वो भी आरोपी

दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाला आरसी 38ए -1996 में स्पेशल कोर्ट ने सात गवाहों को ही आरोपी बना दिया।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 07, 2018, 11:27 AM IST

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    सीबीआई के स्पेशल जज शिवपाल सिंह। (फाइल)

    रांची। दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाला आरसी 38ए -1996 में स्पेशल कोर्ट ने सात गवाहों को ही आरोपी बना दिया। इनमें झारखंड के पहले मुख्य सचिव, बिहार के मुख्य सचिव और सीबीआई के एएसपी भी शामिल हैं। साथ ही कोर्ट ने आरोपी लालू प्रसाद समेत कुल 31 लोगों के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए 15 मार्च की तिथि निर्धारित कर दी है।

    ये बने आरोपी

    बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, बिहार व झारखंड के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव वीएस दुबे, बिहार के सेवानिवृत्त डीजी विजिलेंस डीपी अोझा, बिहार लोक लेखा समिति के तत्कालीन सचिव फूल झा व सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा को नोटिस जारी किया है। इनके अलावा सप्लायर दीपेश चांडक, शिव कुमार पटवारी को भी नोटिस भेजा है।

    सातों के विरुद्ध कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

    -इस फैसले से पहले बनाए गए नए सात आरोपियों के संदर्भ में नए सिरे से सुनवाई शुरू होगी। 28 मार्च को इन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का सम्मन जारी किया गया है। सातों के विरुद्ध कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। बताया है कि गड़बड़ी केवल घोटालेबाजों के स्तर पर ही नहीं हुई, जांचकर्ताओं और घाेटाले को रोकने के लिए जवाबदेह अधिकारियों की जांच भी जरूरी है।

    लालू प्रसाद समेत 56 आरोपियों को सजा दी जा चुकी है

    -सबसे ज्यादा सवाल चारा घोटाले से जुड़े पांच मामलों में सीबीआई के जांच अफसर अजय कुमार झा के आरोपी बनाए जाने से उठ रहे हैं। इनकी जांच पर आरसी 20ए और आरसी 68 ए चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी से संबंधित दो मामलों में सजा भी हो चुकी है। आरसी 20ए 1996 मामले की पूरी जांच अजय झा ने की है। इसमें लालू प्रसाद समेत 56 आरोपियों को सजा दी जा चुकी है।

    सीबीआई की आंखों का तारा बन गया

    -आर्डर में कोर्ट ने कहा कि घोटाले के प्रमुख आपूर्तिकर्ता दीपेश चांडक को सीबीआई ने गवाह बनाया है। इसने कोर्ट में गवाही दी है कि पशुपालन विभाग में सामानों की आपूर्ति किए बगैर करोड़ों रुपये प्राप्त किए। इसे आरोपी बनना चाहिए था। यह गवाह बन सीबीआई की आंखों का तारा बन गया। सीबीआई ने इस गवाह का भरपूर इस्तेमाल किया और बदले में उसको सुरक्षा की छतरी प्रदान की।

    -सीबीआई के स्पेशल जज शिवपाल सिंह ने कहा-सीबीआई ने आरोपियों को सुरक्षा छतरी दी। जिसे चाहा आरोपी बनाया और जिसे चाहा गवाह बना दिया। दुमका ट्रेजरी घोटाले का प्रमुख आपूर्तिकर्ता दीपेश चांडक ने कोर्ट में गवाही दी कि बगैर आपूर्ति किए उसने करोड़ाें रुपए लिए। इसे आरोपी बनना चाहिए था। ये सीबीआई की आंखों का तारा बन गया। एेसा क्यों? सीबीआई के पास कोई जवाब नहीं।

    घोटाला उजागर करने में हीरो समझे जाने वाले अफसर अब कठघरे में
    वीएस दूबे, पूर्व मुख्य सचिव : झारखंड के प्रथम मुख्य सचिव रहे। इन्हें घोटाला उजागर करने वाला समझा जाता है। उनके आदेश पर ही चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने पहला केस दर्ज कराया था। बाद में झारखंड में राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल के परामर्शी भी रहे।

    घोटाला जानते हुए भी कार्रवाई नहीं की

    घोटाले के समय बिहार राज्य के तत्कालीन वित्त सचिव विजय शंकर दुबे की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि दुबे अगस्त 1995 में वित्त सचिव बने, दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 और जनवरी 1996 में ही अवैध निकासी हुई थी। उनके संज्ञान में मामला था पर उन्होंने इस पर चुप्पी बनाए रखा और घोटाले को रोकने का प्रयास नहीं किया।

    अंजनी सिंह, सीएस बिहार :अंजनी कुमार सिंह वर्तमान में बिहार के सीएस हैं। इन्हें अभी कुछ समय पहले ही तीन महीने का एक्सटेंशन मिला। दुमका के डीसी रहते हुए एक लाख से अिधक की निकासी पर रोक लगाया था। लेकिन कमिश्नर श्रीपति नारायण मिश्र ने राेक हटा दी थी।

    जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी चुप रहे
    कोर्ट ने कहा-घोटाले के समय दुमका के उपायुक्त अंजनी सिंह कर्तव्य में लापरवाही बरतते रहे। संविधान ने इन अधिकारियों को जो शक्तियां प्रदान किए थे, उसका अनुपालन इन्होंने नहीं किया। दुमका के तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी एसएस तिवारी ने जांच कर देवघर के उपायुक्त सुखदेव सिंह और इन्हें जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बावजूद इन दोनों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

    एक आरोपी से पूरी जांच ही सवालों में
    एके झा, सीबीआई एएसपी

    चारा घोटाला के सबसे अधिक मामलों की जांच इन्होंने ही की है। वर्ष 2000 में रांची में पशुपालन घोटाले की जांच के लिए सीबीआई का पशुपालन कोषांग बनाया गया। उस समय ही इन्हें जांच साौंपी गई।

    बिहार के लोक लेखा समिति के तत्कालीन सचिव फूल झा

    -घोटाले के समय फूल झा लोक लेखा समिति के सचिव थे। घोटाले के उजागर होने के बाद समिति ने सचिव को निर्देश दिया था कि पशुपालन विभाग से संबंधित दस्तावेज को जब्त कर समिति के पटना कार्यालय के पास रखें। ऐसा ही आदेश समिति के अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने भी अप्रैल 1994 में सचिव फूल झा को दी। पर इन्होंने दोनों आदेशों का पालन नहीं किया।

    आरोपियों काे सुरक्षा की छतरी दे दी
    कोर्ट ने कहा- 29 दिसंबर 1996 को घोटाले की संचिका जब्त की लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की। जब्त संचिका में एक आम आदमी विधु भूषण द्विवेदी ने एडीजी निगरानी डीपी आेझा को 1992 में तीन पत्र लिख गड़बडिय़ों की जानकारी दी थी। एके झा को जब इसकी जानकारी थी तो उसने एडीजी से पूछताछ करने और उन्हें आरोपी बनाने के बजाए उन्हें सुरक्षा की छतरी दिला दी।

    आगे क्या
    आरोपियों को मिल सकता है मौका

    विधि विशेषज्ञों का कहना है कि जांच अधिकारी और सीबीआई के साथ-साथ गवाहों को आरोपी बनाए जाने के बाद अब चारा घोटाले के लंबित मामलों में सुनवाई का सामना कर रहे आरोपी इसको अपने बचाव का आधार बना सकते हैं। साथ ही चारा घोटाले के जिन मामलों में आरोपियों को सजा सुनाई गई है, वैसे सभी आरोपी इस आदेश का हवाला देकर अपीलीय अदालत में बचाव के लिए इसे आधार बना सकते हैं।

    28 को कोर्ट में रखेंगे पक्ष
    28 मार्च को सीबीआई एएसपी समेत सभी सातों आरोपी कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करेंगे। सीबीआई के अधिकारी पूरी मजबूती के साथ बताएंगे कि जांच में कब, कौन से निर्णय क्यों लिए गए।

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    एसके झा, सीबीआई एएसपी (फाइल)
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Web Title: Fodder Scam: CBI Court Creates Seven New Accused In Illegal Withdrawal Case From Dumka Treasury
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