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चारा घोटाले में इस अफसर ने की थी लालू से ६ घंटे पूछताछ, अब आएगा फैसला

चारा घोटाले में इस अफसर ने की थी लालू से ६ घंटे पूछताछ, अब आएगा फैसला

Gupteshwar Kumar | Last Modified - Dec 23, 2017, 12:15 PM IST

रांची (झारखंड)।बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव और CBI के प्रभारी डायरेक्टर राकेश अस्थाना का पुराना रिश्ता रहा है। अस्थाना वही अफसर हैं जिनके पास चारा घोटाले की जांच का जिम्मा शुरू से ही रहा है। साल 1995 में जब राकेश धनबाद CBI के एसपी रहे थे, तब चारा घोटाले की जांच के सिलसिले में अस्थाना और उनके साथी अफसर ने पटना में लालू से 6 घंटे पूछताछ की थी। कौन हैं राकेश अस्थाना...

- राकेश अस्थाना 1992-2001 तक धनबाद CBI के एसपी रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने 2001 से 2002 तक रांची में CBI डीआईजी के रूप में काम किया।
- राकेश के पास पटना और कोलकाता CBI के डीआईजी का अतिरिक्त प्रभार रहा। लालू के खिलाफ 1996 में उन्होंने चार्जशीट दायर की।
- बता दें कि राकेश के चार्जशीट दायर करने के बाद साल 1997 में पहली बार लालू यादव अरेस्ट किए गए थे।
- राकेश गुजरात कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। अस्‍थाना आधे दर्जन से भी अधिक मामलों की जांच के लिए बनी एसआईटी के प्रमुख भी हैं।
- फिलहाल विजय माल्‍या और अगस्‍ता वेस्‍टलैंड घोटाले जैसे मामले की जांच भी राकेश के पास ही है।
- बता दें कि राकेश ने नेतरहाट स्कूल (झारखंड) से साल 1971 में मैट्रिक का एग्जाम पास किया। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई रांची और आगरा से की।
- साल 1984 में पहले ही प्रयास में राकेश अस्थाना आईपीएस अफसर बने। बता दें कि राकेश के पिता एचआर अस्थाना नेतरहाट स्कूल में फिजिक्स के टीचर थे।

2008 बम ब्लास्ट की जांच भी थी राकेश के जिम्मे


- राकेश के बारे में खास बात ये कि धनबाद में खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के महानिदेशक को उन्होंने घूस लेते पकड़ा था।
- कहा जाता है कि उस समय तक पूरे देश में अपने तरीके का ये पहला ऐसा मामला था, जब महानिदेशक स्तर के अधिकारी CBI की गिरफ्त में आए थे।
- अहमदाबाद में 26 जुलाई, 2008 को हुए बम ब्लास्ट की जांच का जिम्मा भी राकेश अस्थाना को ही दिया गया था।
- जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद सिर्फ 22 दिनों में ही उन्होंने केस सॉल्व कर दिया था। इसके अलावा आसाराम बापू और उसके बेटे नारायण सांईं के मामले में भी अस्थाना ने जांच की थी।
- गोधरा कांड की जांच का भी जिम्मा इन्हें सौंपा गया था। इन्होंने कुछ ही दिनों में जांच कर सौंप दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने भी सही माना था।
- तभी से अस्थाना पीएम नरेंद्र मोदी की निगाह में आ गए थे। 1996 में वे सीबीआई में एसपी थे, जबकि सीबीआई में डीआईजी रंजीत सिन्हा थे।
- राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट में तब रंजीत सिन्हा का दबदबा था। रंजीत सिन्हा, लालू प्रसाद के करीबी थे, लिहाजा उन्होंने चारा घोटाले मामले में आरोप पत्र में लालू का नाम रखने का कड़ा विरोध भी किया था।

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Web Title: is IPS ne ki thi laalu se 6 Ghante tak puchhtaachh, Charaa ghotaale ka ugaloveaayaa thaa sch
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