झारखंड / भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने पदभार ग्रहण किया, रणनीतिक कौशल और मेहनत की क्षमता ने दिलाई जिम्मेदारी

पदभार ग्रहण करने के बाद दीपक प्रकाश के साथ राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व सांसद करिया मुंडा, रांची विधायक सीपी सिंह व लक्ष्मण गिलुवा। पदभार ग्रहण करने के बाद दीपक प्रकाश के साथ राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व सांसद करिया मुंडा, रांची विधायक सीपी सिंह व लक्ष्मण गिलुवा।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी व अन्य। कार्यक्रम के दौरान मंच पर दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी व अन्य।
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पदभार ग्रहण करने के बाद दीपक प्रकाश के साथ राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व सांसद करिया मुंडा, रांची विधायक सीपी सिंह व लक्ष्मण गिलुवा।पदभार ग्रहण करने के बाद दीपक प्रकाश के साथ राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व सांसद करिया मुंडा, रांची विधायक सीपी सिंह व लक्ष्मण गिलुवा।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी व अन्य।कार्यक्रम के दौरान मंच पर दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी व अन्य।

  • विधानसभा चुनाव में हार के बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने दिया था इस्तीफा
  • राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर की विधानसभा चुनाव रिपोर्ट के आधार पर दीपक प्रकाश को मिली कुर्सी

दैनिक भास्कर

Mar 04, 2020, 04:18 PM IST

रांची. झारखंड भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने बुधवार को पदभार ग्रहण कर लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद दीपक प्रकाश ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को धन्यवाद दिया और कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। ये जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं के सहयोग से पूरा करेंगे। इस दौरान उन्होंने हेमंत सरकार को युवा विरोधी भी बताया। बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय नेतृत्व को एक रिपोर्ट दी थी जिसमें दीपक प्रकाश की रणनीतिक कौशल और मेहनत करने की क्षमता का उल्लेख किया गया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 25 फरवरी को दीपक प्रकाश को झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पर नियुक्त किया था। विधानसभा चुनाव में हार के बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने इस्तीफा दे दिया था। पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी आदि मौजूद रहे। 

करीब 30 वर्षों से भाजपा से जुड़े हैं दीपक प्रकाश
दीपक प्रकाश ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 2000 में जब झारखंड राज्य अलग हुआ तो मुख्यमंत्री बाबूलाल के कार्यकाल में झारखंड स्टेट मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जेएसएमडीसी) के चेयरमैन बनाए गए। जब बाबूलाल ने भाजपा छोड़ी और झाविमो बनाया तो दीपक प्रकाश उनके साथ चले गए थे। हालांकि, जल्द वह पुन: भाजपा में वापस आ गए। भाजपा की पिछली कमेटी में दीपक प्रकाश प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रह चुके। लक्ष्मण गिलुवा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद महामंत्री बने।

दो पूर्व मुख्यमंत्री के साथ अच्छी कैमिस्ट्री, बाबूलाल से भी अच्छे संबंध

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर की विधानसभा चुनाव रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष पद की दौड़ में दीपक प्रकाश सबसे आगे हुए। रिपोर्ट में विधानसभा चुनाव के दौरान दीपक प्रकाश की रणनीतिक कौशल और लगातार मेहनत करने की क्षमता का उल्लेख करते हुए माथुर ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को कहा कि संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ दीपक प्रकाश लगातार काम कर रहे हैं। दीपक प्रकाश का बाबूलाल मरांडी के साथ भी अच्छा संबंध है। ऐसे में इन तीनों के सहारे एक मजबूत भाजपा खड़ी करने में दिक्कत नहीं होगी। बाबूलाल मरांडी और धर्मपाल सिंह की रणनीति को दीपक प्रकाश जमीन पर उतारने में सक्षम हैं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ दीपक प्रकाश की अच्छी केमिस्ट्री होने का लाभ भी उन्हें मिला। ऐसे में अंतिम समय में रांची सांसद संजय सेठ और राजमहल विधायक अनंत ओझा अध्यक्ष पद की दौड़ में पीछे हो गए। 

गौरतलब है कि जेवीएम का भाजपा में विलय होने को लेकर विधायक दल का नेता और प्रदेश अध्यक्ष का मामला लटका हुआ था। बाबूलाल के भाजपा में शामिल होने के साथ ही यह तय हो गया था कि अब किसी गैर आदिवासी को ही पार्टी का कमान मिलेगा। प्रदेश अध्यक्ष के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने पूर्व में पांच लोगों के नाम मांगे थे, जिसमें दीपक प्रकाश के अलावा, अनंत ओझा, रवींद्र राय, आदित्य साहू और प्रदीप वर्मा के नाम भेजे गए थे। राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह की रायशुमारी के बाद संजय सेठ और राकेश प्रसाद के भी नाम जुड़े थे। दिल्ली में हुई बैठक में सुनील सिंह और समीर उरांव के नाम शामिल करते हुए राकेश प्रसाद, रवींद्र राय, आदित्य साहू और प्रदीप वर्मा के नाम बाहर कर दिए गए। पर, बाबूलाल मरांडी के विधायक दल का नेता बनने की संभावना में समीर उरांव का नाम भी बाहर हो गया। बाद में सुनील सिंह का नाम भी आउट हो गया। इस प्रकार दीपक प्रकाश, संजय सेठ और अनंत ओझा में से किसी एक के नाम पर सहमति दी जानी थी। ऐसे में ओमप्रकाश माथुर ने दीपक प्रकाश को तार्किक ढंग से आगे किया, जिससे बचे दो नाम पीछे हो गए थे। 

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