झारखंड / बाबूलाल मरांडी को प्रतिपक्ष का नेता स्वीकार करना संवैधानिक संस्था का अपमान होगा: कांग्रेस

आलोक दुबे। (फाइल फोटो) आलोक दुबे। (फाइल फोटो)
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आलोक दुबे। (फाइल फोटो)आलोक दुबे। (फाइल फोटो)

  • स्पीकर से किया अनुराेध, प्रतिपक्ष के नेता के रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए बाबूलाल मरांडी काे

दैनिक भास्कर

Feb 26, 2020, 06:55 PM IST

रांची.  प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक कुमार दुबे ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को प्रतिपक्ष का नेता स्वीकार करना पूरी संवैधानिक संस्था का अपमान होगा। बाबूलाल मरांडी को किसी भी कीमत पर प्रतिपक्ष का नेता स्वीकार नहीं किया जा सकता है और ना ही किसी भी सूरते हाल में किया जाना चाहिए। वे प्रतिपक्ष का नेता बनने की अर्हता पूरी नहीं करते हैं। बाबूलाल मरांडी से ज्यादा दसवीं अनुसूचि का भुक्तभोगी कौन हो सकता है। दुबे ने मंगलवार को बयान जारी कर उक्त बातें कही।

दूबे ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को नसीहत दी कि विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक तथ्यों की ठाेस जानकारी होनी चाहिए क्योंकि दसवीं अनूसूचि में यह स्पस्ट उल्लेख किया गया है कि सदन में दो तिहाई विधायकों के मर्जर को ही विलय मानाजा सकता है। संविधान विशेषज्ञ जीसी मल्होत्रा ने कहा कि दलों के सदस्यों का विलय महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि दो तिहाई विधायक एक साथ किधर विलय करेंगे वहीं विभाजन ही मूल माना जायेगा। पार्टी की कमिटी के विलय के फैसले से विधानसभा को कोई मतलब नहीं है।


थोड़ी भी नैतिकता है तो दोबारा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ जनादेश प्राप्त करें बाबूलाल: कमिटी

प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने कहा है कि बाबूलाल को प्रतिपक्ष का नेता स्वीकार करना राज्य की जनता के जनादेश का अनादर होगा। भाजपा के कृत्यों की वजह में बार-बार पूरे देश में झारखंड की बदनामी होती है। भाजपा और बाबूलाल में अगर थोड़ी भी नैतिकता है तो उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर दोबारा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जनादेश प्राप्त करना चाहिए क्योंकि बाबूलाल मरांडी को क्षेत्र की जनता ने भाजपा के खिलाफ चुनाव जीताकर सदन भेजा था। दुबे ने विधानसभा अध्यक्ष से गुजारिश किया है कि किसी भी कीमत पर बाबूलाल को प्रतिपक्ष के नेता के रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।

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