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लालू की कोर्ट से गुहार- उम्र और सेहत के चलते कम से कम दंड दें; सजा का एलान फिलहाल टला

देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए। यह मामला 1991 से 1994 के बीच का है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 05, 2018, 06:26 PM IST

  • लालू की कोर्ट से गुहार- उम्र और सेहत के चलते कम से कम दंड दें; सजा का एलान फिलहाल टला
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    लालू प्रसाद समेत 11 पर आज सीबीआई कोर्ट में होगी बहस।

    रांची. बिहार के चारा घोटाला से जुड़े देवघर ट्रेजरी मामले में शुक्रवार को लालू समेत 5 दोषियों की सजा पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। गुरुवार को पांंच दोषियों के मामले में सुनवाई हुई थी। कुल मिलाकर अब तक 16 में से 10 दोषियों की सजा पर सुनवाई हो चुकी है। इससे पहले, लालू ने कोर्ट से कम सजा देने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा- "इस घोटाले में मेरा सीधा रोल नहीं था। मेरी उम्र और हेल्थ को देखते हुए कम सजा दी जाए।"

    - लालू के वकील चितरंजन सिन्हा ने बताया कि कोर्ट अपना फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शनिवार को दो बजे फैसला सुनाएगा।

    आरोपियों के वकीलों ने कम सजा की मांग की

    - सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ने सुनवाई के दौरान लालू से कहा-आपके कई शुभचिंतक फोन कर रहे हैं, लेकिन मैं सिर्फ कानून का पालन करूंगा।

    - सीबीआई के वकील ने आरोपियों को चार से सात साल तक की सजा देने की गुजारिश की। कहा- ऐसा होने से समाज में मैसेज जाएगा कि सरकारी खजाने को लूटने पर कड़ी सजा दी जाती है। इन्होंने बेदर्दी से सरकारी खजाने की लूट की है। अगर अलॉटमेंट 100 रु. का होता था, तो ये लोग 40 से 50 लाख तक की निकासी कर लेते थे। अपराध के तरीके और गंभीरता को देखते हुए रियायत की गुंजाइश नहीं है। वहीं, आरोपियों के वकील ने अपने क्लाइंट की बीमारी का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें कम से कम सजा दी जानी चाहिए।

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    क्या है देवघर ट्रेजरी केस?
    - बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे। जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।

    ​कितनी सजा हो सकती है लालू को?
    - लालू के वकील प्रभात कुमार ने DainikBhaskar.com को बताया- लालू और बाकी दोषियों को मैक्सिमम 7 और मिनिमम 1 साल जेल हो सकती है।
    - वहीं, सीबीआई के एक अफसर के मुताबिक, इस केस में लालू को गबन की धारा 409 के तहत 10 साल तक की सजा और धारा 467 के तहत उम्रकैद भी हो सकती है। हालांकि, लालू के वकील ने इसे खारिज कर दिया।


    इन्हें सुनाई जाएगी सजा
    - लालू प्रसाद यादव-बिहार के पूर्व सीएम, जगदीश शर्मा-पॉलिटिकल लीडर, आरके राणा-पॉलिटिकल लीडर, बेक जूलियस-आईएएस, फूलचंद सिंह-आईएएस, महेश प्रसाद-आईएएस, कृष्ण कुमार-गवर्नमेंट इम्प्लॉई, सुबीर भट्टाचार्य-ट्रेजरी ऑफिसर।


    ये चारा सप्लायर्स-ट्रांसपोर्टर्स भी दोषी
    - त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजा राम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी।

    ये हो चुके हैं बरी
    - जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व सीएम
    - ध्रुव भगत, पूर्व पीएसी चेयरमैन
    - एसी चौधरी, पूर्व आईआरएस ऑफिसर
    - सरस्वती चंद्रा, चारा सप्लायर
    - सदानंद सिंह, चारा सप्लायर
    - विद्या सागर निषाद, पूर्व मंत्री


    कुल कितने आरोपी थे ?
    - एक सीबीआई ऑफिशियल के मुताबिक, इस केस में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 सरकारी गवाह बन गए थे। दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिन्हें 2006-07 में दोषी करार दिया गया था। बाकी बचे 22 आरोपियों पर केस चल रहा था।


    सजा के बाद लालू के पास क्या ऑप्शन होंगे?
    - 3 साल से कम सजा मिलने पर लालू को प्रोविजनल बेल मिल जाएगी।
    - 3 साल से ज्यादा सजा हुई तो फैसले की कॉपी मिलते ही उनकी ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।

    लालू के चुनाव लड़ने पर कितने साल की और रोक लगेगी?
    - झारखंड के पूर्व सॉलिसिटर जनरल अनिल सिन्हा के मुताबिक- लालू को चारा घोटाला के एक केस में 5 साल की सजा पहले ही सुनाई जा चुकी है। इसी सजा की वजह से उनकी लोकसभा मेंबरशिप खत्म हो गई। सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक उन पर चुनाव लड़ने की रोक लगी है। अगर इस केस में लालू को फिर 3 साल से ज्यादा की सजा सुनाई गई तो वो सजा पूरी होने की तारीख से छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।​


    1996 में सामने आया था घोटाला
    - जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था।
    - इसके तहत 1990 के दशक में सरकारी ट्रेजरी से चारा सप्लाई के नाम पर ऐसी कंपनियों को पैसे जारी कर दिए गए जो थी ही नहीं।


    लालू पर क्या आरोप?
    - बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इन्क्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: घोटाले में पहली बार कब जेल गए थे लालू...

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Web Title: Fodder Scam: Lalu Yadav Hearing CBI Court Ranchi
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