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सुनवाई / बाबूलाल मरांडी ने कभी नहीं कहा कि झाविमो का भाजपा में विलय नहीं हुआ

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 08:23 PM IST


case of party change arguments in assembly tribunal
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  • स्पीकर के न्यायाधिकरण में दल बदल मामले में सुनवाई

रांची.  झाविमो के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा में आए छह विधायकों के विरुद्ध शुक्रवार को स्पीकर के न्यायाधिकरण में सुनवाई हुई। आरोपी विधायकों की ओर से सभी की गवाही पूरी कर ली गई। शुक्रवार को जानकी यादव की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि झाविमो की ओर से बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव ने दल बदल मामले में शिकायत की थी। उनके द्वारा स्पीकर को दिए गए आवेदन में स्पीकर से अनुरोध किया गया था कि वे छह विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त करें। सभी छह विधायक पार्टी विरोधी कार्यों में लिप्त हैं। 

छह विधायकों ने स्पीकर को दिए आवेदन में विलय की कही थी बात

  1. अनिल कुमार ने कहा कि बाबूलाल मरांडी या प्रदीप यादव ने कभी यह नहीं कहा कि झाविमो का भाजपा में विलय नहीं हुआ है। उन्होंने न तो अपने पहले आवेदन में इसका जिक्र किया और न ही बाद में गवाही या बहस के दौरान। जबकि छह विधायकों ने स्पीकर को दिए आवेदन में झाविमो के विलय की बात कही थी।

  2. 10 फरवरी 2015 को आवेदन देकर की कार्रवाई की मांग

    अनिल कुमार ने कहा कि बाबूलाल मरांडी या प्रदीप यादव ने विधायकों पर पार्टी विरोध कार्यों में लिप्त होने का आरोप तो लगाया लेकिन संबंधित विधायक किस तरह का पार्टी विरोधी काम कर रहे थे। इसका कोई जिक्र उनके द्वारा किसी भी स्तर पर नहीं किया गया। 8 फरवरी 2015 को जब पार्टी के दो तिहाई विधायकों ने पार्टी के विलय का फैसला ले लिया तब स्पीकर को इसकी जानकारी दे दी गई। तब नौ फरवरी 2015 को बाबूलाल मरांडी ने सभी विधायकों एवं पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई। जब उस बैठक में छह विधायक नहीं पहुंचे तब उन्होंने दस फरवरी को स्पीकर के यहां आवेदन देकर कार्रवाई की मांग कर दी। 

  3. आवेदन में बताया- बैठक में नहीं आए छह विधायक

    आवेदन में उन्होंने बताया कि बैठक में छह विधायक नहीं आए। उन विधायकों को हर तरह से सूचना भिजवाने का प्रयास किया गया। लेकिन सूचना के बावजूद वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि झाविमो सुप्रीमो द्वारा विधायकों को दस फरवरी को ही शो कॉज जारी किया गया।  जिसमें 24 घंटे का समय दिया गया था। लेकिन समय पूरा होने के पहले ही स्पीकर को कार्रवाई के लिए आवेदन दिया गया।

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