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चारा घोटाला के एक और मामले में बिहार के मुख्य सचिव और सीबीआई अधिकारी को बनाया गया आरोपी

चारा घोटाला के एक और मामले में बिहार के मुख्य सचिव और सीबीआई अधिकारी को बनाया गया आरोपी

Dainik Bhaskar

Mar 12, 2018, 06:46 PM IST
अंजनी सिंह, सीएस, बिहार (फाइल) अंजनी सिंह, सीएस, बिहार (फाइल)

रांची। चारा घोटाले से जुड़े दुमका ट्रेजरी से 17 करोड़ 73 लाख 32561 की अवैध निकासी मामले में सीबीआई कोर्ट ने एक बार फिर दुमका के तत्कालीन डीसी तथा बिहार के वर्तमान मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह व सीबीआई के तत्कालीन इंस्पेक्टर अजय कुमार झा को आरोपी बनाया है। स्पेशल जज शिवपाल सिंह ने सोमवार को सीबीआई निदेशक को इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ एक माह के भीतर अभियोजन की स्वीकृति लेने को कहा।

-कोर्ट ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति दाखिल होने के बाद आरोपी अधिकारियों संज्ञान आदेश पारित करेगा और इनकी उपस्थिति के लिए तिथि निर्धारित करेगा। अभिस्वीकृति के लिए कोर्ट ने 12 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है।
इन दोनों अधिकारियों के अलावा कोर्ट ने दुमका पशुपालन विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर शेष मनीराम के दो पुत्र पंकज कुमार और नीरज कुमार तथा मामले के 5 सरकारी गवाह डॉक्टर मोहम्मद शहीद, नरेश प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद चौधरी, शिवकुमार पटवारी और शैलेश प्रसाद सिंह को भी आरोपी बनाया। पांचों आरोपियों को सम्मन जारी करते हुए कोर्ट ने सुनवाई के लिए 28 मार्च की तिथि सुनिश्चित की है।

उपायुक्त अवैध राशि निकासी रोकने के बजाए आपूर्तिकर्ताओं का सहयोग कर रहे थे : कोर्ट
दुमका के तत्कालीन उपायुक्त अंजनी कुमार सिंह पर आरोप :
दुमका के उपायुक्त पद पर कार्य करते हुए उन्हें कोषागार से धड़ल्ले से हो रही अवैध निकासी की जानकारी मिली। उन्होंने 17 अगस्त 1993 को आदेश पारित किया कि एक लाख से अधिक की राशि की निकासी नहीं की जाएगी।

-इस आदेश के बाद सभी आरोपी आपूर्तिकर्ता एक लाख से कम मूल्य के बिल जारी करने लगे और दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी जारी रही। जानकारी के बावजूद उपायुक्त ने निकासी पर न तो रोक लगाई और ना ही अवैध निकासी करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया।

-इससे यह स्पष्ट होता है कि वह आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलीभगत करके अवैध निकासी करवाने में सहयोग दे रहे थे।

सीबीआई ने तो एक आपूर्तिकर्ता को आरोपी बनाने के बजाए उसे मृत दिखा दिया
सीबीआई इंस्पेक्टर अजय कुमार झा पर आरोप :
पशुपालन विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक परिमल चक्रवर्ती दो अगस्त 1998 की अवधि में पद पर थे, जिंदा थे, जांच अधिकारी ने उन्हें आरोपी बनाने के बजाए मृत दिखा दिया।

-दूसरे मामले में इसे ही आरोपी बनाया, जिनमें उसे सजा मिली। वर्ष 1991-92 और 1995-96 में दुमका ट्रेजरी से सरकारी राशि की अवैध निकासी होने के स्पष्ट प्रमाण मिलने के बावजूद जांच पदाधिकारी ने डीसी को बचाया, आरोपी नहीं बनाया।

-देवघर में पदस्थापित डॉक्टर पीतांबर झा, जिसके हस्ताक्षर से रसीद निर्गत हुए थे, इस आरोप में उसे निलंबित भी किया गया था। पर जांच पदाधिकारी ने उसे आरोपी बनाने के बजाए गवाह बना दिया।

-तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर शेष मुनीराम पटना आवास में रहता था, उसके साथ उसके दोनों बेटे पंकज कुमार और नीरज कुमार भी रहते थे, संजय कुमार अग्रवाल भी साथ में रहता था पर जांच पदाधिकारी ने सिर्फ डॉक्टर सेस मुनीराम को आरोपी बनाया, जो बाद में मर गया। उनके दोनों बेटों को जांच अधिकारी ने बचा दिया।

इन्हें अभियुक्त नहीं बनाया

-इस मामले में अजय कुमार झा ने डा. शेष मनिराम के आवास से जारी आवंटन के दस्तावेज जब्त किए थे। इससे स्पष्ट हुआ था कि उसके दोनों बेटे फर्म चलाते हैं। इनके चार फर्म थे। इनसे सरकारी राशि डाॅ. के बेटों के पास आया था। बावजूद इसके इन्हें अभियुक्त नहीं बनाया।

-वहीं जिन सरकारी सेवकों, डॉक्टर मोहम्मद सईद, रामेश्वर प्रसाद चौधरी, नरेश प्रसाद, शैलेश प्रसाद सिंह और शिवकुमार पटवारी को सीआरपीसी की धारा 306 के तहत सरकारी गवाह बनाया गया वह भी बिल्कुल गलत था। क्योंकि इन पांचों के खिलाफ सीबीआई ने सबूत इकट्ठा कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है इसके बावजूद जांच पदाधिकारी ने इन पांचों को सरकारी गवाह बना कर बचाने का काम किया है ।

क्या है मामला
चारा घोटाला से संबंधित मामला आरसी 45 1996 दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी से संबंधित है। इस घटना को लेकर सबसे पहले दुमका नगर थाना में 22 फरवरी 1996 को प्रशिक्षु आईएएस राजीव वरूण एक्का ने कुल 72 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि फर्जी आवंटन पत्र के आधार पर वर्ष 1991 और 1992 तथा 1995 और 96 की अवधि में दुमका ट्रेजरी से 17 करोड़ 73 लाख 32561 रुपए की अवैध निकासी कर ली गई, जो वास्तविक आवंटन से 10 गुना अधिक था। इस मामले में वर्तमान में 42 आरोपी मामले की सुनवाई का सामना कर रहे हैं। 13 चिकित्सक आरोपी हैं। 26 आपूर्तिकर्ता आरोपी हैं और 3 महिला आरोपी हैं। 14 आरोपियों का सुनवाई के दौरान निधन हो गया है। इस मामले में सीबीआई ने 24 जुलाई 2004 को 61 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। वर्तमान में आरोपियों की ओर से बहस जारी है। 13 मार्च को आरोपी राम अवतार शर्मा और रवि कुमार सिन्हा की ओर से बहस किया जाएगा।

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अंजनी सिंह, सीएस, बिहार (फाइल)अंजनी सिंह, सीएस, बिहार (फाइल)
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