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मकर संक्रांति: दही-चूड़ा से हुई दिन की शुरुआत, आसमान में खिले पतंग

मकर संक्रांति: दही-चूड़ा से हुई दिन की शुरुआत, आसमान में खिले पतंग

Gupteshwar Kumar | Last Modified - Jan 14, 2018, 12:55 PM IST

रांची। मकर संक्रांति रविवार को मनाई जा रही है। कुछ लोग सोमवार को भी इसे मनाएंगे। मकर संक्रांति पर स्नान के बाद लोगों ने पूजा-पाठ किया फिर खाने में दही-चूड़ा को शामिल किया। सुबह से ही हर ओर दही-चूड़ा और तिल की खुशबू फैल गई। वहीं, बच्चों ने पतंग उड़ाने का भी लुत्फ उठाया।

मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है। संक्रांति के स्नान को महास्नान माना जाता है। पूरे देश में इस त्योहार को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है, पर झारखंड मेें इसे सात रोचक तरीकोंं से मनाया जाता रहा है। वो भी सालों से। राज्य के विभिन्न इलाकों में जैसी संस्कृति और समुदाय हैं, वैसे ही उनके रीति-रिवाज। रातभर नाच-गाना और पारंपरिक पकवान भी सबके अलग-अलग हैं। कोल्हान में सात तो खोरठा क्षेत्र में चार दिन यह त्योहार मनाया जाता है। वहीं, खड़िया समुदाय के लोग तो इस दिन धांगड़ (मजदूर) की पैर पूजा भी करते हैं। उनकी विदाई और आगमन के लिए यह दिन विशेष माना जाता है। रांची और खूंटी-तमाड़ इलाके में इसे बुरू मागे पर्व भी कहा जाता है। जबकि बुंडू-तमाड़ एरिया में टुसू पर्व कहते हैं। इसमें जल, जंगल, जमीन की पूजा होती है। पूंजी (अन्न) पृथ्वी को अर्पित किया जाता है। उरांव समुदाय में नई फसल घर आने के बाद मकर संक्रांति से मेहमान नवाजी का दौर शुरू हो जाता है। शादी-ब्याह की बातें भी शुरू होती हैं।


बाजारों में रही चहल-पहल
शनिवार की शाम बाजारों में चहल पहल रही। चूड़ा, तिलकुट, लाई और मिठाई की दुकानों में भीड़ जुटी रही। चौक-चौरहे गुलजार रहे। हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश होता है तो यह घटना संक्रमण या संक्रांति कहलाती है। संक्रांति का नामकर उस राशि से हाेता है, जिस राशि में सूर्य का प्रवेश होता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है।

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