पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पुराने जेल में जवानों का मेस था, तो लाखों का खाना किसने खाया

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • पुलिस सिरे से नकार रही पर सामने आया फर्जी सरेंडर करने वाले युवकों के जेल में खाने पर खर्च 18.59 लाख का क्लेम 
  • कोबरा जवानों के लिए नहीं, वहां रह रहे अन्य लोगों के लिए बनाया जाता था खाना 

रांची. फर्जी नक्सली सरेंडर मामले में एक नया खुलासा सामने आया है। बिरसा मुंडा पुराना जेल कैंपस में रह रहे युवकों के खाने का खर्च 18.59 लाख रु. जेल प्रशासन ने क्लेम किया है। हालांकि पुलिस फर्जी सरेंडर मामले को सिरे से नकार रही है। हुआ यूं कि बिरसा मुंडा पुराना जेल कैंपस में नक्सली के नाम पर सरेंडर किए गए 514 युवकों को रखा गया था। उन्हें कैदी मानते हुए उनके लिए बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल होटवार से भोजन की व्यवस्था होती रही। 

1) होटवार जेल से पुराने जेल में भेजा जाता था अनाज-सब्जी

सेंट्रल जेल होटवार से अनाज-सब्जी पुराने जेल में भेजा जाता था। वहीं का खानसामा यहां रहकर सरेंडर किए युवकों के लिए नाश्ता-भोजन तैयार करता था। सेंट्रल जेल होटवार रांची के तत्कालीन अधीक्षक दिलीप कुमार प्रधान द्वारा 4 दिसंबर 2013 को रांची एसएसपी को पत्र (पत्रांक 7055) भेज कर भोजन मद में अप्रैल 2012 से 18 फरवरी 2013 तक खर्च हुई राशि का ब्योरा देते हुए बकाये का भुगतान करने का आग्रह किया था। पत्र में उल्लेख था कि खाना का यह खर्च कोबरा बटालियन के जवानों और पुराने जेल कैंपस में रह रहे अन्य लोगों पर हुआ है। जबकि वहां कोबरा के 30-40 जवान ही रहते थे। जबकि पुराने जेल कैंपस में रहने वाले कोबरा जवानों के लिए अपना मेस था। वे उसी में खाना खाते थे।

जेल प्रशासन ने खाने का कुल खर्च 18 लाख 59 हजार 416 रुपए क्लेम किया है। शुरुआती दौर में 91 हजार 52 रुपए और 5.50 लाख रुपए का भुगतान हुआ था। लेकिन बाकी का 12,18,364 रु. बकाया भुगतान करने को कहा गया। पत्र के अनुसार उस वक्त प्रति व्यक्ति के नाश्ता-भोजन पर 52 रु. खर्च क्लेम किया गया था। बड़ा सवाल यह है कि जब कोबरा बटालियन के जवान अपने मेस में तैयार खाना खाते थे, तो आखिर एक साल से भी कम समय में 18.59 लाख रुपए का खाना आखिर कौन खा गया। 

बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल होटवार के जेल अधीक्षक अशोक चौधरी का कहना है कि पुराना जेल के बारे में कुछ नहीं कह सकता। हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। वैसे भी यह मुझसे पहले का मामला है। 

  • सवाल- पुराने जेल में भोजन क्यों और किसके कहने पर भेजते थे। 
  • जवाब- वरीय पुलिस अधिकारियों के कहने पर। 
  • सवाल- आपने कोबरा बटालियन व अन्य आवासित लोगों के लिए भोजन मद में बकाए का भुगतान करने को लिखा था। 
  • जवाब- हां, कोबरा जवानों के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं करता था, वहां आवासित लोगों के लिए व्यवस्था करने को कहा गया था। 
  • सवाल- भोजन मद का कितना बकाया रह गया था, भुगतान हुआ या नहीं। 
  • जवाब- भोजन मद में शुरू-शुरू में कुछ भुगतान हुआ था, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया। बताया गया कि पुलिस विभाग के पास फंड नहीं है। अगले वित्तीय वर्ष में भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन भुगतान हुआ ही नहीं। हम जब तक नौकरी में रहे, तब तक भुगतान नहीं हुआ। बाद का हम नहीं बता सकते हैं। 

जेल अधीक्षक द्वारा लिखे गए पत्र की एक प्रतिलिपि विशेष शाखा के आईजी को भेजी गई थी। इससे स्पष्ट है कि पुराने जेल में उस समय रह रहे लोगों के बारे में खुफिया विभाग को भी जानकारी थी। सामान्य तौर पर प्रारंभ से ही नक्सलियों के सरेंडर के लिए विशेष शाखा के प्रमाण की आवश्यकता होती है। खुलासा होते ही पुराने जेल में सिर्फ कोबरा जवान रह गए।