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मशाल लेकर रात भर पहरा देते हैं लोग, इस दहशत ने छीन ली नींद

मशाल लेकर रात भर पहरा देते हैं लोग, इस दहशत ने छीन ली नींद

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2017, 11:42 AM IST
मशाल जला पहरा देते लोग। मशाल जला पहरा देते लोग।

धनबाद(झारखंड)। 300 फीट ऊंची पहाड़...। उस पहाड़ पर घना जंगल...। इस पहाड़ की जंगल में हाथियों का झुंड चिंघाड़ता है...। आसपास के 13 गांवों की नींद हाथियों की इस चिंघाड़ ने छीन ली है। पिछले 15 दिन पहले झुंड की मादा हाथियों ने यहां 4 नन्हें गजराज को जन्म दिया है। तब से हाथियों का झुंड यहां डेरा जमाए हुए हैं। रात गहराती है तो गांवों की हर सड़क एक ही आवाज आती है- 'जागते रहियों हाथी आएगा।'

-दिन में यह झुंड अपने नन्हें गजराजों की सुरक्षा करता है। शाम ढलते ही वे अपनी भूख मिटाने के लिए पहाड़ों से नीचे उतर कर गांवों में हमला बोल देता है।
-कभी गांव वालों के फसलों से अपनी भूख शांत कर रहे हैं तो कभी गांवों में घुसकर अपने खाने का सामान खोज रहे हैं। 13 गांवों में रात होते ही हाथियों की दहशत फैल जाती है।
-गांव के पुरुष घरों के बाहर पहरा देते हैं तो महिलाएं अपने बच्चों को सीने से लगाए भगवान से रक्षा की प्रार्थना करती हैं।

'हाथी इस गांव की हर गली को जानते हैं'

-रात का अंधेरा जैसे-जैसे गहराता है, वैसे-वैसे गांव वाले एक जगह जुटने लगते हैं। कोई पुराने मशाल को तेल (केरोसिन) से भिगोता है तो कोई नया मशाल बनाता है।
-गांव के महेश मांझी कहते हैं... 'साहब! हमसे अलग मत हो जाइएगा। आप गांव से अंजान हैं। पर हाथी इस गांव की हर गली को जानते हैं। वह भूखे होंगे, हमला करने से बाज नहीं आएंगे।'
- पहाड़ से गांव तक पहरेदारी होती है। पांच टीम बनाकर गांव वाले पहरा देते हैं। मशालची हाथियों के पीछे-पीछे चलते हैं।
-रात के अंधेरे में गांव की हर गली में हाथी का डर साफ दिखता है। पहरेदार रमेश मांझी की आवाज रात की शांति को भंग करती है। मुश्किल से हर किसी की रात कटती है।

-पुरुष भालजोड़ी पहाड़ पहुंच जाते हैं। मशाल जलाते हैं। जुबान खामोश और आंखें पहाड़ पर टिकी रहती है। इसी बीच, शांत माहौल में अचानक एक हाथी की चिग्घाड़ गूंजी...।
-महेश ने साथी गांव वालों से कहा... सावधान, हाथियों का सरदार अपनी झुंड को संकेत दे रहा है। हाथियों की चिग्घाड़ तेज होती जाती है।
-कुछ पल में उनकी चिंघाड़ गांव में सुनाई पड़ने लगती है। महिलाएं अपने बच्चों का हाथ पकड़ कर घरों से बाहर निकल आती हैं। सभी के चेहरे पर डर दिखता है।

इन गांवों में भी हाथियों का आतंक
भालजोड़ी, बस्ती कुल्ही, जीतपुर, पलमा, डंंडाटांड़, जाताखुंटी, सर्रा, चरककला, चरक खुर्द, कोलहर, भगुडीह, तेतरीयाटांड़, गुलियाडीह, बांधडीह, नेमारी, बेगनरिया, दोमुंडा, छोटा नागपुर, बड़ा नागपुर, हाथीटांड़, देव पहाड़, खरमा, कमलपुर, नीमटांड़, मधुरसा, टुंडी, गादी टुंडी, लोधरिया, संग्रामडीह, राजमडीह, काशीटांड़, सुंदर पहाड़ी, बांसजोरिया, बरदबांध, झीनाकी, अरवाटांड़, करमाटांड़, सिंदुआरीटांड़, चालधोवन, रजामडीह, बडबाद, हाथसारा, भाल पहाड़, कुहरीटांड़, पुरनाडीह, भेलवई, कुबरीटांड़ आदि शामिल है।

फोटो: धर्मेंद्र पांडेय।

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मशाल जला पहरा देते लोग।मशाल जला पहरा देते लोग।
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