टु‌ंडी / पूर्व विधायक राजकिशोर महतो ने कहा- आजसू ने ही हरवा दिया, इस पार्टी का कोई भविष्य नहीं

टु‌ंडी के पूर्व विधायक राजकिशोर महतो। (फाइल) टु‌ंडी के पूर्व विधायक राजकिशोर महतो। (फाइल)
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टु‌ंडी के पूर्व विधायक राजकिशोर महतो। (फाइल)टु‌ंडी के पूर्व विधायक राजकिशोर महतो। (फाइल)

  • राजकिशोर ने आजसू छोड़ी, कहा-निचले स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर नेतृत्व तक ने पूरी ताकत लगा दी
  • टु‌ंडी के पूर्व विधायक राजकिशोर महतो ने कहा- नेतृत्व को लगा फिर जीत गया, तो मंत्री पद देना पड़ जाएगा

दैनिक भास्कर

Jan 15, 2020, 11:56 AM IST

धनबाद. टु‌ंडी के पूर्व विधायक राजकिशोर महतो ने आजसू पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने 10 जनवरी को पार्टी प्रमुख सुदेश महतो को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने अंतिम समय तक उनका टिकट होल्ड पर रख मतदाताओं को गलत संदेश दिया और फिर उन्हें हराने के लिए निचले स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर नेतृत्व तक ने पूरी ताकत लगा दी। नेतृत्व को लग रहा था कि फिर जीत गया, तो मंत्री पद देना पड़ जाएगा। राजकिशाेर ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। आजसू के प्रति गुस्सा, टुंडी में हार की वजह, राजनीति के विकल्प, भविष्य की योजनाएं समेत कई मुद्दों पर राजकिशोर महतो ने अपनी साेच साझा की।

भास्कर : आजसू क्यों छोड़ दी?
राजकिशोर : सिटिंग विधायक का टिकट कभी रोका जाता है क्या? मेरा टिकट 10 दिनों तक रोका गया। सबसे अंत में 53वें प्रत्याशी के तौर पर नाम घोषित किया गया। नेतृत्व के आदेश पर हराने के लिए हर प्रपंच किया गया। इस पार्टी में अब कैसे रह सकता था?

भास्कर : पार्टी आपको क्यों हराना चाहती थी?
राजकिशोर : नेतृत्व को लग रहा था कि फिर एनडीए की सरकार बनी, तो मुझे मंत्री बनाना पड़ेगा। बाहर के एक नेता को टुंडी से लड़ाने की योजना थी। मुझे लड़ने के लिए डुमरी भेजा जा रहा था। मेरे लोगों ने साफ कह दिया था कि बिनोद बाबू के पुत्र के बिना कोई धनबाद में राजनीति कर लेगा क्या? हमारे लोगों ने जबरन टिकट लिया। इसी खुन्नस में हराने के लिए नेतृत्व ने पूरी ताकत झोंक दी।

भास्कर : ऐसी योजना थी, तो पार्टी ने आपका टिकट क्यों नहीं काटा?
राजकिशोर : इसी बात का ताे अफसोस है। पार्टी शुरू में ही मना कर देती। उसके बाद अगर मैं हेमंत सोरेन को कहता, तो वे तुरंत मुझे टुंडी से मैदान में उतार देते। हेमंत की पसंद मथुरा महतो नहीं थे। कांग्रेस से कहता, तो वह भी प्रत्याशी बना देती और तब झामुमो भी प्रत्याशी नहीं देता। आजसू पहले ही मेरे नाम की घोषणा कर देती, तो भाजपा भी टुंडी में प्रत्याशी नहीं उतारती।

भास्कर : आपकी नजर में आजसू का भविष्य क्या है?
राजकिशोर : 53 सीटों पर लड़ी, दो पर जीती। खुद सुदेश महतो इसलिए जीत पाए कि सिल्ली में भाजपा ने प्रत्याशी नहीं दिया। बदले में सुदेश ने रघुवर दास की सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं दिया। इस पार्टी को लोग समझ चुके हैं। भाजपा में अब बाबूलाल मरांडी आने वाले हैं। ऐसे में सुदेश से उनका तालमेल होगा नहीं। पार्टी अकेले कुछ करने की हैसियत में नहीं है। पार्टी का अब कोई भविष्य नहीं है।

भास्कर : अब किस पार्टी में जाएंगे?
राजकिशोर : अभी किसी पार्टी में जाने को कोई विचार नहीं है। कई पार्टियों में रहा। जाॅर्ज फर्नांडीस, वाजपेयी, आडवाणी जैसे नेताओं की बगल में बैठने वाले व्यक्ति को अब किसी पार्टी में जाने की जरूरत नहीं है। कई को मंत्री-सांसद बनवाया। झारखंड में हर कोई मुझे दादा कहकर बुलाता है। दादा अब वकालत करेगा। पढ़ाएगा।

भास्कर : क्या आपको चुनाव हारने का अंदेशा था?
राजकिशोर : लोकसभा चुनाव के पहले मैंने ही सुदेश से कहा कि तीन के बजाय एक लोकसभा सीट मांगो। भाजपा तीन सीट देने से रही। सिर्फ गिरिडीह की जिद पकड़ो, क्योंकि वहां रवींद्र पांडेय और ढुल्लू महतो में किचकिच है। उसके बाद क्या हुआ, सबको पता है। जो व्यक्ति लोकसभा सीट जीतने का फॉर्मूला बना सकता है, वह क्या खुद हारेगा? पार्टी ने ही पीठ में छुरा घोंप दिया।

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