झारखंड / लॉ की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले में आरोप तय, एक माह में सुनवाई हो सकती है पूरी

Charge set in case of gang rape of a law student in ranchi Hearing can be completed in a month
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Charge set in case of gang rape of a law student in ranchi Hearing can be completed in a month

  • हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने प्रधान न्यायाधीश को फोन कर मामले में स्पीडी ट्रायल करने का दिया है मौखिक निर्देश
  • सामूहिक दुष्कर्म करने के जुर्म में आरोप तय होने पर सभी आरोपियों ने कहा- हमें फंसाया गया है, निर्दोष हैं, इसलिए सुनवाई हो

दैनिक भास्कर

Jan 07, 2020, 11:04 AM IST

रांची. कांके के संग्रामपुर से सटे बनहरा गांव के सुनसान जगह पर ले जाकर लॉ की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के जुर्म में 12 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने आरोप तय कर दिया है। सभी आरोपियों ने जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में इन लोगों को फंसाया गया है। सभी निर्दोष हैं। सभी आरोपियों ने मामले में सुनवाई की मांग की है। कोर्ट ने मामले के लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी 30 गवाहों का बयान अतिशीघ्र कोर्ट में दर्ज कराएं। सुनवाई प्रधान न्याय आयुक्त नवनीत कुमार की अदालत में चल रही है। गवाहों का बयान दर्ज करने के लिए इस मामले में कोर्ट ने 7 जनवरी 2020 की तिथि निर्धारित की है। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने प्रधान न्याय आयुक्त को फोन कर स्पीडी ट्रायल का निर्देश दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि एक माह में मामले में सुनवाई हो सकती है।
  
बीटेक छात्रा हत्याकांड की एक माह में सुनवाई 

सोमवार को सुनवाई से पूर्व झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि रंजन ने प्रधान न्यायाधीश नवनीत कुमार को फोन कर मामले में स्पीडी ट्रायल करने का मौखिक निर्देश दिया है। प्राप्त निर्देश का अनुपालन करते हुए प्रधान न्याय आयुक्त ने इस मामले में डे टू डे सुनवाई करने का निर्देश जारी कर दिया है। उन्होंने मामले से जुड़े लोक अभियोजक को भी एक भी तिथि बिना गवाए मामले से जुड़े सभी गवाहों का बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस के निर्देश के बाद मामले की सुनवाई एक माह में हो सकती है, क्याेंकि हाल ही में बीटेक छात्रा दुष्कर्म हत्याकांड मामले में जज ने मात्र 16 कार्य दिवस में 30 लोगों का बयान दर्ज कर एक माह के भीतर सुनवाई पूरी कर सजा सुना दी। आरोपी को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई है। चूंकि, इस मामले में त्वरित निष्पादन का निर्देश है, एेसे में माना जा रहा है कि पूरे मामले की सुनवाई एक माह में हो सकती है। 

आराेपियों के खिलाफ 3 तरह के साक्ष्य 
आरोप गठन की बिंदू पर सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने कोर्ट को बताया कि मामले से जुड़ी केस डायरी में जांच पदाधिकारी ने आरोपियों के खिलाफ मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य के साथ-साथ वैज्ञानिक साक्ष्य भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि अभिलेख पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला का प्रतिवेदन और मोबाइल फोन का सीडीआर उपलब्ध है। इसके अलावा अभिलेख पर पीड़िता और आरोपियों के ब्लड सैंपल से प्राप्त डीएनए रिपोर्ट है। 

घटना निर्भया कांड से मिलती-जुलती 
उन्होंने बहस के दौरान कोर्ट को बताया कि आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट से सामूहिक दुष्कर्म की घटना की पुष्टि होती है। उन्होंने उपलब्ध साक्ष्यों का जिक्र करते हुए कोर्ट को यह भी बताया कि सामूहिक दुष्कर्म का घटनाक्रम दिल्ली में हुए निर्भया कांड के घटनाक्रम से बिल्कुल मिलती-जुलती है। दोनों घटनाक्रम में अंतर सिर्फ इतना है की वर्तमान मामले में पीड़िता की जान सुरक्षित है और दिल्ली मामले में पीड़िता को निर्दयता पूर्वक हत्या कर दी गई थी।
 
चार्जशीट में जांच पदाधिकारी ने साक्ष्य के रूप में अंकित किए हैं कुल 28 गवाह 
सोमवार को सुनवाई के दौरान सभी 12 आरोपियों की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। मामले के आठ आरोपियों ने निजी खर्च पर ईश्वर दयाल को अधिवक्ता के रूप में रखा है। जबकि, चार आरोपियों ने सरकारी खर्च पर विनोद कुमार सिंह को अपना अधिवक्ता रखा है। सभी 12 आरोपी 28 नवंबर 2019 से जेल में है। आईओ ने जांच की कार्रवाई पूरी कर मात्र 24 दिनों के भीतर 20 दिसंबर 2019 को सबूत के साथ चार्जशीट दाखिल कर दी। चार्जशीट में आईओ ने कुल 28 गवाहों के नाम अंकित किए हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। 

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