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मनी लांड्रिंग केस / झारखंड के पूर्व मंत्री के निजी सचिव ने ईडी की स्पेशल कोर्ट में किया सरेंडर

मनोज ने 9 अक्टूबर 2006 से 23 अगस्त 2008 के बीच मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के निजी सचिव रहते अवैध तरीके से 13 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। (प्रतीकात्मक फोटो) मनोज ने 9 अक्टूबर 2006 से 23 अगस्त 2008 के बीच मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के निजी सचिव रहते अवैध तरीके से 13 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। (प्रतीकात्मक फोटो)
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मनोज ने 9 अक्टूबर 2006 से 23 अगस्त 2008 के बीच मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के निजी सचिव रहते अवैध तरीके से 13 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। (प्रतीकात्मक फोटो)मनोज ने 9 अक्टूबर 2006 से 23 अगस्त 2008 के बीच मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के निजी सचिव रहते अवैध तरीके से 13 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। (प्रतीकात्मक फोटो)

  • मंत्री का पीएस रहते 13 करोड़ रुपए बटोरने का आरोप, ईडी ने कुर्की के लिए कोर्ट में दिया था आवेदन
  • पूर्व मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी का पूर्व निजी सचिव है मनोज कुमार सिंह, स्पेशल कोर्ट में आज होनी थी सुनवाई

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 04:27 PM IST

रांची. पूर्व मंत्री और आजसू के गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी के पूर्व निजी सचिव मनोज कुमार सिंह ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने मनोज सिंह के खिलाफ कुर्की का आदेश दिया था। मनोज पर आरोप है कि 9 अक्टूबर 2006 से 23 अगस्त 2008 के बीच मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के निजी सचिव रहते अवैध तरीके से 13 करोड़ रुपए अर्जित किए। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से मनोज कुमार सिंह की चल-अचल संपत्ति जब्त करने के लिए 20 जनवरी 2019 को स्पेशल जज एके मिश्र की अदालत में आवेदन दिया गया था। ईडी के वकील सुशील रंजन दास ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि कोर्ट में हाजिर होने के लिए आरोपी मनोज और उसके दोनों भाइयों सुजीत कुमार सिंह व सुबोध कुमार सिंह के खिलाफ इश्तिहार जारी किया जा चुका है। इश्तेहार की प्रति मनोज के मोरहाबादी स्थित फ्लैट के गेट पर चिपकाया गया है। इसके अलावा जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित सुजीत और सुबोध के आवास पर भी नोटिस चिपकाए गए हैं। इसके बावजूद तीनों कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे हैं। इसलिए, इनकी संपत्ति की कुर्की-जब्ती के लिए आदेश दिया जाए। 

अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं तीनों भाई 
2011 में निगरानी ब्यूरो द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले पर कार्रवाई करते हुए ईडी ने मनोज सहित उसके दो भाइयों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। इसके बाद तीनों आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए विशेष कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक में याचिका दायर की थी, लेकिन कहीं इन्हें राहत नहीं मिली।

तीनों भाइयों के खिलाफ 2018 में ही जारी हुआ था वारंट, पर हाजिर नहीं हुए 
इससे पूर्व कोर्ट ने इन आरोपियों को हाजिर करने के लिए इनके खिलाफ 15 जनवरी 2018 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद भी जब तीनों कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, तब 19 नवंबर 2019 को कोर्ट ने तीनों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया। फिर भी ये लोग कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, तब तीनों के खिलाफ इश्तिहार जारी किया गया। अदालत इस बिंदु पर सुनवाई कर रही है कि इनके खिलाफ इश्तेहार जारी करने में कानून का पालन किया गया है या नहीं।

आयकर विभाग ने 2009 में ही जब्त किया मनोज के खाते में 13 करोड़ रुपए 
आयकर विभाग ने वर्ष 2009 में मनोज के खाते में जमा 13 करोड़ रुपए जब्त कर लिया था। निगरानी ब्यूरो ने 2 दिसंबर 2009 को उसके पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया। जिसके अनुसार, मनोज ने 9 अक्टूबर 2006 से 23 अगस्त 2008 के बीच मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के निजी सचिव रहते अवैध तरीके से 13 करोड़ रुपए अर्जित किए। इस बारे में जब मनोज से पूछा गया, तो वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। जबकि, उक्त अवधि में उसे वेतन मद से मात्र दो लाख 66 हजार रुपए ही प्राप्त हुए थे।

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