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कार्यक्रम / कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का शिलान्यास, तीन साल के अंदर शुरू हो जाएगा संचालन



टाटा स्टील रोलिंग मिल के मजदूर तो दूर, अफसर भी शायद ही सोच सकें कि वह कभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा से हाथ मिला सकें। ये लोकतंत्र की खूबसूरती है कि 1978 से 1995 तक इसी मिल में मजदूरी करने वाले रघुवर दास अब मुख्यमंत्री हैं। रांची कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखने के मौके पर रतन टाटा ने न सिर्फ मंच शेयर किया, बल्कि सीएम आवास जाकर पहले रघुवर दास से मिले। फिर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। मंच पर खड़े होते समय रघुवर दास ने हाथ बढ़ाया, जिसे थाम कर रतन टाटा खड़े हुए और स्पीच दिया। टाटा स्टील रोलिंग मिल के मजदूर तो दूर, अफसर भी शायद ही सोच सकें कि वह कभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा से हाथ मिला सकें। ये लोकतंत्र की खूबसूरती है कि 1978 से 1995 तक इसी मिल में मजदूरी करने वाले रघुवर दास अब मुख्यमंत्री हैं। रांची कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखने के मौके पर रतन टाटा ने न सिर्फ मंच शेयर किया, बल्कि सीएम आवास जाकर पहले रघुवर दास से मिले। फिर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। मंच पर खड़े होते समय रघुवर दास ने हाथ बढ़ाया, जिसे थाम कर रतन टाटा खड़े हुए और स्पीच दिया।
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टाटा स्टील रोलिंग मिल के मजदूर तो दूर, अफसर भी शायद ही सोच सकें कि वह कभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा से हाथ मिला सकें। ये लोकतंत्र की खूबसूरती है कि 1978 से 1995 तक इसी मिल में मजदूरी करने वाले रघुवर दास अब मुख्यमंत्री हैं। रांची कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखने के मौके पर रतन टाटा ने न सिर्फ मंच शेयर किया, बल्कि सीएम आवास जाकर पहले रघुवर दास से मिले। फिर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। मंच पर खड़े होते समय रघुवर दास ने हाथ बढ़ाया, जिसे थाम कर रतन टाटा खड़े हुए और स्पीच दिया।टाटा स्टील रोलिंग मिल के मजदूर तो दूर, अफसर भी शायद ही सोच सकें कि वह कभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा से हाथ मिला सकें। ये लोकतंत्र की खूबसूरती है कि 1978 से 1995 तक इसी मिल में मजदूरी करने वाले रघुवर दास अब मुख्यमंत्री हैं। रांची कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखने के मौके पर रतन टाटा ने न सिर्फ मंच शेयर किया, बल्कि सीएम आवास जाकर पहले रघुवर दास से मिले। फिर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। मंच पर खड़े होते समय रघुवर दास ने हाथ बढ़ाया, जिसे थाम कर रतन टाटा खड़े हुए और स्पीच दिया।

  • टाटा कैंसर हॉस्पिटल कोलकाता की तर्ज पर रांची में बनेगा कैंसर हॉस्पिटल, तीन साल के अंदर शुरू होगा मरीजों का इलाज
  • रिनपास में 23.50 एकड़ जमीन पर रखी गई कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की आधारशिला, 50 बेड से शुरू होगा हॉस्पिटल
  • 200 बेड तक होगा एक्सटेंशन, कोलकाता व भुवनेश्वर कैंसर हॉस्पिटल से मिलेगा हैंड होल्ड सपोर्ट

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 10:54 AM IST

रांची. राजधानी के कांके स्थित रिनपास में 23.50 एकड़ जमीन पर बनने वाले कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का शनिवार को शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री रघुवर दास और टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने इसकी आधारशिला रखी। अगले तीन साल के अंदर हॉस्पिटल का संचालन शुरू हो जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विश्वास जताया कि विश्वस्तरीय सुविधाओं और अत्याधुनिक तकनीक से लैस ये अस्पताल झारखण्ड के कैंसर पीड़ितों के लिए वरदान साबित होगा। इससे पहले रतन टाटा और रघुवर दास के बीच शिष्टाचार मुलाकात हुई। 

मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही स्वास्थ्य सेवाओं हेतु कार्य शुरू किया: रघुवर दास

  1. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री, रतन टाटा, रामचंद्र चंद्रवंशी व अन्य।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा ट्रस्ट ने मोमेंटम झारखण्ड के दौरान कैंसर अस्पताल स्थापित करने की मांग को पूरा किया। उन्होंने कहा कि अन्य राज्य जाने पर लोगों को होने वाली परेशानियों से अवगत था। यही वजह रही कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही मैंने स्वास्थ्य सुविधाओं हेतु कार्य शुरू किया और 4 साल में 6 मेडिकल कॉलेज, एम्स निर्माण कार्य प्रारंभ करवाया। आज कैंसर अस्पताल निर्माण कार्य का शुभारंभ कर दबी हुई कसक भी समाप्त हो गई।

  2. 80 फीसदी लाभांश जनकल्याण में होता है खर्च

    संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास।

    रघुवर दास ने कहा कि टाटा समूह द्वारा अपने लाभांश का 80 फीसदी राशि जनहित के कल्याण में खर्च किया जाता है। यह परंपरा 100 वर्ष पुरानी है। क्योंकि जमशेदजी टाटा ने संदेश दिया था कि जो भी धन हम अर्जित कर रहें है, वह समाज से प्राप्त किया हुआ है। इस लाभांश का हिस्सा समाज के उत्थान में लगाना चाहिए। उस परंपरा का निर्वहन आज भी हो रहा है। अन्य औद्योगिक घरानों को भी प्रेरणा लेना चाहिए। दास ने बताया कि स्वाधीनता से बहुत पहले ही भारत में स्टील उत्पादन करने हेतु कंपनी ने कार्य प्रारंभ किया। आजाद भारत के बाद जमशेदजी ने राष्ट्र और राज्य की समृद्धि हेतु प्रयास प्रारम्भ कर दिए। हर क्षेत्र में समूह द्वारा काम हो रहा है।

  3. टाटा ट्रस्ट ग्रामीण विकास में भी सहायक बनें

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री, रतन टाटा, रामचंद्र चंद्रवंशी व अन्य।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह मेरे अनुरोध को टाटा समूह ने कैंसर अस्पताल का शिलान्यास कर पूरा किया। उस तरह झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में सहायक बनें। राज्य के 1 हजार पंचायत के गांव को विकसित करने, कोल्हान क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट का अधिष्ठान करने में मदद करे। राज्य सरकार खर्च होने वाली राशि का 50 फीसदी ट्रस्ट को देगी। सरकार, जनता और कारपोरेट शक्ति मिलकर राज्य की गरीबी समाप्त करने की सार्थक पहल करे।

  4. चिकित्सक ईमानदारी से कार्य करें, आपको भगवान ने चिकित्सक बनाया

    उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री, रतन टाटा, रामचंद्र चंद्रवंशी व अन्य।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जल सहिया बहनों के अथक प्रयास से राज्य में शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। राज्य के चिकित्सक भी ईमानदारी से कार्य करें। आपको भगवान ने चिकित्सक बनाया है। आप सदर अस्पताल और रिम्स नहीं जाना चाहते और मरीज आपकी बाट जोहते हैं। आप समाज के लिए कुछ करें। जीवन एक बार प्राप्त होता है इसका अंश परोपकार में भी लगाएं। सदर अस्पताल और रिम्स नहीं जाना यह ठीक नहीं है। 

  5. कैंसर अस्पताल लोगों के लिए संजीवनी साबित होगा: रतन एन टाटा

    संबोधन के दौरान रतन टाटा।

    इस अवसर पर पद्म विभूषण रतन एन टाटा ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री का प्रयास रंग लाया। मुख्यमंत्री ने मोमेंटम झारखण्ड के दौरान कैंसर अस्पताल प्रारंभ करने की बात कही थी। डेढ़ साल बाद दूरदर्शी मुख्यमंत्री का प्रयास सफल हुआ। यह अस्पताल नार्थ ईस्ट के लोगों के लिए संजीवनी साबित होगा। रांची आकर इस कार्य को सम्पन कर मैं खुश हूं। हर वर्ष लाखों लोग इस बीमारी से मर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि आने वाले वर्षों में कैंसर से मरने वाले लोगों की संख्या में कमी की जाए। इस निमित कार्य और अनुसंधान हो रहें हैं।

  6. कैंसर हॉस्पिटल कोलकाता की तर्ज पर इलाज की सुविधा

    शिलान्यास का शिलापट।

    इस हॉस्पिटल का संचालन राज्य सरकार और रतन टाटा के ट्रस्ट के सहयोग से होगा। पहले 50 बेड से इसकी शुरूआत होगी अगले कुछ वर्षों में 200 बेड तक एक्सटेंशन होगा। टाटा कैंसर हॉस्पिटल कोलकाता और भुवनेश्वर के एक्सपर्ट के  मार्गदर्शन में रांची के कैंसर हॉस्पिटल का संचालन होगा। टाटा ट्रस्ट के कैंसर हॉस्पिटल के एक्सपर्टाइज का हैंड होल्ड सपोर्ट भी रांची में बनने वाले हॉस्पिटल को मिलेगा। यह पहला कैंसर केयर सेंटर होगा जहां मरीजों के अटेंडेंट के लिए हॉस्टल की भी सुविधा होगी। डाक्टर और स्टॉफ के लिए आवासीय परिसर भी होगा। यहां नेचुरोपैथी से हीलिंग के लिए एक पार्क का निर्माण भी होगा, जहां कैंसर मरीज खुली हवा में घूम सकेंगे।

  7. सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी स्थापित होगा कैंसर केयर सेंटर

    शिलान्यास के दौरान रतन टाटा और मुख्यमंत्री।

    राज्य सरकार और टाटा ट्रस्ट मिलकर एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) बनाएगी। एसपीवी के लिए भी शनिवार को एमओयू होगा। इसी एसपीवी के माध्यम से रिनपास में बनने वाले स्टेट ऑफ द आर्ट कैंसर केयर सेंटर का संचालन होगा। इसके अलावा राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज में कैंसर केयर सेंटर और 6 कंप्रेहेसिव कैंसर केयर सेंटर एवं जिला अस्पतालों के पास सात डायग्नोस्टिक एंड डे केयर क्लिनिक की भी स्थापना होगी। कैंसर हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में कैंसर केयर सेंटर व कंप्रहेंसिव कैंसर केयर सेंटर की स्थापना दो फेज में होगी।

  8. रिम्स में आंकोलॉजी सेंटर बना पर इलाज की नहीं मिलती सुविधा

    आधारशिला रखने के दौरान मुख्यमंत्री व रतन टाटा। साथ में स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी।

    राज्य के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स में चार वर्ष पहले ही आंकोलॉजी सेंटर की स्थापना की गई। लेकिन इतने वर्षों के बाद भी यहां कैंसर का इलाज नहीं हो रहा है। क्योंकि न तो डॉक्टर हैं न बेहतरीन सुविधा। यहां प्रत्येक वर्ष करीब 5 हजार कैंसर मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन सुविधा के अभाव में उनकी जान चली जाती है या दूसरे राज्यों में जाकर इलाज कराना पड़ता है।

  9. कैंसर का इलाज कराने पर हर वर्ष 30 करोड़ खर्च करती है सरकार

    शिष्टाचार मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री व रतन टाटा।

    झारखंड के वैसे कैंसर मरीज जो गरीबी रेखा से नीचे हैं उनका इलाज कराने पर राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष करीब 30 करोड़ रुपए खर्च करती है। दिल्ली, मुंबई और तमिलनाडु में स्थित बड़े हॉस्पिटलों को यहां के मरीजों का इलाज करने के लिए पैसा भेजा जाता है। रांची में सुपर स्पेशियलिटी कैंसर केयर सेंटर खुलने के बाद सरकार का सालाना करोड़ों रुपए बचेगा। कैंसर के मरीज और उनके परिजनों की दूसरे राज्यों में जाने की परेशानी भी दूर होगी।

  10. ओरल, ब्रेस्ट और ब्लड कैंसर के मरीज सबसे अधिक

    इरबा स्थित क्योर अब्दुल रज्जाक अंसारी कैंसर इंस्टीच्युट के संचालक सईद अंसारी के अनुसार झारखंड में ओरल, ब्रेस्ट और ब्लड कैंसर के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। झारखंड में अभी भी करीब 70 हजार कैंसर पेशेंट हैं।

  11. 3 हजार से अधिक मरीजों की प्रत्येक वर्ष होती है मौत

    झारखंड में प्रत्येक वर्ष करीब 13 हजार कैंसर मरीजों की मौत हो रही है। इसमें प्रत्येक वर्ष छह प्रतिशत की दर से इजाफा भी हो रहा है। 

    • कैंसर मरीजों की ऐसे हो रही मौत 
    वर्ष  कैंसर से मौत 
     2011 12380
    2012 12790
    2013 13211
    2014 13645


      नोट: राज्य सरकार के पास कैंसर मरीजों की मौत का आंकड़ा नहीं होता है। क्योंकि सरकार के पास मरीजों के रजिस्ट्रेशन की सुविधा नहीं है। 

  12. इनका है कहना

    स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सुधीर रंजन ने बताया कि रांची के रिनपास में फिलहाल 50 बेड का  सुपर स्पेशियलिटी कैंसर केयर यूनिट बनेगी बाद में इसका एक्सटेंशन होगा। इसकी क्षमता 200 बेड तक होगा।  टाटा ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे कैंसर हॉस्पिटल की तर्ज पर रांची का कैंसर हॉस्पिटल विकसित होगा। दूसरे हॉस्पिटल के एक्सपर्टाइज का सहयोग भी मिलेगा। हॉस्पिटल में आंकोलॉजी डिपार्टमेंट के साथ रेडियोथैरेपी, कीमोथैरेपी सहित अन्य सुविधाएं भी रहेगी। 

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