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रांची. कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए राजधानी के मेडिकल स्टोर्स पर सैनिटाइजर और मास्क की डिमांड बढ़ गई है। मेडिकल स्टोर्स पर 30 से 600 रुपए तक के मास्क उपलब्ध हैं लेकिन 10 दुकानों में से 6 में सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं हैं। कालाबाजारी की शिकायत के बाद मेडिकल स्टोर्स संचालक प्रिंट रेट में मास्क और सैनिटाइजर बेच रहे हैं। साधारण तीन लेयर वाले सर्जिकल मास्क की भी डिमांड बनी हुई है। शहर के फिरायालाल चौक, रातू रोड और हरमू रोड सहित रिम्स के आसपास के मेडिकल स्टोर्स पर मास्क और सैनिटाइजर की स्थिति जानने के लिए हमने ग्राउंड पर रिपोर्ट ली।
हमारी टीम सबसे पहले फिरायालाल चौक स्थित एक मेडिकल स्टोर पर पहुंची। यहां भीड़ कम ही दिखी लेकिन जितने लोग थे, उनमें अधिकतर मास्क और सैनिटाइजर के लिए पहुंचे थे। माना जाता है कि इस मेडिकल स्टोर्स पर हर तरह की दवाइयां मिल जाती है लेकिन यहां भी सिनेटाइजर की कमी दिखी। पूछने पर मेडिकल स्टोर्स संचालक ने बताया कि डिमांड ज्यादा है, इसलिए सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जब भी सैनिटाइजर की खेप आती है तुरंत बिक जाती है। ज्यादातर लोग 60 और 100 रुपए तक के मास्क खरीद रहे हैं ताकि एक सप्ताह के बाद वे दोबारा दूसरा मास्क खरीद सके। इस चौक पर मौजूद अन्य दुकानों पर भी मास्क की उपलब्धता तो थी लेकिन सैनिटाइजर की कमी बताई गई।
मार्केट में 10 में से छह दुकानों पर नहीं मिला सैनिटाइजर
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमारी टीम रातू रोड, हरमू रोड और रिम्स के आसपास के मेडिकल स्टोर्स पर भी पहुंची। रातू और हरमू रोड के 10 में से छह मेडिकल स्टोर्स पर सैनिटाइजर नहीं मिला। वहीं रिम्स के आसपास कुछ दुकानों को छोड़कर अन्य दुकानों में सैनिटाइजर की उपलब्धता थी।
ब्रांडेड और लोकल सेनेटाइजर में फर्क नहीं समझ रहे खरीदार
एक मेडिकल स्टोर पर मौजूद ग्राहक से पूछने पर उसने बताया कि अब एकाएक सैनिटाइजर की जरुरत बताई जा रही है। पहले नाम तो सुना था लेकिन कभी यूज नहीं किया। ऐसे में हमें ब्रांडेड और लोकल में फर्क नहीं समझ आता। दुकान पर जाने के बाद मेडिकल स्टोर्स संचालक 200 रुपए से 800 रुपए तक के सिनेटाइजर दे रहे हैं। अब जरूरी है तो 200 रुपए वाला ही लोग लेकर घर जा रहे हैं। कालाबाजारी के सवाल पर ग्राहक ने कहा कि जितना प्रिंट रेट था, उतने में ही सैनिटाइजर दिया है। वहीं मेडिकल स्टोर्स संचालकों का कहना है कि 2 प्लाई, 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क की डिमांड ज्यादा है। उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा डिमांड एन 95 मास्क की है जो 80 से 90 फीसदी धूलकणों को रोकता है। इन धूलकणों में बुखार, खांसी से संक्रमित लोगों के कण भी होते हैं जिनसे मास्क आपको सुरक्षित रखता है।
मेडिकल स्टोर्स पर पड़ताल के दौरान पता चला कि साधारण तीन लेयर वाले सर्जिकल मास्क कम इफेक्टेड होते हैं जो समान्यत: सिंगल यूज के बाद दोबारा यूज करने लायक नहीं होता है। वहीं 30 रुपए से लेकर 60 रुपए तक के कपड़े का मास्क धूल से बचाता है। वहीं 600 रुपए वाला मास्क आधे चेहरे को ढंक लेता है जो बुखार और सर्दी के कारण छींकने या खासने के बाद निकलने वाले बैक्टीरिया को आपके शरीर में नाक और मुंह के रास्ते प्रवेश से रोकता है। वहीं मार्केट में 25 एमएल (33 रु एमआरपी), 50 एमएल (80 रुपए), 200 एमएल (265 रुपए) वाले सैनिटाइजर की किल्लत है। यदि ये किसी दुकान पर उपलब्ध हैं, तो वह एमआरपी पर ही मिल रहे हैं।
मास्क और सिनेटाइजर की कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई के हैं निर्देश
उधर, सदर एसडीओ लोकेश मिश्रा ने शनिवार को ही कोरोनावायरस को लेकर मास्क और सैनिटाइजर की कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसने के निर्देश हैं। किसी भी मेडिकल स्टोर्स द्वारा मास्क की कालाबाजारी या जमाखोरी, वितरण या बिक्री में अनियमितता पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। एसडीओ के मुताबिक, रांची में मास्क और सिनेटाइजर की कालाबाजारी की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर ऐसा होता है तो दोषियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
मास्क और हैंड सैनिटाइजर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की श्रेणी में शामिल
कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने भारत का राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करते हुए मास्क एवं सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के संबंधित श्रेणी में डाल दिया है। प्रकाशित गजट में इसे आवश्यक वस्तु आदेश-2020 कहा गया है। इसके साथ ही यह अधिसूचना पूरे देश में हैंड सैनिटाइजर और मास्क के उत्पादन, गुणवत्ता, वितरण एवं बिक्री पर विशेष नजर रखने के लिए प्रशासन को विशेष शक्ति प्रदान करती है। ताकि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी को रोका जा सके।
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