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जेल में लालू के पड़ोसी हैं ये पूर्व मंत्री, पत्नी के साथ हुआ ऐसा कि आ गए जुर्म की दुनिया में

जेल में लालू के पड़ोसी हैं ये पूर्व मंत्री, पत्नी के साथ हुआ ऐसा कि आ गए जुर्म की दुनिया में

Gupteshwar Kumar | Last Modified - Jan 03, 2018, 10:32 AM IST

जमशेदपुर (झारखंड)। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव 23 दिसंबर से बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। शनिवार काे सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने चारा घोटाले में दोषी लालू को सजा सुनाई। जेल में लालू के पड़ोसी कई वीआईपी नेता भी रहे। इनमें से एक हैं झारखंड के पूर्व मंत्री गोपालकृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर। राजा पीटर की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। इनकी पत्नी के साथ कुछ ऐसा हुआ कि वो अपराध की दुनिया की तरफ बढ़ते चले गए।

-लालू प्रसाद को बिरसा मुंडा जेल डिविजनल वार्ड में रखा गया है। वीवीआईपी कैदियों के लिए यहां 10 वार्ड बनाए गए हैं। लालू छठे कैदी हैं। पहले से यहां पूर्व मंत्री राजा पीटर भी बंद हैं।

-राजा पीटर पर पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों द्वारा हत्या कराए जाने के आरोप हैं। इसी आरोप के तहत फिलहाल वो जेल में बंद हैं।
-राजा पीटर ने 1979 में टाटा स्टील में ट्रेड अप्रेंटिस की परीक्षा दी थी। आदिवासी और मूलवासी कैटगरी में रिजल्ट में अव्वल रहे थे। राजा पीटर ने कर्मचारी के तौर पर टाटा स्टील ज्वाइन किया।
-नौकरी शुरू की तो विवाह हुआ मनीषा उर्फ बेला खेस से। पिता केएम पातर आदिवासी समाज में बेहद प्रतिष्ठित थे। टाटा स्टील में सुपरवाइजर भी थे। सबकुछ ठीक चल रहा था।

-इसी बीच कुख्यात डकैत युनूस के सहयोगी शेखर शर्मा ने राजा पीटर की पत्नी से अभद्रता की, छेड़छाड़ के बाद रौब भी जमाया।
-इस पर राजा पीटर ने शेखर को बुरी तरह मारा। शेखर अपराधियों के साथ था। उससे बचने के लिए राजा पीटर अपराध की दुनिया की तरफ बढ़ता चला गया।

केस मुकदमा के कारण परिवार की हालत बिगड़ती गई
-शेखर शर्मा मारा गया तो राजा पीटर पर ही आरोप लगा। मुकदमा चला, मगर बरी हो गए। राजा पीटर अपराध की दुनिया में गया तो केस मुकदमा के कारण परिवार की हालत बिगड़ती गई।
- पत्नी स्टोव पर खाना पका रही थी कि एक हादसा हुआ और उसकी जलने से मौत हो गई। पत्नी नहीं रही और अपराध की दुनिया में आने के बाद राजा पीटर की नौकरी भी गई।
-1995 में जमशेदपुर के तत्कालीन चर्चित एसपी डाॅ. अजय कुमार के क्राइम कंट्रोल ऑपरेशन में राजा पीटर उनके हत्थे चढ़ गया।
-तब तक राजा पीटर पर मर्डर, आर्म्स एक्ट, धमकाने और मारपीट के कई केस हो चुके थे। राजा का इतिहास जानने के बाद एसपी डाॅ. अजय ने उसे जिलाबदर करवा दिया।
-राजा तब पैतृक गांव तमाड़ स्थित दबईकुंडी चले गए। आरती जायसवाल तमाड़ में सामाजिक काम करती थी। आरती से उसने दूसरा विवाह किया। धीरे-धीरे राजा पीटर हर मामले से बरी होते गए।
-राजा पीटर ने 2005 में रमेश सिंह मुंडा के खिलाफ चुनाव लड़ा। हार गए। रमेश सिंह मुंडा की हत्या के बाद 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा।
-धोनी की तरह लंबे बाल रखने वाले पीटर ने शिबू सोरेन को हराकर सबको चौंका दिया। 2010 में दोबारा विधानसभा चुनाव जीता तो उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री बनने का अवसर मिला। कैबिनेट मंत्री रहते राजा पीटर पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे।

सुदेश महतो के साथ सियासी अदावत जग जाहिर थी
-राजा पीटर की अाजसू नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो के साथ राजनीतिक अदावत जगजाहिर थी। राजनीतिक अदावत धीरे-धीरे व्यक्तिगत हो गई।
-लंबे समय तक मंत्री और डिप्टी सीएम रहते हुए सुदेश महतो जितना ध्यान अपने निर्वाचन क्षेत्र सिल्ली में देते थे, उससे कहीं अधिक उनकी नजर तमाड़ पर रहती थी।
-रमेश सिंह मुंडा के पुत्र विकास मुंडा को राजा पीटर के मुकाबले खड़ा करने में सुदेश महतो ने कोई कसर नहीं छोड़ी। राजा पीटर जब जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बने तो पार्टी के महतो नेताओं ने मोर्चा खोल रखा था।
-राजा पीटर शुरुआत से शरद यादव के साथ थे। नीतीश कुमार का जदयू में असर बढ़ता गया तो पीटर ने पार्टी छोड़ दी। फिर भाजपा में आए।
-योजना थी कि 2014 का विधानसभा चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़ेंगे। चुनाव के ठीक पहले भाजपा-आजसू का गठबंधन हो गया।
-तमाड़ का दो बार विधायक रहने के बावजूद आजसू ने उस सीट पर दावा नहीं छोड़ा। सुदेश महतो गठबंधन करने के लिए तमाड़ सीट आजसू को देने पर अड़ गए।
-भाजपा नेतृत्व इसके लिए राजी हो गया तो पीटर ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया। इस चुनाव में सिल्ली से आजसू प्रमुख सुदेश महतो को हराने के लिए राजा पीटर ने जेएमएम उम्मीदवार अमित महतो की हर मुमकिन मदद की। अमित महतो चुनाव जीत गए।

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