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चारा घोटाला: दोषियों के लिए ओपन जेल सबसे अच्छी, इन्हें गाय पालने का तजुर्बा है: कोर्ट

चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी से जुड़े केस में शनिवार को लालू प्रसाद यादव समेत अन्य दोषियों की 3.5 साल की सजा सुनाई गई।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 06, 2018, 05:46 PM IST

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    शुक्रवार को लालू प्रसाद समेत 5 दोषियों की सजा पर बहस पूरी हुई।

    रांची.चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी से जुड़े केस में शनिवार को लालू प्रसाद यादव समेत 16 दोषियों को साढ़े 3 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना लगाया गया। सजा सुनाने से पहले जज शिवपाल सिंंह ने कहा- "इन लोगों (दोषियोंं) के लिए ओपन जेल सबसे अच्छी, क्योंकि इन्हें गाय पालने का एक्सपीरियंस है।" इससे पहले दो दिन में 10 दोषियों की सजा पर सुनवाई हुई थी। बता दें कि सभी दोषियों को इस मामले में 23 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था।

    सभी दोषी बीमारी का हवाला दे रहे हैं, पर सर्टिफिकेट किसी के पास नहीं: जज

    - लालू यादव समेत सभी दोषियों के वकील ने कोर्ट से क्लाइंट्स के बीमार और बूढ़े होने की दलीलें देते हुए सजा में नरमी की अपील की थी। पूर्व विधायक आरके राणा के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट की उम्र 72 साल है, उन्हें डायबिटीज है। घर में पत्नी के अलावा कोई नहीं है।

    - इस पर कोर्ट ने कहा कि बहादुरी या वीरता का कोई पुरस्कार मिला हो, सर्टिफिकेट है, तो उसे जमा करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी लोग बीमारी के आधार पर सजा कम करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन मेडिकल सर्टिफिकेट कोई नहीं दे रहा।

    - तब वकीलों ने कहा- 'हुजूर कल जमा कर देंगे।' जज ने कहा- 'रोज-रोज ऐसा होगा, तो सजा कब सुनाएंगे।'

    लालू के वकील ने की कम सजा की अपील

    - सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल से ई-कोर्ट में पेश किए गए। बहस शुरू होते ही लालू के वकील ने अपने क्लाइंट के वकील होने के दस्तावेज पेश किए।

    - बताया कि लालू प्रसाद 1999 में ही वकील होने का सर्टिफिकेट ले चुके हैं। कोर्ट ने उसे रिकॉर्ड में ले लिया। इसके बाद वकील ने लालू की सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को आधार बनाते हुए कम से कम सजा की अपील की।

    - वकील ने यह भी कहा था कि लालू को 2013 में चारा घोटाला के चाईबासा ट्रेजरी से 37 करोड़ की अवैध निकासी मामले आरसी 20(ए)96 में पांच साल की सजा मिली है। मौजूदा मामला देवघर ट्रेजरी से मात्र 89 लाख की अवैध निकासी का है। इसी हिसाब से उन्हें कम सजा दी जानी चाहिए।

    सीबीआई की दलील- बिल्कुल स्वस्थ हैं लालू
    - सीबीआई के वकील राकेश प्रसाद ने कहा कि लालू बिल्कुल स्वस्थ हैं। हाल के दिनों में उन्होंने मजबूती से रैली का आयोजन किया था। उनकी दैनिक गतिविधियों और व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रम इसके गवाह हैं।

    - "जहां तक साजिश की बात है तो वह एक राज्य के मुखिया थे, जिन्हें जनता ने चुना था। लेकिन इन्होंने उस दौरान फर्जी आवंटन की जानकारी रहते हुए भी कोषागार से सरकारी राशि की खुली छूट दे रखी थी।"

    - "लालू प्रसाद ने जिस बेदर्दी से सरकारी खजाने की लूट की है, उससे इन्हें आजीवन कारावास या कम से कम 10 साल की सजा मिलनी चाहिए।"

    क्या है देवघर ट्रेजरी केस?
    - बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे। जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।

    इन्हें 3.5 साल जेल, 5 लाख जुर्माना

    1) लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व सीएम
    2) फूलचंद सिंह, पूर्व आईएएस ऑफिसर
    3) महेश प्रसाद, पूर्व आईएएस ऑफिसर
    4) बेक जूलियस, पूर्व आईएएस ऑफिसर
    5) सुनील कुमार सिन्हा,
    6) सुशील कुमार सिन्हा,
    7) राजा राम जोशी
    8) सुबीर भट्टाचार्य

    9) आरके राणा-पॉलिटिकल लीडर

    इन्हें 7 साल सजा, 10 लाख जुर्माना

    10) जगदीश शर्मा, पॉलिटिकल लीडर
    11) सुनील गांधी
    12) त्रिपुरारी मोहन प्रसाद
    13) गोपीनाथ दास

    ये हो चुके हैं बरी
    - जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व सीएम
    - ध्रुव भगत, पूर्व पीएसी चेयरमैन
    - एसी चौधरी, पूर्व आईआरएस ऑफिसर
    - सरस्वती चंद्रा, चारा सप्लायर
    - सदानंद सिंह, चारा सप्लायर
    - विद्या सागर निषाद, पूर्व मंत्री

    कुल कितने आरोपी थे ?
    - एक सीबीआई ऑफिशियल के मुताबिक, इस केस में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 सरकारी गवाह बन गए थे। दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिन्हें 2006-07 में दोषी करार दिया गया था। बाकी बचे 22 आरोपियों पर केस चल रहा था।

    सजा के बाद लालू के पास क्या ऑप्शन होंगे?
    - रांची स्पेशल कोर्ट ने लालू समेत अन्य आरोपियों को 3.5 साल की सजा सुनाई है। 3 साल से ज्यादा सजा होने पर उन्हें बेल नहीं मिल सकती।
    - फैसले की कॉपी मिलते ही लालू की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।


    लालू के चुनाव लड़ने पर कितने साल की और रोक लगेगी?
    - झारखंड के पूर्व सॉलिसिटर जनरल अनिल सिन्हा के मुताबिक- लालू को चारा घोटाला के एक केस में 5 साल की सजा पहले ही सुनाई जा चुकी है। इसी सजा की वजह से उनकी लोकसभा मेंबरशिप खत्म हो गई। सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक उन पर चुनाव लड़ने की रोक लगी है।

    - अगर इस केस में लालू को फिर 3 साल से ज्यादा की सजा सुनाई गई तो वो सजा पूरी होने की तारीख से छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।​

    1996 में सामने आया था घोटाला
    - जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था।
    - इसके तहत 1990 के दशक में सरकारी ट्रेजरी से चारा सप्लाई के नाम पर ऐसी कंपनियों को पैसे जारी कर दिए गए जो थी ही नहीं।

    लालू पर क्या आरोप?
    - बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इन्क्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: घोटाले में पहली बार कब जेल गए थे लालू...

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