झारखंड / 1932 का खतियान लागू हुआ ताे रांची-धनबाद के 75 फीसदी लाेग हाे जाएंगे बाहरी, जमशेदपुर शहर टाटा का हाेगा

शिबू साेरेन ने तत्कालीन रघुवर सरकार द्वारा 1985 की डेट से स्थानीय नीति परिभाषित करना गलत ठहराया। (फाइल फोटो) शिबू साेरेन ने तत्कालीन रघुवर सरकार द्वारा 1985 की डेट से स्थानीय नीति परिभाषित करना गलत ठहराया। (फाइल फोटो)
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शिबू साेरेन ने तत्कालीन रघुवर सरकार द्वारा 1985 की डेट से स्थानीय नीति परिभाषित करना गलत ठहराया। (फाइल फोटो)शिबू साेरेन ने तत्कालीन रघुवर सरकार द्वारा 1985 की डेट से स्थानीय नीति परिभाषित करना गलत ठहराया। (फाइल फोटो)

  • झामुमाे सुप्रीमाे शिबू साेरेन ने अपने बयान में स्थानीय नीति में संशोधन की बात कही है
  • उन्होंने बरवाअड्डा में कहा- 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाई जाएगी

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2020, 08:04 AM IST

रांची. झारखंड में 1932 के खतियान काे स्थानीय हाेने का आधार बनाए जाने के झामुमाे सुप्रीमाे शिबू साेरेन के बयान के बाद एक नया विवाद खड़ा हाे गया है। अगर ऐसा हुआ ताे रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बाेकाराे जैसे बड़े शहराें में रहने वाले 75 फीसदी लाेग स्थानीय हाेने की शर्त पूरी नहीं कर पाएंगे और वे बाहरी हाे जाएंगे। इन शहराें में लाेग राेजी-राेजगार के लिए आए और बसते चले गए, उस समय धनबाद का ताे अस्तित्व ही नहीं था। मंगलवार काे बरवाअड्डा में गुरुजी ने कहा था कि झारखंड सरकार माैजूदा स्थानीय नीति में संशाेधन करेगी। 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाई जाएगी।

1971 में काेयले के राष्ट्रीयकरण के पहले यहां खदानाें का निजी मालिक हुआ करते थे। उन्हाेंने ही यूपी और बिहार से खदानाें में काम करने के लिए लाेगाें काे बुलाया, जाे यहां बसते चले गए। फिर 1952 में सिंदरी उर्वरक कारखाना शुरू हाेने के बाद यहां काम करने के लिए बाहरी लाेग आए और यहीं बस गए। शहरी क्षेत्राें में ऐसे लाेगाें की संख्या अधिक है।

जमशेदपुर में ताे पूरा शहर ही टाटा स्टील का हाे जाएगा, क्याेंकि 1932 में जमशेदपुर शहर की करीब 24 हजार बीघा जमीन का रैयतदार टाटा स्टील था। बिहार सरकार ने 1956 में बिहार भूमि सुधार अधिनियम लागू किया ताे जमींदारी प्रथा खत्म हाे गई। टाटा स्टील की जमीन का मालिक बिहार सरकार हाे गई और टाटा काे यह जमीन लीज पर दी गई। अगर 1932 का खतियान लागू हुआ ताे शहर की पूरी जमीन का स्वामित्व टाटा स्टील का हाे जाएगा। बस संथाल परगना में 1932 के खतियान काे आधार नहीं बनाया जा सकेगा, क्याेंकि वहां अंतिम सर्वे 1908 में हुआ था। जबकि राज्य के 80 फीसदी क्षेत्राें में 1932 में केडेस्ट्रल सर्वे हुआ था।


मायने क्या : 1932 के खतियान में जिसका नाम, उसके वंशज ही स्थानीय

1932 के खतियान काे आधार बनाने का मतलब यह है कि उस समय जिन लाेगाें का नाम खतियान में था, वे और उनके वंशज ही स्थानीय कहलाएंगे। उस समय जिनके पास जमीन थी, उसकी हजाराें बार खरीद-बिक्री हाे चुकी है। उदाहरण के ताैर पर 1932 में अगर रांची जिले में 10 हजार रैयताें थे ताे आज उनकी संख्या एक लाख पार कर गई। अब ताे सरकार के पास भी यह आंकड़ा नहीं है कि 1932 में जाे जमीन थी, उसके कितने टुकड़े हाे चुके हैं।


असर क्या : सरकारी सुविधाओं से वंचित हाे जाएंगे
जाे लाेग वर्षाें से झारखंड में रह रहे हैं, लेकिन खतियान में नाम नहीं है, वे कई तरह की सरकारी सुविधाओं से वंचित हाे जाएंगे। मसलन स्थानीय के लिए आरक्षित नाैकरी या शैक्षणिक पाठ्यक्रमाें में नाैकरी के लिए आवेदन नहीं दे पाएंगे। स्थानीय के लिए शुरू हाेने वाली याेजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। अगर सरकार स्थानीयता की परिभाषा तय करते समय खतियान के अलावा दूसरी शर्तें जाेड़ती हैं ताे वे शर्ते पूरी करने वाले स्थानीय हाे सकते हैं। मसलन झारखंड में पढ़ने वाले, यहां नाैकरी करने वाले या अन्य।


2014 में परिभाषित हुई थी स्थानीयता

  • स्थानीयता काे लेकर विवाद 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के समय शुरू हुआ, जब उन्हाेंने 1932 के खतियान काे अाधार बनाने की काेशिश की।
  • अर्जुन मुंडा के मुख्यमंत्रित्व काल में सुदेश महताे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनी, लेकिन इसकी रिपाेर्ट पर कुछ नहीं हाे पाया।
  • 2014 में मुख्यमंत्री रघुवर दस ने पहली बार स्थानीय नीति काे परिभाषित किया। इसमें 1985 से झारखंड में रहने वालाें काे स्थानीय माना, अगर वे जमीन खरीदकर यहां बस गए हाें या उनके बच्चाें ने पहली से मैट्रिक तक की पढ़ाई झारखंड में की हाे। या फिर राज्य के केंद्र सरकार के कर्मचारी हाें।

सीएम बाेले- गुरुजी ने किस संदर्भ में कहा, समझने के बाद बाेलेंगे
मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने कहा कि गुरुजी राज्य के सम्मानीय नेता हैं। गार्जियन भी हैं। उन्हाेंने क्या कहा है, किस संदर्भ में कहा है, यह समझने के बाद ही कुछ कहेंगे।


कांग्रेस ने कहा-गठबंधन के साथी मिलकर तय करेंगे स्थानीय नीति
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलाेक कुमार दुबे ने कहा-गुरुजी सम्मानीय नेता हैं। स्थानीय नीति गठबंधन के सभी साथी मिलकर तय करेंगे। स्थानीय और नियाेजन नीति का फार्मूला जन भावनाओं के अनुरूप हाेगा। बहुत जल्दी यह तय कर दी जाएगी। इससे किसी काे डरने की जरूरत नहीं है।


भाजपा बाेली-पहले हेमंत बताएं कि वह गुरुजी के साथ हैं
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा- पहल मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन अपने स्टैंड क्लीयर करें कि वह राज्य के सवर्मान्य नेता के बयान से सहमत हैं या नहीं। कांग्रेस और राजद काे भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह क्या चाहता है। जब सरकार का स्टैंड क्लीयर हाे जाएगा, तभी भाजपा कुछ बाेलने की स्थिति में हाेगी। क्याेंकि गठबंधन के दलाें की ही इस मुद्दे पर एक राय नहीं है। 


गुरुजी ने फिर दाेहराया-सरकार जल्द 1932 का कट ऑफ डेट लागू करेगी
झामुमाे सुप्रीमाे शिबू साेरेन ने बुधवार काे फिर दाेहराया कि तत्कालीन रघुवर सरकार द्वारा 1985 की डेट से स्थानीय नीति परिभाषित करना गलत है। यह आदिवासी-मूलवासियाें के अधिकाराें का हनन है। हमारी सरकार इसमें अविलंब बदलाव करेगी। खिजुरिया में अपने आवास पर उन्हाेंने कहा कि आदिवासियाें-मूलवासियाें के हक के लिए 1932 का कट ऑफ डेट लागू की जाएगी। इसके बाद यहां के जंगल-झाड़ में रहने वाले खतियानी रैयत वाले आदिवासी-मूलवासियाें काे पलायन नहीं करना पड़ेगा। मसानजाेर डैम पर उन्हाेंने कहा कि बंगाल सरकार इस पर जबरन कब्जा किए हुए है। डैम हमारे क्षेत्र में है और बिजली-पानी का लाभ बंगाल उठा रहा है। सरकार इस पर भी विचार करेगी।

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