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बजट

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Dainik Bhaskar

Jan 23, 2018, 04:37 PM IST
बजट पेश करते मुख्यमंत्री रघुव बजट पेश करते मुख्यमंत्री रघुव

रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2018-19 का मूल बजट पेश किया। यह बजट करीब 80,200 करोड़ का है।

बजट की मुख्य विशेषताएं
-वित्तीय वर्ष 2018-19 में ‘न्यू इंडिया न्यू झारखंड’ के उद्देश्यों को पूरा किए जाने का संकल्प लिया गया है। इसके तहत हर खेत को पानी, हर हाथ को काम तथा हाथ से हाट तक व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
-वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट भाषण में की गईं कुल 142 घोषणाओं में 121 पूर्ण हो चुकी हैं तथा शेष 21 के कार्यान्वयन की प्रक्रिया चल रही है।
-आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभिन्न माध्यमों से कुल 1,151 सुझाव प्राप्त हुए, जिसमें से 38 मुख्य सुझावों का चयन किया गया है।
-योजनाओं में गति लाने के उद्देश्य से छोटी-छोटी योजनाओं को अंब्रेला स्कीम में समाहित किया गया है। इससे जहां एक ओर बजट शीर्षों की संख्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर विभागों को योजना कार्यान्वयन में ज्यादा फ्लेक्सीबीटी रहेगी।
-आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 80,200 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट का आकलन है, जिसमें राजस्व व्यय 62,744.44 करोड़ रुपए तथा पूंजीगत व्यय 17,455.56 करोड़ रुपए का है। वित्तीय वर्ष 2017-18 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट की कुल वृद्धि 5.98% है।
-वित्तीय वर्ष 2018-19 के कुल बजटीय उपबंध में स्थापनादि व्यय 33,697 करोड़ रुपए एवं स्कीमों के लिए 46,503 करोड़ रुपए रखे जाने का प्रस्ताव है।

-शिक्षा प्रक्षेत्र में सबसे ज्यादा 10,873.74 करोड़ रुपए का उपबंध प्रस्तावित है, जो कुल वार्षिक बजट का 3.29% है। इसमें उच्च शिक्षा के लिए 1,219.96 करोड़ रुपए शामिल है।
-तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास प्रक्षेत्र में चालू वित्तीय वर्ष में 704.00 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान को आगामी वित्तीय वर्ष में बढ़ाकर 831.40 करोड़ रुपए किया गया है।
-ग्रामीण प्रक्षेत्र में 11,854.10 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है, जो कुल वार्षिक बजट का 14.71% है। विगत वर्ष से ग्रामीण प्रक्षेत्र में कुल बजटीय उपबंध का 13.18% की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
-कृषि, पशुपालन, सहकारिता, जल संसाधन तथा इससे सीधे जुड़ी मांगों के तहत कृषि एवं संबद्ध कार्यों को समेकित करते हुए आगामी वित्तीय वर्ष में कृषि बजट 5,807.64 करोड़ रुपए का अनुमानित है।
-वित्तीय वर्ष 2017-18 के 5,375.22 करोड़ रुपए के बजट प्रावधान की तुलना में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित ‘कृषि बजट’ में 8.05 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है।
-महिलाओं के विकास, विशेष रूप से सखी मण्डलों को सशक्त और जीवन्त संस्था के रूप में विकसित करने का निर्णय। सखी मण्डलों के माध्यम से राज्य में उपयोग किए जाने वाले अंडा, सब्जी, दूध, चादर, तौलिया, स्कूली गणवेश, हस्तशिल्प, तसर एवं लाह पर आधारित उत्पादों को स्केल-अप करके उनका स्थानीय बाजार में विपणन सुनिश्चित किया जाएगा।
-वित्तीय वर्ष 2018-19 में 8,194.59 करोड़ रूपये का ‘जेन्डर बजट’ प्रस्तावित है, जो चालू वित्तीय वर्ष 7,684.51 करोड़ रूपये की तुलना में 6.64 प्रतिशत की वृद्धि है।
-‘अनुसूचित जनजाति क्षेत्र तथा अनुसूचित जाति विकास बजट’ प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य में विकास से संबंधित विभिन्न स्कीमों, जिनमें अनुसूचित जनजाति क्षेत्र एवं अनुसूचित जातियों के विकास का वर्गीकरण संभव है, के लिए कुल प्रावधानित राशि 46,503 करोड़ रुपए होती है, जिसमें से अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लिए 20,326.17 करोड़ रुपये (43.71 प्रतिशत) कर्णांकित है।
-यह चालू वित्तीय वर्ष में 18,026 करोड़ रुपए की तुलना में 2,300.17 करोड़ रुपए अधिक है। इसी तरह अनुसूचित जातियों के विकास के लिए वर्ष 2018-19 में 4,083.89 करोड़ रुपए (8.78 प्रतिशत) व्यय किए जाने का प्रस्ताव हैं।
-इस तरह अनुसूचित जनजाति क्षेत्र एवं अनुसूचित जाति विकास बजट का कुल आकार 24,410.06 करोड़ रुपए होती है, जो स्कीमों के लिए निर्धारित कुल बजटीय का 52.49 प्रतिशत है।

इसपर रहेगा विशेष फोकस
-ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय को दोगुणा करना।
-रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करना।

-अनुसूचित जनजाति/जाति एवं अभिवंचित वर्गों का विकास।
-महिला सशक्तिकरण।

-पिछड़े जिलों/प्रखण्डों का समेकित विकास।
-इसके साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा आधारभूत संरचना यथा- पेयजलापूर्ति, नगरीय विकास, गांव को सड़क से जोड़ना तथा प्रत्येक घर में विद्युत आपूर्ति पहुँचाने पर भी केन्द्रित रहेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय को दोगुना करना
-ग्रामीण परिवारों को उन्नत कृषि, मछली पालन, पशुपालन, सिंचाई के साधन, कौशल विकास से जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त बनाते हुए आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
-इस परियोजना में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के परिवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, वहीं दूसरी ओर 50 फीसदी से अधिक महिला किसानों को भी लाभ मिलेगा।
-कृषि उत्पादों का विपणन के लिए कृषकों द्वारा उत्पादित सब्जी, फल एवं फूल के बाजार तक जाने के पूर्व उनके भण्डारण के लिए राज्य में सुव्यवस्थित कोल्ड चेन आवश्यक है। इस उद्देश्य से कोल्ड स्टोरेज के अलावा, राज्य में 100 छोटे कोल्ड रूम बनाये जाने का प्रस्ताव है।
-फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है, ताकि कृषि उत्पाद में व्ल्यू एडिसन करके किसानों को उचित मूल्य दिलाया जा सके।
-दीनदयाल ग्राम स्वावलम्बन योजना के माध्यम से विभिन्न चरणों में राज्य के प्रत्येक पंचायत के ग्रामीणों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जनसंख्या नियंत्रण, स्वच्छता, वैज्ञानिक चिन्तन, संगठन के महत्व, नशाबंदी, कुल्हारीबंदी, चराइबंदी, श्रमदान, बाल श्रम उन्मूलन, बाल विवाह उन्मूलन, जलछाजन, जैविक खेती योग्य व आध्यात्मिक जीवन शैली के माध्यम से संबंधित विषयों पर जागरूक करना होगा। इस योजना का क्रियान्वयन झारखण्ड स्वावलम्बन सोसाईटी के माध्यम से किया जाएगा।
-ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे पुल-पुलिया एवं पथों के निर्माण का प्रस्ताव है। आवश्यकतानुसार बीज प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना की जाएगी, जहां इन बीजों को प्रसंस्कृत करके इनके प्रमाणीकरण की व्यवस्था होगी।
-बायो गैस प्लांट की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव है। खेतों में छोटे-छोटे ट्रांर्स्फामर लगाए जाएंगे तथा आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा की व्यवस्था की जाएगी।

-किसानों एवं खेतीहर मजदूरों के असामयिक मृत्यु पर उनकी सहायता सरकार करेगी। सांप काटने, कुआं धसने जैसी आकस्मिक आपदा राहत के लिए पीड़ित परिवारों को सरकार द्वारा चार लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।
-देवघर, रांची, सिमडेगा एवं निकटवर्त्ती क्षेत्रों में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए नई परियोजनाएं चलाए जाने का प्रस्ताव है।
-छोटी-छोटी योजनाओं के निर्माण की जवाबदेही भी ग्राम विकास समिति/आदिवासी विकास समिति को ही सौंपे जाने की व्यवस्था की जाएगी।
-‘मेधा दूध’ को भी हम सशक्त करना चाहते हैं, इसके लिए एनडीडीबी के सहयोग से एक महत्ती कार्य योजना के तहत रांची में एक लाख लीटर तथा देवघर, पलामू, साहेबगंज, गिरिडीह एवं जमशेदपुर में 50 हजार लीटर क्षमता के डेयरी प्लांट का निर्माण आरंभ कराया जाएगा।
-गोड्डा में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधित विधेयक सदन के समक्ष शीघ्र प्रस्तुत किया जाएगा तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 में साहेबगंज में कृषि महाविद्यालय स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
-राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिए अगले वित्तीय वर्ष से सभी विधायकों के सहयोग से गिफ्ट मिल्क स्कीम को राज्य के अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से प्रारम्भ किए जाने का प्रस्ताव है। जिसके तहत कुपोषण से पीड़ित बच्चों को प्रतिदिन मुफ्त में दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
-विधायकगण अपनी निधि से स्ट्रीट लाईट का अधिष्ठापन करवा सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों विशेषकर, बच्चों के लिये पंचायत स्तर पर चरणबद्ध तरीके से छोटे-छोटे पार्कों का निर्माण कराया जाएगा।

रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक-से-अधिक अवसर पैदा करना
-युवाओं को शिक्षा के साथ स्किल डेवलपमेंट पर फोकस कर उन्हें रोजगार मुहैय्या कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य में कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव है।
-युवाओं में हुनर को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास मिशन के माध्यम से तीन लाख युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जाना है। 50 हजार सरकारी नियुक्तियां की जाएंगी।
-नए उद्योगों के माध्यम से 50 हजार प्रत्यक्ष रोजगार तथा 1.50 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किया जाएगा।
-विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय, रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय तथा नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के परिसर निर्माण के लिए कार्रवाई की जाएगी।
-विश्वविद्यालय से दूरस्थ स्थित जिला मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से पीजी की पढ़ाई प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। युवाओं को सक्षम बनाने के लिए सभी जिलों में एक-एक मेगा स्किल सेन्टर की स्थापना किए जाने पर कार्य किया जा रहा है।
-गुणवतापूर्ण शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय/महाविद्यालयों तथा डॉ॰ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में शोध निधि की स्थापना का प्रस्ताव है।
-जिन महाविद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला नहीं है, उनमें विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना का प्रस्ताव है। बड़े जिला मुख्यालयों में लाइब्रेरी कम मोटिवेशन सेंटर की स्थापना किये जाने का प्रस्ताव है।
-विश्वविद्यालय स्तर पर स्टार्टअप कोषांग की स्थापना की जाएगी, ताकि इच्छुक विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त करने में तत्काल सहायता प्राप्त हो सके।
-राज्य में खेल विश्वविद्यालय अधिनियमित कर दिया गया है, जिसके गठन के उपरान्त राज्य में खेल/खेल विज्ञान/खेल शिक्षा तथा खिलाडि़यों का समुचित संवर्द्धन एवं विकास हो सकेगा।
-राज्य में मीठी क्रान्ति लाने के लिए मधुमक्खी पालन को वृहद पैमाने पर प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके तहत मुख्यमंत्री लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से 25,000 किसानों को प्रशिक्षित कर इससे जोड़ा जायेगा। साथ ही, उत्पादित मधु के प्रोसेसिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग का भी प्रावधान किया जा रहा है।
-100 लाह परिसंस्करण इकाई की स्थापना की जाएगी तथा इससे उत्पादित सीड लाह एवं बटन लाह की देश-विदेश में बिक्री की व्यवस्था की जाएगी। दुमका प्रमंडल में रेशम प्रसंस्करण इकाई की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव है।
-रांची, देवघर, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर तथा रजरप्पा में हस्तशिल्प इम्पोरियम की स्थापना की जाएगी। रांची व खरसावां में पीपीपी मोड में सिल्क पार्क की स्थापना की जाएगी।
-सखी मण्डलों को सशक्त करते हुए महिला लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से 4.50 लाख महिलाओं को स्वावलम्बन के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराए जाने की कार्य योजना तैयार की गई है।
-पतरातू को वृहत पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए कार्य प्रगति पर है तथा पूर्ण होने के पश्चात् यह राज्य का वृहत पर्यटक स्थल बनेगा।
-देवघर, बासुकीनाथ, ईटखोरी, रजरप्पा, मसानजोर, चांडिल, दलमा, अंजनधाम, लुगुबुरू के पर्यटकीय विकास के लिए वृहद् कार्य योजना पर कार्य प्रारम्भ किया जाएगा।
-लुगुबुरू को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया जाएगा। सरायकेला जिले के छऊ महोत्सव को भी राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया जाना प्रस्तावित है।
-प्रसाद योजनान्तर्गत देवघर का विकास, स्वदेश दर्शन योजनान्तर्गत जमशेदपुर-रांची-नेतरहाट-बेतला ईको टूरिज्म सर्किट का विकास तथा चांडिल, गेतलसूद, नेतरहाट तथा बेतला का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जाएगा।
-कौलेश्वरी, ईटखोरी तथा रजरप्पा को वृहत गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा तथा कौलेश्वरी में पीपीपी मोड के आधार पर रोपवे अधिष्ठापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री वृद्धजन तीर्थ दर्शन योजना पूर्ववत जारी रहेगी।
-चरणबद्ध तरीके से प्रखण्ड मुख्यालय, पर्यटन स्थलों तथा 5 शहरों में ‘लघु कुटीर उद्योग हाट’ की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है, जहां लघु कुटीर उद्योग से निर्मित वस्तुओं की बिक्री हो सकेगी।

अनुसूचित जनजाति/जाति एवं अभिवंचित वर्गों का विकास
-अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों एवं अन्य अभिवंचित वर्गों के लिए बजट प्रावधान का 50 प्रतिशत से अधिक (52 प्रतिशत) राशि रखी गई है।
-वित्तीय वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जनजाति बाहुल गांवों में आदिवासी विकास समिति के माध्यम से छोटे-छोटे चेक डैम, तालाब, जल संचयन संरचनाएँ आदि योजनाओं का निर्माण कराया जाएगा।
-आदिवासी क्षेत्रों में ओल्ड एज होम की स्थापना भी करने का प्रस्ताव है। अल्पसंख्यक बच्चों के लिए शिक्षा एवं हुनर का कार्यक्रम चलाया जाएगा।
-संथालपरगना प्रमण्डल के साहेबगंज, दुमका, गोड्डा एवं पाकुड़ जिले में 5,000 आदिम जनजाति परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने का लक्ष्य रखा गया है।
-कुपोषण को कम करने के लिए जेटीईएलपी के परियोजनान्तर्गत 400 गांवों में 48,000 पोषण गार्डेन का निर्माण कराया जाएगा।
-अनुसूचित जनजाति/जाति के डॉक्टर अगर जनजातीय क्षेत्र में अस्पताल का निर्माण करते हैं तो उन्हें 50 लाख रुपए तक बैंक से ऋण उपलब्ध कराये जाने की योजना प्रारंभ की जाएगी।
-स्वतंत्रता संग्राम में टाना भगतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। टाना भगतों को मुख्य धारा में लाने एवं इनके सर्वांगीण विकास के लिए टाना भगत विकास प्राधिकार का गठन किया गया हैै। इनकी भूमि को लगान मुक्त करने का भी प्रस्ताव है।
-अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में घंटी आधारित स्थानीय शिक्षक/सेवानिवृत शिक्षकों की सेवा ली जायेगी। कब्रिस्तान की घेराबंदी के साथ-साथ सरना-मसना स्थलाें की घेराबंदी का कार्य भी चरणबद्ध रूप से पूरा कराया जाएगा।
-नगरीय क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मुक्तिधाम (श्मशान घाटों) को अधिक सुविधायुक्त बनाये जाने का प्रस्ताव है।
-दिव्यांग जनों को विपरीत परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने हेतु राज्य दिव्यांग कल्याण कोष की स्थापना की जायेगी।

महिला सशक्तिकरण
-एक लाख सखी मंडलों की संख्या को बढ़ाकर 1.50 लाख करने की योजना है। इन्हीं सखी मण्डलों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराते हुए स्वावलम्बी बनाए जाने की महती कार्यक्रम तैयार किया गया है।
-जमशेदपुर महिला कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में उत्क्रमित किया जाएगा। महिला महाविद्यालयों के पास चरणबद्ध तरीके से 300 शैय्या वाले महिला छात्रावासों का निर्माण कराया जाएगा।
-सभी कस्तुरबा विद्यालयों के लिए चहारदिवारी का निर्माण कराया जाना भी प्रस्तावित है। 20 चिन्हित जिलों में महिला शक्ति केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।
-महिला महाविद्यालयों के पास महिला छात्रावासों का निर्माण किए जाने का प्रस्ताव है। दहेज रहित विवाह को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के आयोजकों को 1,000 रुपए प्रति विवाह प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
-जो संस्थाएं लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है, उन्हें भी सहायता राशि प्रदान की जाएगी। महिलाओं को पचास लाख रुपए के विक्रय पत्र के निबंधन पर मुद्रांक एवं निबंधन शुल्क से पूर्ण छूट को आगामी वित्तीय वर्ष में भी जारी रखा जाएगा।


नगरीय विकास
-प्रधानमंत्री आवास योजना के तीसरे घटक ‘भागीदारी एवं किफायती आवास’ के अन्तर्गत 40,000 आवासों के निर्माण का कार्य पूर्ण किया जाएगा।
-27 नगर निकायों में एक-एक दादा-दादी पार्क का निर्माण भी प्रस्तावित है। धनबाद, देवघर, जमशेदपुर एवं रांची में इन्टर स्टेट बस टर्मिनल तथा ट्रान्सपोर्ट नगर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
-मोरहाबादी मैदान, रांची में विकास एवं सौन्दर्यीकरण का प्रस्ताव है। शहरी क्षेत्र में वार्ड विकास केन्द्र खोले जाने का प्रस्ताव है।
-वित्तीय वर्ष 2018-19 में बासुकीनाथ, धनबाद एवं रामगढ़ में अरबन हाट का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है।
-आर्थिक रूप से कमजोर एवं अल्य आय वर्ग के लिये निर्मित किफायती आवास के निबंधन पर मात्र एक रुपए कर राशि मुद्रांक एवं निबंधन शुल्क के रूप में ली जाएगी।

पेयजल एवं स्वच्छता
-वित्तीय वर्ष 2018-19 में पाईप जलापूर्ति योजना से ग्रामीण आबादी का 40 प्रतिशत आच्छादन किया जाएगा। सभी आदिम जनजाति टोलों में पाईप जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
-एसबीएमजी अन्तर्गत पूरे राज्य को वित्तीय वर्ष 2018-19 में खुले शौच से मुक्त घोषित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2018-19 में फ्लोराईड एवं आर्सेनिक प्रभावित टोलों का शत प्रतिशत शुद्ध पेयजल से आच्छादित किया जाएगा।
-6 अति पिछड़े जिलों में प्राथमिकता के आधार पर पेयजलापूर्त्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा सकेगा।

जल संसाधन
-लघु सिंचाई अन्तर्गत 500 चेकडैम एवं 300 वियर योजना का निर्माण वर्ष 2018-19 में कराए जाने का प्रस्ताव है।
-300 पुरानी मध्यम सिंचाई योजना एवं आहर/तालाब के पुनर्स्थापन का कार्य भी कराये जाने का प्रस्ताव है।
-326 चेकडैम योजना का कार्य पूर्ण कराते हुए 20,363 हे॰ अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित किया जाना प्रस्तावित है।
-22 पूर्ण मध्यम सिंचाई योजनाओं के आधुनिकीकरण/लाईनिंग का कार्य कराया जाना भी वित्तीय वर्ष 2018-19 की कार्य योजना में शामिल है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता
-शिक्षा के गुणवता के लिए झारखंड शैक्षणिक शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान को प्रभावकारी बनाते हुए राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा।
-राज्य के 8 अनुमण्डलीय पुस्तकालयों को जिलास्तरीय पुस्तकालय में उन्नयन तथा सभी जिलास्तरीय पुस्तकालयों में आगामी 3 वर्षो में मोटीवेषनल केन्द्र तथा ई-लाईब्रेरी की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है।
-300 या अधिक नामांकित सभी प्लस 2 विद्यालयों, जहां नामांकन क्षमता 500 या उससे अधिक है, में कम्प्यूटर शिक्षा तथा स्मार्ट क्लास की व्यवस्था मुख्यमंत्री उच्च माध्यमिक षिक्षा प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत किए जाने का प्रस्ताव है।
-89 मॉडल विद्यालयों को सीबीएसई की तर्ज पर इंगलिस मीडियम शैक्षणिक संस्था के रूप में पूर्णरूपेण विकसित किये जाने का लक्ष्य है।
-सभी प्रखण्ड मुख्यालयों के एक विद्यालय में योग शिक्षा की शुरुआत किया जाना प्रस्तावित है। भारत सरकार से समन्वय स्थापित कर खूंटी एवं रामगढ़ जिले में अगले शैक्षिक सत्र से नवोदय विद्यालय की स्थापना तथा पलामू जिले में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना किये जाने का प्रस्ताव है।
-विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्गठन कर संकाय एवं विषयवार शिक्षक की समुचित व्यवस्था किया जाना लक्षित है।
-नक्सल गतिविधि से प्रभावित परिवार के बच्चों के लिये चार आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव है।
-अवैध पलायन से मुक्त करायी गई बालिकाओं के लिए दो आवासीय विद्यालय की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
-स्थापित किए गए दो बीएड कॉलेज-हाट गम्हारिया एवं रेहला को वित्तीय वर्ष 2018-19 में कार्यशील बनाया जाना प्रस्तावित है।
-आवासीय माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के लिए इनमें व्यावसायिक पाठ्यक्रम चलाये जाने का प्रस्ताव है।

विधि व्यवस्था
-स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम (एसआईएस) के तहत झारखंड जगुआर का उन्नयन एवं सुदृढि़करण; कुल-77 फोर्टिफाईड पुलिस थानाें के निर्माण तथा उग्रवाद-निरोध के बिन्दु पर विशेष आसूचना ब्यूरो (एसआईबी) के गठन, उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण की योजना है।
-राज्य आपदा मोचन बल का गठन किया जाएगा। छः शहरों, यथा-धनबाद, बोकारो, रामगढ़, जमशेदपुर, देवघर तथा दुमका में भी सीसीटीवी प्रणाली लागू किये जाने की योजना है।
-सरकार राज्य के भूमिहीनों को गांव में खेती के लिए पांच एकड़ जमीन देगी। साथ ही, आवास निर्माण के लिए भी 12.5 डिसमिल जमीन दी जाएगी।
-शहीद सैनिकों, अर्द्ध सैनिक बलों एवं पुलिस कर्मियों के परिजनों को जीवन यापन के लिए गांव में पांच एकड़ जमीन दी जायेगी। इस निर्णय का लाभ लगभग दो लाख परिवारों को मिलेगा।
-भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के कार्यालय राज्य के सभी प्रमंडलों में खोले गए हैं तथा इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। वर्ष 2014 में सिर्फ 31 लोग भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए थे, वहीं 2015 में 54, 2016 में 84 तथा 2017 में 138 लोग पकड़े जा चुके हैं।
-सरकार द्वारा राँची में प्रेस क्लब बनाकर उपलब्ध कराया गया है तथा धनबाद में भी प्रेस क्लब की स्वीकृति दी गई है। जमशेदपुर, चाईबासा, दुमका एवं देवघर में प्रेस भवन बनाये जाएंगे।
-राज्य में राजकोषीय अध्ययन संस्थान के माध्यम से राजस्व संग्रहण में वृद्धि के उपाय, तथा वित्तीय प्रबंधन एवं योजनाओं का परिणान्मोमुखी मूल्यांकन (रिजल्ट ऑरिएंटेड इवोलेशन) किया जाएगा।

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