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चारा घोटाला: पेशी के लिए लालू प्रसाद ने कोर्ट में रोज आने-जाने की मांगी अनुमति

चारा घोटाला: पेशी के लिए लालू प्रसाद ने कोर्ट में रोज आने-जाने की मांगी अनुमति

Gupteshwar Kumar | Last Modified - Mar 13, 2018, 07:43 PM IST

रांची। चारा घोटाला के दो मामले में जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद डोरंडा ट्रेजरी से जुड़े मामले की सुनवाई में कोर्ट में सशरीर शामिल होना चाहते हैं। इस संबंध में उनकी ओर से सीबीआई के स्पेशल जज प्रदीप कुमार की अदालत में लिखित अनुरोध आवेदन दाखिल की गई। यह आवेदन उस समय दाखिल किया गया, जब मंगलवार को डोरंडा ट्रेजरी से जुड़े चारा घोटाला मामला आरसी 47 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई चल रही थी।

कोर्ट परिसर में अनावश्यक भीड़ और दबाव बढ़ जाता है
-बताते चलें कि मात्र 1 सप्ताह पहले ही न्याय प्रशासन की ओर से आदेश जारी किया गया की चारा घोटाला मामले में सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही की जाए। क्योंकि मामले की सुनवाई प्रत्येक दिन हो रही है और प्रत्येक दिन लालू प्रसाद जैसे आरोपियों को कोर्ट में लाने और ले जाने पर कोर्ट परिसर में अनावश्यक भीड़ और दबाव बढ़ जाता है।

-वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के शुरुआत हुए अभी पूरे 7 दिन भी नहीं हुए हैं कि आरोपी लालू की ओर से यह आवेदन दाखिल कर दिया गया।

गवाहों के बयान नहीं सुन पाने को बनाया आधार
-आरोपी लालू प्रसाद समेत अन्य को मंगलवार को जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था। कोर्ट में प्रत्येक दिन आने-जाने का आधार बताया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान हुए गवाहों का बयान नहीं सुन पाते हैं।

-इसलिए सुनवाई के दौरान उन्हें जेल से कोर्ट में सशरीर पेश होने की अनुमति दी जाए। लालू की ओर से दाखिल की गई इस आवेदन पर सुनवाई हुई।

कोर्ट में ही आना चाहते हैं तो इस संदर्भ में आवेदन दाखिल करने का निर्देश
-सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील एम पी सिंह ने कोर्ट को बताया की जो आधार बताया जा रहा है, वह बिल्कुल निराधार है। क्योंकि गवाह का बयान आरोपी लालू प्रसाद के पैरवीकार अधिवक्ता सुनते हैं और क्रॉस एग्जामिनेशन भी कर लेते हैं।

-निर्विकार अधिवक्ता को अगर कोई तकलीफ नहीं है तो उन्हें प्रत्येक दिन कोर्ट में लाने और ले जाने की अनुमति न दी जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को भी निर्देश दिया है कि अगर वे लोग भी कोर्ट में ही आना चाहते हैं तो इस संदर्भ में कोर्ट में आवेदन दाखिल करें।

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