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रोड पर महिला पीट रही आदमी को तो क्या करेंगे, १७००० फीट ट्रैकिंग कर बने ढ्ढ्रस् ने ये दिए जवाब

रोड पर महिला पीट रही आदमी को तो क्या करेंगे, १७००० फीट ट्रैकिंग कर बने ढ्ढ्रस् ने ये दिए जवाब

Animesh Nachiketa | Last Modified - May 11, 2017, 11:17 AM IST

बोकारो (झारखंड)। यहां के डिप्टी कमिश्नर राय महिमापत रे 2011 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं। यूपी के रहने वाले रे को यूपीएससी इंटरव्यू में 300 में से 195 मार्क्स मिले थे। लगभग 35 मिनट तक चले इंटरव्यू के दौरान पूछे गए सवालों को उन्होंने dainikbhaskar.com के साथ साझा किया, जिनके जवाब देकर वे आईएएस बने।

- राय महिमापत रे लेक्चरर बनना चाहते थे। दो साल तक जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी भी की, लेकिन यहां उनका दिल नहीं लगा।
- वे सोचते थे कि टीचिंग का पेशा सबसे अलग होता है। एक शिक्षक यंगस्टर्स को नई राह दिखा सकता है। उसके माइंड को एक सोच दे सकता है, लेकिन यहां उन्हें अपनी सोच पूरी होती नहीं दिखी।
- ऐसे में उन्होंने डिसाइड किया कि सरकार में जितने लोगों का भला एक साल में रहकर किया जा सकता है, उतना चाहें तो एक महीने में भी कर सकते हैं। बस यही सोच उन्हें आईएएस तक ले गई।

ट्रैकिंग सबसे यादगार लम्हा
-अपनी ट्रेनिंग को याद कर उन्होंने बताया कि दस दिनों तक चलने वाला हिमालयन ट्रैकिंग उनके लिए सबसे यादगार लम्हा रहा। हिमालय में 17000 फीट तक ऊपर जाना, इस दौरान अपना खाना खुद बनाना और अपना सामान खुद ढोना, रोमांचक था।

रामनवमी दंगा हैंडल करना सबसे टफ रहा
- 2016 की रामनवमी में बोकारो में हुए दंगे को राय अपना सबसे कठिन इम्तिहान बताते हैं। उन्होंने बताया कि इसे संभालना बेहद ही मुश्किल रहा।
- हालांकि पुलिस प्रशासन की तत्परता से इस पर जल्द ही काबू पा लिया गया था। राय इससे पहले लातेहार जिले के डिप्टी कमिश्नर रह चुके हैं। कई अन्य जिलाें में वे एसडीओ और डीडीसी रह चुके हैं।

पिता रिटायर्ड आईपीएस हैं और मां प्रोफेसर
- रे के पिता जहां एक रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर और मां प्रोफेसर हैं। इन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन्स कॉलेज और जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी से पूरी की है।

स्टूडेंट्स को दिए ये TIPS : खुद के लिए कीजिए
- सिविल सेवा मैं आने की चाह रखने वालों के लिए रे ने कहा कि इसकी तैयारी वे अपने लिए करें। मां- पिताजी, भाई-बहन या दोस्तों के लिए नहीं।
- यह बेहद ही मुश्किल एग्जाम है और जबतक आपकी चाह इसके लिए पैदा नहीं होगी, आप इसे क्वालिफाई नहीं कर पाएंगे।
- उन्होंने कहा कि खुद से कभी झूठ नहीं बोले क्योंकि परिणाम को झेलना भी आप ही को है और इसका लाभ भी आप ही को मिलेगा।
आगे की स्लाइड्स पर इंफोग्राफिक्स में पढ़ें इंटरव्यू में पूछे गए उनसे सवाल और जवाब...
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