दुमका का दम / झामुमो के गढ़ में 11वीं बार मैदान में उतरे शिबू सोरेन, सामने हैं शिष्य सुनील सोरेन



Ground Report of Dumka Lok Sabha seat
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Ground Report of Dumka Lok Sabha seat

  • यहां सीट की नहीं...वजूद की जंग, गुरुजी के सामने उम्मीदवार कोई भी हो दांव पर सीएम की प्रतिष्ठा

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 10:14 AM IST

दुमका. झारखंड की सबसे हॉट सीट। यहां मुकाबला भी उसी स्तर का है। संथाल परगना का केंद्र व प्रदेश की इस उपराजधानी में जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन 11वीं बार मैदान में हैं। झामुमो के इस गढ़ में भाजपा ने कभी गुरुजी के ही शिष्य रहे सुनील सोरेन को तीसरी बार मैदान में उतारा है। उम्मीदवार भले ही सुनील सोरेन हैं, लेकिन प्रतिष्ठा सीएम रघुवर दास की दांव पर लगी हुई है। पांच साल से वे इस सीट पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने में व्यक्तिगत तौर पर लगे हुए हैं। भाजपा हर हाल में यह सीट इस बार झामुमो से छीनना चाहती है। भाजपा के लिए यह सिर्फ एक लोकसभा सीट नहीं है, बल्कि वह गुरुजी को हराकर विपक्ष को बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है। इसलिए यहां दोनों ही दलों के लिए वजूद की लड़ाई बन गई है। 

93 प्रतिशत आबादी गांवों में

  1. आदिवासी बाहुल्य वाले इस इलाके की करीब 93 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। यहां करीब 40 प्रतिशत आदिवासी, 12 प्रतिशत मुस्लिम हैं। रघुवर सरकार ने आदिवासी वोटरों को साधने के लिए मूलभूत विकास कार्य के साथ संताली परंपरा को भी आगे बढ़ाया है। जैसे संताल के रेलवे स्टेशनों पर संताली भाषा में अनाउंसमेंट, सरकारी दफ्तरों पर स्थानीय भाषा में लेखन, स्कूलों में यहां की भाषा में पढ़ाई का प्रस्ताव शामिल है। इन प्रयासों से आदिवासी वोटरों के बीच भाजपा की पैठ पहले की तुलना में कुछ बढ़ी है। 

  2. मुद्दों के साथ भावनाओं की भी हो रही लड़ाई

    सुनील सोरेन गुरुजी को बुजुर्ग व कमजोर बताकर मतदाताओं से संसद में आवाज उठाने वाले प्रत्याशी को जिताने की अपील कर रहे हैं। वहीं, झामुमो कार्यकर्ता लोगों के बीच गुरुजी का अंतिम चुनाव बताकर भावनात्मक माहौल बना रहे हैं। वहीं, गुरुजी कहते हैं कि उनका यहां के लोगों से दिल का रिश्ता है। जब तक वे चुनाव लड़ते रहेंगे, लोग उन्हें जिताते रहेंगे। इस बार भी वे जल, जमीन व जंगल बचाने के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। 

  3. एेसे समझें... दुमका के विधानसभा क्षेत्रों का अंकगणित

    • दुमका : यहां भाजपा पैठ बना रही है। पिछले विस चुनाव में भाजपा की लुईस मरांडी ने झामुमो के हेमंत सोरेन को सीएम रहते 4914 वोटों से हराया था। 2014 के लोस चुनाव में भी इस विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार को 2671 वोटों की लीड मिली थी। 
    • शिकारीपाड़ा : यहां झामुमो व जेवीएम दोनों का अच्छा प्रभाव है। पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो के नलीन सोरेन ने जेवीएम के पारितोष सोरेन को 24501 वोट से हराया। 2014 के लोकसभा चुनाव में जेवीएम को यहां से सबसे अधिक 47865 वोट मिले थे। 
    • जामा : यहां पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो की सीता सोरेन ने भाजपा के सुरेश मुर्मू को 2306 वोट से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में झामुमो को यहां 7953 वोटों की लीड मिली थी। जेवीएम तीसरे नंबर पर रही। 
    • जामताड़ा : यहां पलायन, स्वास्थ्य व सिंचाई मुख्य मुद्दा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के डॉ. इरफान अंसारी ने भाजपा के वीरेंद्र मंडल को 9137 वोटों से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में झामुमो को यहां से 20310 वोटों की लीड मिली थी। 
    • नाला : यहां भी पलायन, पानी प्रमुख समस्या है। पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो के रवींद्रनाथ महतो ने भाजपा के सत्यानंद झा को 7015 वोटों से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा को 813 वोटों की लीड मिली थी। जेवीएम तीसरे नंबर पर था। 
    • सारठ : पिछले विस चुनाव में जेवीएम के रणधीर सिंह ने भाजपा के उदयशंकर सिह को 13901 वोट से हराया था। रणधीर सिंह अभी भाजपा में हैं और कृषि मंत्री हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में झामुमो को यहां 2440 वोट की लीड मिली थी। जेवीएम तीसरे नंबर पर था। 

  4. शिबू सोरेन 10 बार चुनाव लड़े, आठ बार जीते

    1980 में दुमका सीट से शिबू पहली बार जीते। वे यहां से 10 बार चुनाव लड़ चुके हैं। आठ जीते और दो हारे। 1984 में कांग्रेस से और 1998 में भाजपा से हारे हैं। 

    2014 में दुमका लोस चुनाव में वोट शेयर 
    भाजपा 32.86 
    जेएमएम 37.19 
    जेवीएम 17.51 
    सीपीआई 2.93 
    2019 में कुल वोटर : 1365256 

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