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यहां हल्की सी चूक से जा सकती है जान, छिपा है तालाब का रहस्य

यहां हल्की सी चूक से जा सकती है जान, छिपा है तालाब का रहस्य

Gupteshwar Kumar | Last Modified - Dec 19, 2017, 01:09 PM IST

धनबाद (झारखंड)।यहां से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भटिंडा फॉल। यह देखने में जितना आकर्षक लगता है, उतना ही खतरनाक भी है। आकर्षक होने की वजह से यहां आने वाले पर्यटक तब हैरान रह जाते हैं, जब यहां की खूबसूरती उन्हें नजर आती है। कहा जाता है कि इस फॉल के बीच तीन तालाब हैं और सभी में गहरे कुएं हैं। ऐसे में यहां हल्की सी चूक लोगों की जान तक ले लेती है। पानी पहले बड़े तालाब में आता है...

भटिंडा फॉल में सबसे ज्यादा नए साल के दौरान पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है। यहां लोग पिकनिक मनाने के उद्देश्य से पहुंचते हैं। ऐसे में dainikbhaskar.com आपको बता रहा है यहां के बारें में...

-कहा जाता है कि चट्टानों के बीच तीन तरह के तालाब हैं। बड़ा, मध्य और छोटा तालाब। पानी पहले बड़े तालाब में आता है। फिर ओवरफ्लो कर मध्य तालाब में और वहां से छोटे तालाब में जाता है। हर तालाब में गहरे कुएं हैं।
-भटिंडा फॉल के पास दो नदियों का मिलन भी है। कतरी नदी पारसनाथ से निकल कर उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई मुनीडीह पहुंचती है। पूरब की तरफ से दामोदर नदी आती है।
-फॉल के पास दोनों नदियां मिलती हैं। यहां चट्टानें 12 डिग्री के कोण पर नदी की धार की दिशा में झुकी हुई हैं। ये चट्टानें नदियों की धार को रोकती हैं।

फॉल बनने के पीछे ये है तर्क
-नदी की धार जब चट्टानों से टकराकर 10 मीटर की ऊंचाई से गिरती हैं, तो बड़ा सुंदर दृश्य बनता है। कुछ लोगों का मानना है कि भटिंडा फॉल प्रकृति की देन है।
-यहां दो नदियों का मिलना और चट्टानों से नदी का टकराना एकदम प्राकृतिक है। यह किसी मानवीय निर्माण कार्य से नहीं बना।
-कुछ लोगों का कहना है कि जहां फॉल है, वहां बलुआ पत्थर मिलते हैं। नदी किनारे पत्थरों को काटना आसान है। इसलिए कभी वहां पत्थरों का खनन किया गया, जिससे फॉल बना।
-अब यहां घूमने-फिरने की व्यवस्था की गई है। पत्थरों के बीच सीढ़ी बनी हुई है। झूले भी लगे हैं। इन सब से भटिंडा फॉल की सुंदरता को चार चांद लग गया है।

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