दीपावली / रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमग हुआ शहर, अमृत याेग में मनाई गई दिवाली

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • दीपावली वृष और सिंह लग्न में माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की हाेती है प्राप्ति

दैनिक भास्कर

Oct 27, 2019, 08:42 PM IST

रांची.  कार्तिक कृष्ण अमावस्या रविवार 27 अक्टूबर को अमृतयाेग में दीपाेत्सव यानी दीपावली मनाई गई। शुक्रवार की रात से ही रंग-बिरंगी लाइटिंग से राजधानी जगमग हाे गई। दीपावली शब्द का अर्थ है-दीपा नाम आवली, अर्थात दीपाें का समूह। माता लक्ष्मी के निमित सूर्यास्त के बाद प्रदाेष काल में दीपाें का समूह, रंगाेली आदि बनाकर अपने-अपने घराें काे सुशाेभित करने के बाद लाेगों ने माता लक्ष्मी के आगमन के लिए भगवान गणेश, सरस्वती और कुबेर के साथ भगवती लक्ष्मी का विशेष पूजन-आह्वान किया। इसे शास्त्राें में सुख की रात्रि भी कहा गया है। प्रदाेष काल शाम 5:45 बजे से 7:45 बजे तक रहा। वहीं, खरीदारी भी जोरों पर रही। सुबह से ही बाजार में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा के साथ ही पूजा सामाग्री की खरीदारी में लोग जुटे दिखे।

 

हरमू रोड मंदिर के पुरोहित रंजीत पांडेय के अनुसार दीपावली में खासकर वृष और सिंह लग्न में माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष फल रहा। शाम सात बजे से लेकर 8:40 बजे तक वृष लग्न रहा और रात 1:15 बजे से 3:30 बजे तक सिंह लग्न रहेगा। ये दाेनाें मुहुर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। कोकर शिव मंदिर के आचार्य सच्चिदानंद के अनुसार माता लक्ष्मी चंचला हाेती हैं। इसलिए इनकी पूजा स्थिर लग्न (वृश्चिक, कुंभ, वृष व सिंह लगन) में करनी चाहिए।

 

रंजीत पांडेय ने बताया कि प्रदाेष काल में पूजन व दीया जलाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न हाेती हैं। मान्यता है कि दीपावली के प्रदाेष काल में जितने जलाए हुए दीपक की संख्या हाेती है, उतने हजार वर्ष दीये जलाने वाले काे स्वर्गलाेक में वास मिलता है। बताया कि इस वर्ष दीपावली में अमृत याेग दाेपहर 12:23 बजे से अगले दिन सुबह 5:55 बजे तक है। इस याेग में माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख, समृद्धि, धन-संपदा एवं ऐश्वर्य में वृद्धि हाेगी व माता की असीम कृपा बरसेगी।

 

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