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10 मार्च की आदिवासी आक्रोश महारैली मील की पत्थर साबित होगी : आदिवासी संगठन

उक्त दावा रैली की तैयारी को लेकर आयोजित विभिन्न आदिवासी संगठनों की बैठक के बाद की गई।

Kaushal Anand | Last Modified - Mar 04, 2018, 06:30 PM IST

  • 10 मार्च की आदिवासी आक्रोश महारैली मील की पत्थर साबित होगी : आदिवासी संगठन
    प्रेस वार्ता करते विभिन्न आदिवासी संगठनों के सदस्य।

    रांची। कुरमी और तेली को आदिवासी का दर्जा दिए जाने के खिलाफ 10 मार्च को आयोजित आक्रोश महारैली ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगा। उक्त दावा रैली की तैयारी को लेकर आयोजित विभिन्न आदिवासी संगठनों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए आदिवासी नेताओं ने कही। यह रैली हरमू मैदान में होगी।

    जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के झारखंड प्रभारी संजय प्रभारी ने कहा कि सरकार और 42 विधायकों ने कुरमी और तेली को आदिवासी बनाने के पक्ष में किए गए अनुशंसा और समर्थन का वे लोग विरोध करते हैं। जल, जंगल, जमीन, संस्कृति के साथ साथ सांसद, विधायक, जिप अध्यक्ष, मेयर, प्रमुख, मुखिया, ग्राम प्रधान एवं सरकारी नौकरी में मिले आरक्षण को लुटने का प्रयास है। 10 मार्च को आयोजित रैली शांतिपूर्ण होगी। इसे ध्यान में लेकर विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

    महारैली में दक्षिणी छोटानागपुर, उत्तरी छोटानागपुर, पलामू प्रमंडल, कोल्हान और संथाल परगणा से काफी संख्या में लोग आएंगे। आदिवासी सेना के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा आदिवासी सेना दल बल के साथ रैली में शामिल होंगे। केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि कुरमी तेली अपने आरक्षण में बढ़ोतरी की बात करे, ना कि आदिवासी बनने का प्रयास करे। आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि रैली को लेकर एसीएस के सभी, जिला, प्रखंड और कॉलेज कमिटी को बढ़-चढ़ कर शामिल होने का निर्देश दिया जा चुका है सभी अपने संस्कृति एवं परम्परा के साथ शामिल होंगे। केन्द्रीय सरना समिति के फूलचंद तिर्की ने कहां आदिवासी, तेली और कुरमी की संस्कृति परम्परा धार्मिक कर्मकांड में जमीन आसमान का अंतर है। उन्होंने रैली में बाइक जुलूस के माध्यम से शामिल होने की बात कही।

    रैली में सभी शामिल हों : बंधन तिग्गा
    राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहां कि कुरमी एवं तेली समुदाय द्वारा आदिवासियों को संविधान द्वारा मिले अधिकार और आरक्षण छीनने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि वो आसानी से आदिवासियों के लिए आरक्षित मुखिया, प्रमुख, विधायक, सांसद के साथ साथ सरकारी नौकरी और जमीन को हासिल करना चाहते हैं। इनके संविधान विरोधी मांग का समर्थन अपने राजनीतिक लाभ के लिए झारखंड के कुछ आदिवासी सांसद व विधायक कर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और देश के 17 करोड़ आदिवासियों के संविधानिक अधिकार छीनने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने सभी सामजिक संगठनों खास कर युवाओं को 10 मार्च को रैली में शामिल हाेने का आह्वान किया है।

    फोटो: कौशल आनंद।

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Web Title: March 10, Aakrosh Maharali Tribal Organization
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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