झारखंड / कहीं खून नहीं मिला, तो इलाज कर रहे डॉक्टर ने खुद ही ब्लड देकर बचाई मरीज की जान

Dainik Bhaskar

Apr 29, 2019, 08:24 AM IST



डॉ. नयन व सदर अस्पताल में भर्ती हीरावंती देवी। डॉ. नयन व सदर अस्पताल में भर्ती हीरावंती देवी।
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डॉ. नयन व सदर अस्पताल में भर्ती हीरावंती देवी।डॉ. नयन व सदर अस्पताल में भर्ती हीरावंती देवी।

  • अल्सर से पीड़ित महिला चैनपुर से पहुंची थी, शरीर में हीमोग्लाेबिन मात्र 3 ग्राम था
  • 12 रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंचे, लेकिन किसी का भी ब्लड ग्रुप महिला से मैच नहीं हुआ

मेदिनीनगर (राणा अरुण सिंह). इलाज में कोताही के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अक्सर अस्पतालों में मरीज के परिजनों और डॉक्टरों के बीच नोकझोंक और मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं। लेकिन कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें डाॅक्टर खुद को धरती के भगवान होने की मिसाल पेश करते हैं। ऐसा ही मामला मेदिनीनगर सदर अस्पताल में देखने को मिला।

 

आम तौर पर इस अस्पताल की पहचान सीरियस मरीजों को रेफर करने भर की है, लेकिन चैनपुर प्रखंड के सलतुआ से गंभीर स्थिति में आई महिला हीरवंती देवी को डॉ. राजीव नयन ने इलाज ताे किया ही, अपना खून देकर उनकी जान भी बचाई। हीरवंती अल्सर से पीड़ित थी और शरीर में कम खून होने के कारण काफी गंभीर हालत में थी। उनका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। ब्लड बैंक समेत कहीं भी ए पॉजिटिव ब्लड की व्यवस्था नहीं हो पाई। रिश्तेदारों और परिचितों में भी इस ग्रुप का खून खोजा गया, लेकिन निराशा ही मिली।

हीरवंती देवी को लेकर उनका पति हरिद्वार सिंह रविवार सुबह सदर अस्पताल पहुंचा। डाॅ. कौशल ने हालत काफी खराब देख भर्ती करने और ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी। सदर अस्पताल में खून की जांच के बाद रिपोर्ट दिखाने के बाद डॉक्टर ने कहा कि हीरवंती का हीमोग्लोबिन मात्र तीन ग्राम है। तुरंत ए पॉजिटिव खून चढ़ाना जरूरी है। इसके बाद हरिद्वार ब्लड बैंक गए, लेकिन वहां इस ग्रुप का एक यूनिट ब्लड भी नहीं मिला। सूचना मिलने पर 12 रिश्तेदार पहुंचे, लेकिन किसी का भी ब्लड मैच नहीं हुआ। इसी बीच डॉ. राजीव नयन राउंड पर निकले और हीरवंती की रिपोर्ट देखकर कहा कि चिंता न करें। मेरा ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। इसके बाद वे ब्लड बैंक पहुंचे और रक्तदान कर परिजनों को दे दिया।

 

एक घंटा देर होती तो मुश्किल हो जाती


डॉ नयन ने बताया कि मरीज हीरवंती को ब्लड चढ़ाने में यदि एक घंटा भी देर हो जाती तो काफी मुश्किल हो सकती थी। स्थिति की गंभीरता और ए पॉजिटिव खून उपलब्ध नहीं होता देख उन्होंने अपना खून डोनेट किया।

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