दहशत पर रोक की तैयारी / हाथियों को जंगलों में ही रोकने की बनी योजना, क्यूआरटी होगी गठित

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 12:00 PM IST


झारखंड के विभिन्न हिस्सों में हाथियों के उत्पात से लोग दहशत में हैं। (फाइल) झारखंड के विभिन्न हिस्सों में हाथियों के उत्पात से लोग दहशत में हैं। (फाइल)
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झारखंड के विभिन्न हिस्सों में हाथियों के उत्पात से लोग दहशत में हैं। (फाइल)झारखंड के विभिन्न हिस्सों में हाथियों के उत्पात से लोग दहशत में हैं। (फाइल)

  • वन विभाग का प्रयास, हाथी जंगल में ही रहे और वो गांव की ओर रुख ना करें
  • वन विभाग उन जंगलों में बांस के पौधों का विस्तार करने की योजना पर काम रहा है

 

रांची(गुप्तेश्वर कुमार). हाथी और इंसान की लड़ाई झारखंड में अब आम बात सी हो गई है। जंगल से सटे इलाकों में रोजाना ही हाथियों द्वारा उत्पात मचाने की खबरें आ रही हैं। हाथियों द्वारा खेत रौंदे जा रहे हैं तो कभी इंसानों की जान ली जा रही है। दिसंबर 2018 से 10 जनवरी 2019 तक में ही हाथी 9 लोगों को मार चुके हैं। लोग काफी दहशत में हैं। किसी के पास इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं। हालांकि वन विभाग अपनी कुछ नई योजनाओं के तहत ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने की तैयारी में है।

खाने-पीने का इंतजाम जंगल के अंदर ही

  1. वन विभाग फिलहाल इस उद्देश्य से नई योजनाओं पर काम कर रहा है कि हाथी जंगल में ही रहे और वो गांव की ओर रुख ना करें। विभाग का मानना है कि इन योजनाओं के पूरा होने पर हाथी जंगल में ही विचरण करेंगे और उनके द्वारा मचाए जाने वाले उत्पात में काफी कमी आ सकती है। वन विभाग हाथियों को जंगल के अंदर ही रोकने लिए उनके खाने-पीने पर ध्यान दे रहा है। वन विभाग का मानना है कि हाथी भोजन और पानी की तलाश में जंगल से गांव में घुसते हैं और फिर उत्पात मचाते हैं। ऐसे में अगर जंगल के अंदर हाथियों के खाने-पीने का इंतजाम कर दिया जाए तो संभव है कि वो गांव की ओर रुख ना करे।

  2. छोटे-छोटे जलाशयों का भी निर्माण किया जाएगा

    हाथी ज्यादातर बांस के पौधों को खाना पसंद करते हैं। ऐसे में वन विभाग उन जंगलों में बांस के पौधों का विस्तार करने की योजना पर काम रहा है, जहां हाथियों का विचरण ज्यादा होता है। साथ ही हाथियों को पीने का पानी मिल सके, इसके लिए जंगल के अंदर छोटे-छोटे जलाशयों का भी निर्माण किया जाएगा। बांस के जंगल और पानी की व्यवस्था हो जाने से हाथी गांव की ओर काफी कम विचरण करेंगे।

  3. झुंड की होगी पहचान

    वन विभाग की ओर से सभी जिलों में हाथियों के झुंड की पहचान की जाएगी। इसके माध्यम से यह समझा जाएगा कि किसी जगह आए हाथियों की कितनी संख्या है और उनमें कितने बच्चे हैं। वो किस ओर मूव कर रहे हैं। उनका लोकेशन ट्रैक किया जाएगा। इस प्रयास से यह तय किया जाएगा कि हाथियों को जंगल में ही रोके रखने के लिए किस स्तर पर प्लानिंग करनी होगी।

  4. 11 क्यूआरटी की जाएगी गठित

    वन विभाग की ओर से हाथियों के उत्पात पर अंकुंश लगाने के लिए पूरे राज्यभर में 11 क्यूआरटी (क्यूक रियेक्शन टीम) गठित की जाएगी। एक टीम में 6 लोग शामिल होंगे। इनका काम होगा कि इन्हें जैसे ही यह सूचना मिलेगी कि किसी जगह पर हाथियों का मूवमेंट देखा जा रहा है तो उस स्थान के पास वाली टीम फौरन वहां पहुंचेगी। आसपास के ग्रामीणों को इसकी सूचना दी जाएगी और उन्हें जागरुक किया जाएगा कि यदि गांव में हाथी आए तो उन्हें कैसे जंगल की ओर खदेड़ा जाए। क्यूआरटी तय करेगी कि हाथी भगाओ टीम को यहां कब भेजना है।

  5. विभिन्न जिलों में एक नजर में हाथियों का उत्पात

    पिछले कुछ महीनों में दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, तोरपा, गुमला जैसी जगहों पर हाथियों ने सैकड़ों किसानों की फसलें रौंद दी तो करीब 9 लोगों की जान ले ली। जामताड़ा में जंगली हाथियों का उत्पात लंबे समय से जारी रहा है। बीते साल 6 दिसंबर से 9 दिसंबर तक तीन लोगों की मौत हाथियों के झुंड की चपेट में आने से हुई। जामताड़ा जिला में हाथी धनबाद और दुमका जिले में अवाजाही करते हैं। जामताड़ा में हाथियों का स्थायी ठिकाना नहीं है। यहां भोजन की तलाश में अन्य जिला से भटक कर पहुंचते हैं। कुछ दिनों तक जामताड़ा जिला के जंगलों में रहने के बाद वापस लौट जाते हैं। 2018 में 19 जून की रात वनजमुनियां गांव निवासी एक शख्स को भी हाथियों के झुंड ने मार दिया था। वर्ष 2009 में मडरो जंगल में नारायणपुर वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी तक को मौत के घाट उतार दिया था।

  6. दुमका में अब तक 69 लोगों को मारा

    दुमका जिला में हाथियों के कहर से अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है। यह आकड़ा झारखंड राज्य बनने के बाद से अब तक का है। मारे गए व्यक्तियों के आश्रितों के बीच वन विभाग की ओर से मुआवजे की राशि वितरित की जा रही है। पर अभी भी कई लोग मुआवजे की राशि से वंचित है।  वहीं, 18 दिसंबर 2018 को पाकुड़ के पाकुड़िया थाना क्षेत्र के खक्सा में हाथियों के झुंड ने एक युवक को कुचलकर मार डाला।

  7. खलिहान में गई महिला को पटक कर मारा डाला

    2 जनवरी, 2019 को रांची के तमाड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह में जंगली हाथियों का आतंक देखने को मिला। हाथी के झुंड ने एक 25 वर्षीय महिला को पटक कर मार डाला था।

  8. मां-बेटी को कुचलकर मारा

    7 जनवरी, 2019 को गुमला कामडारा थाना क्षेत्र के रामपुर पंचायत स्थित गांव रामपुर में अहले सुबह जंगली हाथियों के झुंड ने एक महिला और उसकी 13 माह की बेटी को कुचलकर मार डाला।

  9. हाथियों ने 11 घरों को तोड़ा, पांच परिजन दो घंटे तक फंसे रहे

    गुमला के कामडारा प्रखंड के कुरकुरा थाना से महज एक किमी दूर कुरकुरा रेलवे स्टेशन टोली में 7 जनवरी, 2019 की रात जंगली हाथियों ने लगभग पांच घंटे तक उत्पात मचाया। बाउंड्री को तोड़ आंगन में घुस आए। यहां एक ही परिवार के पांच सदस्य हाथियों के डर से करीब दो घंटे तक घर में छीपे रहे।

  10. क्या कहते हैं अधिकारी

    हाथियों के उत्पात पर स्थाई रोक लगाने का दावा नहीं किया जा सकता है। हालांकि हाथी गांव के अंदर ना घुसे, यह हमारा पहला प्रयास है। इसके लिए इस साल कुछ नई योजनाओं को धरातल पर लाया जा रहा है। जैसे बांस के जंगल का विस्तार, हाथियों के पीने की व्यवस्था जंगल के अंदर ही हो। साथ ही 11 क्यूआरटी गठित की जा रही है। -डॉ. संजय कुमार, प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट

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