मंथन / विस चुनाव में कांग्रेस पुराने चेहरों पर ही करेगी भराेसा, सभी विधायकों को टिकट



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • 19 को झामुमो की रैली के बाद हाेगी गठबंधन सीटाें की शेयरिंग पर वार्ता

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 05:33 AM IST

रांची. विधानसभा चुनाव काे लेकर काफी तेज गति से भाग रही भाजपा का पीछा करने में विपक्ष अब भी पस्त है। हालांकि विपक्ष अपनी रणनीति पर लगातार काम कर रहा है। सबसे अहम मुद्दा गठबंधन काे लेकर है। इसके लिए विपक्षी दलाें के बीच बात ताे हाे रही है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय 19 अक्टूबर के बाद ही संभव है। इस वजह से गठबंधन में शामिल हाेने वाले दाे प्रमुख दल झामुमाे अाैर कांग्रेस सीट शेयरिंग के बाद अपने संभावित सीटाें के लिए अभी से उम्मीदवाराें के नाम पर अंदर ही अंदर विचार कर रही है।

 

नौ सिटिंग विधायकों के अलावा 10 ऐसी सीटें हैं, जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी। ऐसे में कांग्रेस में धीरे-धीरे यह तस्वीर साफ हाेती जा रही है कि वह अासन्न विधानसभा चुनाव में पुराने चेहरों पर ही भराेसा जताएगी। नए लाेगाें पर कांग्रेस काे विश्वास अपेक्षाकृत कम है। सभी नौ विधायकों को टिकट दिया जाएगा।


इधर, झामुमाे 19 अक्टूबर काे राजधानी रांची में हने वाली अपनी रैली की तैयारी में जुटा हुअा है। इसमें राज्य के सभी क्षेत्राें से पार्टी के लाेगाें काे अाना है। झामुमाे के वैसे नेता जाे विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार हैं, अगर उन्हें यह पता चल जाता है कि उनकी सीट सहयाेगी पार्टी के शेयर में चली गई, ताे इसका प्रभाव सीधे-सीधे 19 की रैली पर पड़ेगा। यही वजह है कि झामुमाे नेतृत्व रैली के पूर्व किसी भी तरह सीट शेयरिंग के मामले काे निबटाने काे इच्छु़क नहीं है।


19 सीटें ऐसी, जहां पुराने चेहरे पर दांव लगाना मजबूरी
वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के नाै विधायक हैं, जबकि दस एेसे स्थान हैं जहां पर कांग्रेस पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थी। इस तरह दाेनाें मिलाकर 19 सीटें एेसी हैं, जहां पुराने चेहरे पर दांव लगाना कांग्रेस की मजबूरी है। अब तक जाे परिस्थितियां हैं, उसके अनुसार कांग्रेस राज्य में करीब 30 सीटाें पर चुनाव लड़ेगी। एेसे में बाकी बचे 11 सीटाें पर कांग्रेस काे उम्मीदवारों का चयन करना है। इनमें से प्रदेश कांग्रेस के तीन कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी, मानस सिन्हा अाैर संजय पासवान, एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू अाैर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव भी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।

 

इस तरह 11 सीटाें में से पांच पर पुराने चेहरे काे ही तरजीह दी जा सकती है। हालांकि एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत अाैर एक कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी वर्तमान में विधायक भी हैं, इसलिए उन्हें टिकट मिलना तय है। इसके बाद शेष बची छह सीटाें पर कांग्रेस काे उम्मीदवार देना हाेगा। हालांकि कांग्रेस की एक विधायक गीता काेड़ा सांसद बन चुकी हैं, इसलिए उनकी जगह किसी महिला काे उम्मीदवार बनाया जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि नए लाेगाें पर भराेसा करने से वह पार्टी छाेड़कर चले जाते हैं। एेसे में पार्टी काे काफी नुकसान हाेता है। इस वजह से इस बार चुनाव में नए चेहराें पर पार्टी विश्वास नहीं कर पा रही है। एेसी स्थिति में नए चेहराें काे चुनावी टिकट दिया जाना पार्टी के लिए संभव नहीं जान पड़ता है।
शेष सीटों में झामुमो अन्य दलों से शेयर करे
कांग्रेस ने झामुमाे के सामने 30 सीटाें पर अपना दावा कर दिया है। पिछले दिनाें झारखंड अाए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अारपीएन सिंह ने हेमंत साेरेन से बातचीत में यह दावा किया था। इसके अलावा उन्हाेंने झामुमाे काे यह भी कहा है इसके बाद जाे सीटें बचती हैं, उसमें झामुमाे अपनी सीटें रखकर राजद अाैर वामदलाें काे भी शेयर दे। हालांकि काफी हद तक यह स्थिति स्पष्ट हाे चुकी है कि झाविमाे विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल नहीं हाेगा। चुनाव परिणाम के बाद यदि अावश्यक हुअा ताे वह महागठबंधन सरकार काे समर्थन दे सकता हैं।
महिला व युवा चेहरों काे भी माैका : अालम
कांग्रेस विधायक दल के नेता अाैर स्क्रीनिंग कमेटी के मेंबर अालमगीर अालम ने कहा कि कांग्रेस की यह परंपरा रही है कि विधायकों का टिकट नहीं काटा जाता है। जहां तक दूसरे स्थान पर रहे नेताअाें की बात है, ताे इसमें कुछ सीटाें पर बदलाव किए जा सकते हैं। युवा अाैर महिलाअाें काे टिकट मिल सकता है। लेकिन जाे भी निर्णय हाेगा, वह कांग्रेस अालाकमान ही लेगा।

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