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15 गोलियां लगने के बाद भी नहीं की अपनी जान की परवाह और उड़ा दिए पाकिस्तान के 3 बंकर, टाइगर हिल पर फहरा दिया था तिरंगा

महज 19 साल की उम्र में परमवीर चक्र से नवाजे गए ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव रांची वासियों से रूबरू हुए।

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:52 PM IST

रांची। ऐ मेरे वतन के लोगों को जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी..। प्रदीप का यह देशभक्ति गीत जब लता मंगेशकर ने देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु के सामने गाया था, तो वे रो पड़े थे। ऐसा ही देशभक्ति से लबरेज मार्मिक क्षण रविवार को रांची प्रेस क्लब में आया तो लोगों की आंखें डबडबा गईं। महज 19 साल की उम्र में परमवीर चक्र से नवाजे गए ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव रांची पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय जवानों ने पाकिस्तानी सैनिकों को 1999 के कारगिल युद्ध में धूल चटाई थी। उन पर 18,000 फीट ऊंची टाइगर हिल के तीन महत्वपूर्ण बंकरों पर कब्जा करने की जिम्मेवारी थी। जितनी चढ़ाई दुर्गम थी, उससे कई गुना हौसला था हमारा। बटालियन के 2 अफसर, 2 जेसीओ और 22 जवान शहीद हुए।

15 गोलियों लगने के बाद भी नहीं की जान की परवाह

15 गोलियों ने उन्हें भी जख्मी कर दिया। लेकिन उसकी परवाह किए बिना उन्होंने दुश्मन के तीन बंकर उड़ाए और आखिर 12 जून को उनकी बटालियन टाइगर हिल विजय करने में कामयाब हो गई। तोलोलिंग पहाड़ी पर तिरंगा फहरा दिया। इस बहादुरी के लिए 15 अगस्त 1999 को उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनके पिता करण सिंह यादव कुमाओं रेजिमेंट का हिस्सा थे। वे 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्ध में शामिल रहे।