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मां की चिता को मुखाग्नि देकर बेटे की कमी बेटियों ने की पूरी

पल्लवी ने मां के अंतिम संस्कार में भी बेटा की कमी पूरी कर संतान होने का फर्ज निभाया।

Santosh Choudhry | Last Modified - Apr 01, 2018, 12:56 PM IST

मां की चिता को मुखाग्नि देकर बेटे की कमी बेटियों ने की पूरी

रांची। टैगोर हिल रोड निवासी 82 वर्षीय गीतिका चक्रवर्ती का निधन शनिवार को हो गई। वह लंबे समय से बीमार थी। घर से शव यात्रा निकल कर हरमू मुक्तिधाम पहुंचा, तब तक सबकुछ सामान्य था। लेकिन जब चिता को मुखाग्नि देने का समय आया तो सब एक दूसरे का मुंह ताकने लगे। क्योंकि गीतिका का कोई पुत्र नहीं है। यह देख बड़ी बेटी पल्लवी मुखोपाध्याय मुखाग्नि देने आगे बढ़ गई। इसके बाद पूरे विधि विधान से दाह-संस्कार की रस्म पूरी की गई। पल्लवी ने मां के अंतिम संस्कार में भी बेटा की कमी पूरी कर संतान होने का फर्ज निभाया। यह देख मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।

बेटी को मुखाग्नि देता देख रो पड़े कई लोग
मां की चिता को बेटी द्वारा मुखाग्नि देता देख उपस्थित लोग रो पड़े। कई लोगों ने यह कहा भी कि वर्षों से चली आ रही परंपरा की वजह से बेटियों का महत्व लोग समझते नहीं। लेकिन आज के समय में किसी भी रूप में बेटी पीछे नहीं है। बेटा से अधिक फर्ज बेटियां निभाती है। पल्लवी ने कहा कि जिस मां ने हमें जन्म दिया, उन्हें अंतिम विदाई देने में कैसी परंपरा। जो काम बेटा कर सकता है, वह बेटी भी कर सकती है।

पहले भी बेटियां दे चुकी है मुखाग्नि
रांची में पहले भी इस तरह की घटना हुई है, जब मां या पिता की मृत्यु पर बेटियों ने चिता को मुखाग्नि दी है। एक दशक पहले इस तरह की घटना को लोग हैरत भरी नजरों से देखते थे, लेकिन अब यह सामान्य हो गया है।

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