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चार दिन के बाद आज से विधानसभा का सत्र

चार दिन के बाद आज से विधानसभा का सत्र

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 10:59 AM IST
विपक्ष ने विस गेट के सामने किय विपक्ष ने विस गेट के सामने किय

रांची। झारखंड विधानसभा का बजट सत्र चार दिनों के अवकाश के बाद सोमवार से शुरू हुआ। स्पीकर दिनेश उरांव की अध्यक्षता में हुई कार्यमंत्रणा समिति में आए प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने के बाद सदन में झामुमो के विरोध के बाद उसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सोमवार को भोजनावकाश के बाद स्पीकर ने उस प्रस्ताव को पढ़ कर सदस्यों को बताया, जिसमें कहा गया है कि 30 जनवरी को वित्तीय वर्ष 2018-19 की सभी अनुदान मांगों पर वाद-विवाद, मतदान और सरकार का उत्तर होगा। उसके बाद विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा और बजट सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो जाएगी।

मालूम हो कि बजट की कार्यावधि 7 फरवरी तक प्रस्तावित है। जब सदन में प्रस्ताव पर मतदान कराया जा रहा था प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा कि उन लोगों को 2019 तक निलंबित कर दिया जाए और सदन चलाया जाए।

कार्यमंत्रणा समिति में सदन चलाने के लिए विपक्ष ने रखा चर्चित मुद्दों पर बहस का प्रस्ताव
सोमवार को भोजनावकाश के बाद स्पीकर दिनेश उरांव की अध्यक्षता में हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सदन की कार्यवाही के लगातार बाधित रहने के सवाल पर चर्चा की गई। झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने प्रस्ताव रखा कि सरकार भ्रष्ट पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई, बाकोरिया कांड, जेपीएससी सहित अन्य ज्वलंत मुद्दों पर सदन में बहस कराए। उस पर सरकार का जवाब आए। इसके बाद विपक्ष सदन की कार्यवाही के संचालन में सहयोग करेगा। प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति दी। कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम भी सहमति व्यक्त की। हालांकि सुखदेव भगत गिलोटीन के पक्ष में दिखे। अंतत: बैठक में बहुमत से प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री रघुवर दास इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हुए। कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में स्वीकृत प्रस्ताव को सदन में रख कर मतदान के माध्यम से पारित कराया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ हेमंत सोरेन और प्रदीप यादव की भी अलग से बैठक हुई। उसमें भी मुख्यमंत्री विपक्ष के प्रस्ताव पर झुकने को तैयार नहीं हुए।

कैबिनेट में सरकार कुछ भी निर्णय ले, सदन में तो गलत का साथ नहीं देंगे : हेमंत सोरेन
प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रोजेक्ट भवन में होने वाली कैबिनेट की बैठक में सरकार कोई भी निर्णय ले, लेकिन सदन में होने वाले गलत निर्णयों का तो हम साथ नहीं देंगे। विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि झामुमो चाहता था कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब दे तो वह सदन चलाने में सहयोग करेगा। लेकिन सरकार जन मुुद्दों पर जवाब देने की ही स्थिति में नहीं है। हालांकि झामुमो ने जिन जन मुद्दों को उठाया, उसे सदन में सरकार द्वारा नकार दिया गया, पर सदन के बाहर न्याय मिला। चाहे वह सीएनटी-एसपीटी का मुद्दा रहा हो या भूमि अधिग्रहण बिल का। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह एक तरफा चल रही थी। सदन भी सरकार के गिरफ्त में आ गया है। छठी जेपीएससी की परीक्षा को लेकर उनके कार्य स्थगन को अमान्य कर दिया जाता है और उसी सवाल को सत्ता पक्ष की ओर से उठवा कर सरकार निर्णय करती है।

भोजनावकाश के बाद मात्र 10 मिनट चला सदन
सोमवार को भोजनावकाश के बाद 2.11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। 2.14 बजे दिन के तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। फिर 3.06 बजे शुरू हुई और 3.13 बजे मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।