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टीकाकरण के बाद 4 बच्चों की मौत कोई था मां की गोद में-किसी ने पिता की बाहों में तोड़ा दम

डॉक्टरों के मुताबिक लक्षण शुरू होते ही इलाज मिलता, तो बच जाती इनकी जान

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 01:56 AM IST
मां की गोद में मृतक बच्चा आयुष मां की गोद में मृतक बच्चा आयुष

मेदिनीनगर(रांची). टीकाकरण के बाद चार बच्चों की मौत हो गई। एक बच्चे की हालत नाजुक है। उसे रिम्स रेफर किया गया है। मृतकों में 15 महीने का उज्ज्वल, 18 माह की संजू कुमारी, 21 माह का आर्यन कुमार और 10 माह का आयुष शामिल है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच कमेटी गठित कर दी गई है। सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। टीका लगाने वाली एएनएम का वैक्सीन किट बॉक्स और रजिस्टर जब्त कर लिया गया है। टीकाकरण से पहले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच और फिर उन्हें 30 मिनट ऑब्जर्वेशन में रखना चाहिए। 30 मिनट के भीतर बच्चों को देखकर टीके का रिएक्शन डॉक्टर ही समझ सकते हैं। पर वहां डॉक्टर नहीं थे और परिजनों को समझने में देर हो गई।

ये था मामला


प्रभारी सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में एएनएम द्रौपदी देवी ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजे 11 बच्चों को टीके लगाए। इन्हें मिजिल्स, जेई, डीपीटी-डी और ओपीवी के टीके दिए गए। कुछ बच्चों को विटामिन-ए और पोलियो की खुराक भी दी गई। करीब चार घंटे बाद सभी बच्चों को बुखार और दस्त की शिकायत हो गई। परिजनों ने एएनएम द्वारा दी गई पैरासिटामोल टैबलेट खिलाया, लेकिन बुखार कम नहीं हुआ। हालत बिगड़ती चली गई। रविवार सुबह तक तीन बच्चों की मौत हो गई। एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। मानवीर पासवान के 18 माह के बेटे प्रभात कुमार को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से नाजुक हालत को देखते हुए रिम्स रेफर कर दिया गया। डीसी अमित कुमार ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बच्चों को रोटावायरस का टीका नहीं दिया गया है।

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को ग्रामीणों ने बंधक बनाया


बच्चों की मौत के बाद पाटन के डॉ. दिलीप पांडेय, एएनएम पूर्णिमा पांडेय और स्वास्थ्यकर्मी सुनील कुमार गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने इन्हें बंधक बना लिया। करीब तीन घंटे बाद स्थानीय विधायक के समझाने के बाद इन्हें छोड़ा गया। विधायक ने स्वास्थ्य सचिव निधि खरे से बात की। खरे ने आश्वस्त किया कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

मृतक बच्चों के परिजनों को एक-एक लाख रु. मुआवजा


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच में जिसकी भी गलती मिलेगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पीड़ित परिवारों को एक-एक लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। पलामू डीसी ने तीन बच्चों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए का चेक सौंप दिया।

मुख्यालय से जांच टीम आज सुबह पलामू के गांव जाएगी


बच्चों की मौत के कारणों की जांच के लिए गठित मुख्यालय की टीम सोमवार सुबह पलामू जाएगी। टीम के डॉ. अजीत कुमार, प्रभारी चाइल्ड हेल्थ ने बताया कि स्थानीय जांच टीम, जिसमें डीआरसीएचओ और अन्य अधिकारी हैं, मौके पर पहुंच गए हैं। वे लोग सोमवार की सुबह जांच के लिए जांच जा रहे हैं।

वे सवाल, जिनका जवाब सब जानना चाहते हैं


1. क्या दवा एक्सपायरी थी?
- नहीं, दवा एक्सपायरी नहीं थी। दवाओं के बैच और उनकी एक्सपायरी की तिथि की जांच की जा चुकी है।

2. क्या वैक्सीन के कोल्ड चेन का पालन नहीं किया गया?
वैक्सीन के कोल्ड चेन का पालन न होने पर मौत नहीं हो सकती। ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन असरकारी नहीं होता।

3. सही तरीके से इंजेक्शन नहीं दिया?
सही तरीके से इंजेक्शन नहीं देने पर बच्चों में सुई देने के स्थान पर सूजन, लालीपन या फिर दर्द की समस्या होती। जान नहीं जाती।

4. तो क्या वैक्सीन खराब थी?
वैक्सीन की बायोलॉजिकल जांच के बाद ही इसका पता लगाया जा सकता है।

5. खान-पान या पानी में कोई समस्या है?
इसके लिए बच्चों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ेगा।

उज्जवल और संजू उज्जवल और संजू
Four children died after vaccination
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Four children died after vaccination
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