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झारखंड में इस साल नहीं बढ़ेगी सरकारी जमीन की कीमत, भू राजस्व विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

अगर न्यूनतम मूल्य बाजार मूल्य से ज्यादा हो जाता है तब भी इसे कम करने का प्रावधान नहीं है

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 10:14 AM IST

रांची. राज्य में इस साल जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने की संभावना नहीं है। हर साल एक अगस्त को सरकारी जमीनों के मूल्यांकन के बाद उसकी नई दर लागू की जाती है। पिछले कई सालों से यह परंपरा चली आ रही है लेकिन इस साल राज्य सरकार ने इसे दो माह के लिए स्थगित कर दिया। ऐसा इसलिए किया ताकि दो माह में सरकार यह तय कर सके कि जमीन की सरकारी कीमत में वृद्धि करें या न करें। इसकी अवधि 30 सितंबर को समाप्त हो रही है।

इसी साल लागू हो सकती है दो साल वाली व्यवस्था
सूत्रों का कहना है कि सरकार इसी साल से दो साल वाली व्यवस्था को लागू करने वाली है। विभाग द्वारा कैबिनेट के लिए जो प्रस्ताव तैयार किया है उसमें जमीन की कीमतों में का हर दो साल में मूल्यांकन करना है। ऐसे में जब हर साल सरकारी मूल्य में वृद्धि नहीं हो सकेगी। इतना ही नहीं प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि जमीन के मूल्य में अधिकतम पांच फीसदी की ही वृद्धि होगी। कैबिनेट के निर्णय के बाद ही इस पर अमल हो सकेगा।

हर साल होता है 10% वृद्धि का प्रस्ताव, पांच साल 50% इजाफा
ग्रामीण क्षेत्र में दो साल में न्यूनतम मूल्य वृद्धि पांच फीसदी और शहरी क्षेत्र में हर साल सरकारी जमीन के मूल्य में न्यूनतम दस फीसदी वृद्धि का प्रावधान है। अगर शहरी क्षेत्र में एक साल न्यूनतम वृद्धि को लागू नहीं किया जाता है तो झारखंड सरकार को दस फीसदी राजस्व में कमी आएगी। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार को मुद्रांक और निबंधन शुल्क के रूप में 465 करोड़ रुपए मिले थे। इस आधार पर इस बार राज्य सरकार को 46 करोड़ रुपए कम राजस्व मिलने की संभावना है।

अगर न्यूनतम मूल्य बाजार मूल्य से ज्यादा हो जाता है तब भी इसे कम करने का प्रावधान नहीं है। इसलिए पिछले पांच साल में 50 फीसदी वृद्धि हो चुकी है। इसकी वजह से कई स्थानों पर न्यूनतम निर्धारित मूल्य बाजार मूल्य से भी ज्यादा हो गया है। इसका असर मंदी के रूप में दिखाई पड़ा। पूरे राज्य में भूमि और फ्लैट की रजिस्ट्री में कमी आई है। लोगों ने खरीदारी भी कम की। रियल एस्टेट उद्योग की ग्रोथ में भी भारी कमी देखने को मिल रही है।

पिछले चार साल में रजिस्ट्री में आई कमी
वित्तीय वर्ष 2014-15 में निबंधित दस्तावेज की संख्या 165575 , वर्ष 2015-16 में 122439, वर्ष 2016-17 में 107781 और वर्ष 2017-18 में निबंधित दस्तावेज की संख्या 101995 रही।