यस बैंक / इलाज भी कराना है, खाता में लाखों जमा हैं, परंतु मिल रहे सिर्फ 50 हजार

यस बैंक की धोबाटांड़ शाखा में पुलिस बुलानी पड़ी। यस बैंक की धोबाटांड़ शाखा में पुलिस बुलानी पड़ी।
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यस बैंक की धोबाटांड़ शाखा में पुलिस बुलानी पड़ी।यस बैंक की धोबाटांड़ शाखा में पुलिस बुलानी पड़ी।

  • यस बैंक की धोबाटांड़ शाखा में उमड़े खाताधारी; अधिकारियों से नोकझोंक, पुलिस बुलानी पड़ी
  • इस बैंक में हैं शक्ति मंदिर के साथ कई स्कूल, उद्योगपति, कोयला व्यवसायी व पेट्रोल पंप के खाते

दैनिक भास्कर

Mar 08, 2020, 11:10 AM IST

धनबाद.  यस बैंक बंद हाेने की आशंका ने खाताधारियों को बेचैन कर दिया है। इसी आशंका को लेकर शुक्रवार को काफी संख्या में खाताधारी यस बैंक के धाेबाटांड़ पेट्राेल पंप के सामने स्थित ब्रांच पहुंचे। बैंक खुलते ही ग्राहक यह जानने को बेचैन दिखे कि उनकी जमाराशि सुरक्षित है या नहीं। अधिकारियाें ने खाताधारियों को बताया कि उन्हें जो गाइडलाइन मिली है, उसके मुताबिक 3 अप्रैल तक अधिकतम 50 हजार रुपए तक ही निकासी कर सकते हैं। 3 अप्रैल तक आप फिर एक पैसा भी नहीं निकाल पाएंगे। इसके बाद वरीय अधिकारी जो कहेंगे, उस अनुरूप फैसला लिया जाएगा।

राशि निकासी की सीमा तय किए जाने से कुछ ग्राहक गुस्से में आ गए। उनकी बैंक अधिकारियाें से नाेक-झाेंक भी हुई। खाताधारियों ने कहा-पैसे हमारे हैं तो बैंक कैसे निकासी सीमा तय कर सकता है? स्थिति नहीं बिगड़े, इसकाे लेकर बैंक अधिकारियाें ने बैंक माेड़ थाना से सुरक्षा की मांग की। पुलिस माैके पर पहुंची। हालांकि काेई घटना नहीं हुई लेकिन बैंक के बंद हाेने तक ग्राहकाें का अाना जारी रहा। ग्राहक केवल अपने पैसे की निकासी के लिए पहुंच रहे थे।

बैंक के डेढ़ हजार खाताधारियों को अपने पैसों की फिक्र
यस बैंक की शाखा बैंक मोड़ में वर्ष 2004 में खुली है। बैंक में लगभग 15 साै खाताधारी हैं, जिनमें शक्ति मंदिर के अलावा कई काेयला व्यवसायी, पेट्राेल पंप संचालक, उद्याेगपति और विद्यालयों के अकाउंट संचालित हाे रहे हैं। बैंक की वित्तीय स्थिति के बारे में सूचना पाकर वे भी बैंक पहुंच कर मामले की जानकारी ली।

खाताधारियों का मैनेजर से एक ही सवाल-पैसा सेफ है न?
बैंक पहुंचने वाले लाेगाें के एक ही सवाल था-क्या उनका पैसा सेफ है? डूब तो नहीं जाएगा? कुछ खाताधारियों काे इलाज के लिए बाहर जाना था ताे किसी के घर में शादी थी। ग्राहकाें का परेशानी का एक कारण यह भी है कि बैंक के द्वारा ही जारी एटीएम कार्ड खुद यस बैंक के साथ दूसरे बैंकाें के एटीएम काउंटर में काम नहीं कर रहा है। वहीं बैंक से नेटबैंकिंग भी नहीं हाे रही है। जिस कारण ग्राहक ज्यादा बेचैन दिखे।

मैनेजर की दो टूक : बयान देने का अधिकार नहीं
बयान देने का उन्हें अधिकार नहीं है। मुख्यालय द्वारा इस संबंध में बुलेटिन जारी किया जाएगा। -निशांत प्रसाद, धोबाटांड़ शाखा प्रबंधक, यस बैंक

बैंक पहुंचने वाले खाताधारियों की चिंता सुनिए
अमरजीत सिंह दुआ: सूचना मिलने पर रातभर नींद नहीं आई। उन्हाेंने अपने बच्चाें के भविष्य के लिए बैंक में पैसे जमा करा रखे हैं। बैंक की स्थिति बिगड़ी है ताे उसके लिए ग्राहक जिम्मेवार नहीं हैं।

सुनील तिवारी : चाय बेचकर बैंक में पैसा जमा किया था। लेकिन बैंक बंद हाेने की खबर मिलने पर उनके हाेश उड़ गए हैं। अब क्या हाेगा, पता नहीं।


अश्विनी कुमार: बेटा के स्कूल की फीस जमा करनी है। साेचा बैंक में डिपाेजिट ताेड़ कर फीस जमा करेंगे। बैंक पहुंचे ताे कुछ जानकारी मिली। ऐसे में उनके बच्चाें का भविष्य बर्बाद हाे जाएगा।

साेमनाथ पूर्ति : आरबीआई की गाइडलाइन पर बैंक खुला है। बैंक की स्थिति यहां तक पहुंचने के लिए काैन जिम्मेवार है? सरकार के लिए भी यह चुनाैती है, अन्यथा अन्य बैंकाें के विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हाेना तय है।

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