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कोर्ट में कांप रहे थे लालू, जज से बोले- हुजूर! गांव के हैं, पहली बार सीएम बने थे; हमने पैसा नहीं लिया

7 महीने पहले
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सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में पेशी के दौरान लालू प्रसाद।
  • सबसे बड़े और आखिरी मामले में लालू ने दर्ज कराया बयान, चार मामले में हाे चुकी है सजा
  • अपने स्वभाव के विपरीत लालू बिल्कुल शांत और बिना मसखरी के भाव के कोर्ट में पेश हुए
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रांची. चारा घाेटाले से जुड़े डाेरंडा काेषागार से 139 कराेड़ रुपए की अवैध निकासी मामले में गुरुवार काे राजद प्रमुख लालू प्रसाद सीबीआई काेर्ट में पेश हुए। आरोपी लालू प्रसाद अग्रिम पंक्ति में जज के सवालों के जवाब दे रहे थे। इस दौरान वे टोपी, चश्मा और चादर से अपना शरीर ढके हुए थे। इसके बावजूद थरथर कांप रहे थे।


टोपी-चश्मा से उनके चेहरे का भाव ढक जा रहा था, लेकिन चादर उनके शरीर के कंपन को ढक पाने में असफल हो रहा था। अन्य दिनों की भांति लालू बिल्कुल शांत और बिना मसखरी के भाव के कोर्ट में पेश हुए। जब उन्होंने हाथ जोड़कर कोर्ट से अनुरोध किया, उस दौरान भी वे बिल्कुल अपने को संयमित रखे रहे।


चारा घाेटाले का यह सबसे बड़ा और आखिरी मामला है। इससे पहले चार अन्य मामलाें में उन्हें सजा हाे चुकी है। लालू प्रसाद रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जनवरी काे हाेगी। 
सीबीआई के विशेष जज सुधांशु कुमार शशि की काेर्ट में लालू प्रसाद से दाे घंटे तक पूछताछ हुई। जज ने 34 सवाल पूछे, जिनका उन्हाेंने संक्षिप्त जवाब दिया।

लालू ने कहा, सीबीआई ने जितना वाउचर जब्त किया, सबकी अलग कथा-कहानी है
देर से कार्रवाई के सवाल पर लालू ने कहा- फाइल पर लिखकर मैंने 30 जनवरी 1996 काे ही ऑर्डर दे दिया था। लालू ने कहा-सीबीआई वाला जितना वाउचर जब्त किया है, सबकी अलग कथा-कहानी है। ई सब कहानी ट्रेजरी अफसर और महालेखाकार ने मिलकर किया है। हुजूर...हम गांव से आए व्यक्ति हैं। पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। प्रतिपक्ष काे हजम नहीं हाे रहा था। हम किसी से पैसा नहीं लिया है। सबसे बड़ा मास्टरमाइंड सप्लायर दीपेश चंडाेक और अफसर आरके दास है। उसकाे सीबीआई वाला सरकारी गवाह बना दिया। चंडाेक अकेले 600 कराेड़ रुपए निगल गया। इस केस का यही ताे कथा है।

मार्च लूट पर कहा- किसी ने मेरा आदेश नहीं माना, 1200 कराेड़ रुपए से ज्यादा बच गए थे
जब लालू प्रसाद से उनके मुख्यमंत्री रहते बिहार में मार्च लूट के संबंध में पूछा ताे उन्हाेंने कहा-बिहार में जब मार्च अाता था ताे उसे पहले खर्च करता था। जब हम मुख्यमंत्री थे ताे मार्च से पहले सभी विभागाें की मीटिंग बुलाई थी। इसमें तत्कालीन जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह सहित सबकाे बुलाया था। पूछा कि कितना खर्च किया है। नहीं किया ताे सिविल अकाउंट में सब रुपया जमा करा दाे। लेकिन उस समय मेरे अादेश काे किसी ने नहीं माना। सभी विभागाें का 1200 कराेड़ रुपए बच गया।

दाे बेटियाें के एडमिशन पर कहा, छठ के फल, शक्कर, सूप के खर्च काे भी सीबीआई ने केस में लिखा
लालू प्रसाद ने कहा-दाे बेटियाें का अजमेर के मेवाे काॅलेज में एडिमशान कराया था। पत्नी राबड़ी देवी के खाते से 91 हजार रुपए निकालकर तत्कालीन ओएस कालूराम से फाॅर्म भरवाया था। उस रुपए काे राबड़ी देवी ने इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाया। इसके बावजूद सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा कर दिया। सीबीआई वाले आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले केस में सीमा लांघ गए थे। छठ पूजा पर फल, शक्कर और सूप पर हुए खर्च काे भी केस में लिख दिया। 

बयान दर्ज हाेने के बाद कहा, राजनीतिक द्वेष से परेशान कर रहे, मैंने एक पैसा भी नहीं लिया
बयान दर्ज हाेने के बाद जब काेर्ट रूम खांंली हाे गया ताे लालू प्रसाद हाथ जाेड़ते हुए जज से मुखातिब हुए। उन्होंने जज से कहा-हुजूर...यह केस कुछ नहीं है। राजनीतिक द्वेष से केस दर्ज कराकर हमें परेशान किया जा रहा है। हमने किसी से एक पैसा नहीं लिया। आप ताे जानते ही हैं कि कायदा-कानून कितना सख्त है। आज का काेई मुख्यमंत्री अपने ट्रेजरी अफसर से 10 रुपए नहीं मांग सकता। हम इतना कराेड़ कैसे ले सकते हैं। 

170 नामजद आराेपी थे, सीबीआई ने 575 गवाह पेश किए
सीबीआई ने 11 मार्च 1996 काे यह केस दर्ज किया था। उस समय 170 नामजद आराेपी थे। सीबीआई ने जांच पूरी कर 8 मार्च 2001 काे 142 आराेपियाें के खिलाफ चार्जशीट दायर की। काेर्ट ने इन सभी के खिलाफ 2005 में आराेप तय किया और सुनवाई शुरू की। 15 साल में 575 गवानाें का बयान दर्ज कराया। सुनवाई के दाैरान 43 आराेपियाें की माेत हाे गई, जबकि सात आराेपियाें काे सीबीआई ने सरकारी गवाह बना लिया। पांच आराेपी अभी भी फरार हैं। दाे आराेपियाें ने अपना जुर्म कबूल लिया है। गवाही के दाैरान सीबीआई ने करीब ढाई हजार दस्तावेज काेर्ट में पेश किए।

रिम्स के डॉक्टर भी आए थे साथ
जेल प्रशासन के निर्देश पर रिम्स के डॉक्टरों की टीम लालू प्रसाद के साथ कोर्ट आई थी। टीम में उनका इलाज कर रहे मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. उमेश प्रसाद व एक पीजी डॉक्टर थे। डॉ. प्रसाद ने बताया कि पेशी के दौरान उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई खास दिक्कत नहीं हुई। वे काफी खुश थे। लालू प्रसाद के साथ दो सेवादार और राजद नेता भोला यादव भी साथ थे। रिम्स प्रबंधन की ओर से एक कार्डियक एंबुलेंस उपलब्ध कराया गया था। बताते चलें कि लालू प्रसाद पिछले कई महीनों से रिम्स में भरती है। उनका इलाज पेइंग वार्ड में किया जा रहा है।

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