गोड्डा सीट / यहां गठबंधन की परीक्षा, कांग्रेस के वोट जेवीएम में गए तो महागठबंधन मजबूत, बिखरे तो भाजपा को फायदा

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 10:46 AM IST


Ground Report of Godda Lok Sabha seat
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Ground Report of Godda Lok Sabha seat
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  • भाजपा का झाविमो से सीधा मुकाबला, महागठबंधन नेताओं ने तो हाथ मिलाए अब देखना है जनता हाथ मिलाती है या नहीं 
  • भाजपा उम्मीदवार निशिकांत दुबे विकास के नाम पर मांग रहे हैं वोट...प्रदीप यादव गिना रहे हैं मंत्रित्व कार्यकाल की उपलब्धियां 

गोड्डा. झारखंड में महागठबंधन और एनडीए के जनाधार की जोर अजमाइश की असली परीक्षा यदि कहीं होनी है तो वह गोड्‌डा लोकसभा सीट ही है। गठबंधन के लिए अलग-अलग दलों के नेताओं ने तो हाथ मिला लिए, लेकिन जनता भी हाथ मिलाती है कि नहीं, इसका रियल टेस्ट यहीं होगा। यहां भाजपा व जेवीएम के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन सबकी नजर कांग्रेस के वोटबैंक पर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के निशिकांत दुबे को 380500, कांग्रेस के फुरकान अंसारी को 319818 व जेवीएम के प्रदीप यादव को 193506 वोट मिले थे। इस बार भी भाजपा से निशिकांत दुबे लगातार तीसरी बार मैदान में हैं। 

कांग्रेस के वोटर की शिफ्टिंग ही तय करेगी जीत-हार

  1. महागठबंधन के तहत यह सीट जेवीएम को मिलने से फुरकान अंसारी चुनावी दौड़ से बाहर हैं। वहीं जेवीएम ने प्रदीप यादव को भाजपा के सामने उतारा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यहां कांग्रेस के वोटर की शिफ्टिंग ही जीत-हार तय करेगी। यदि कांग्रेस को पिछले चुनाव में मिले वोट जेवीएम को शिफ्ट हो जाता है तो महागठबंधन मजबूत होगा और यदि इन वोटों में बिखराव हुआ तो भाजपा को फायदा मिल सकता है। भाजपा उम्मीदवार देवघर में बन रहे एम्स व एयरपोर्ट के साथ क्षेत्र में रेल नेटवर्क बढ़ाना अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हुए लोगों से विकास के नाम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं प्रदीप यादव खुद के मंत्री रहते हुए क्षेत्र में किए गए विकास के काम गिना रहे हैं। वे बाबूलाल मरांडी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे। अडानी पावर प्लांट के विरोध में प्रदीप यादव ने यहां एक आंदोलन भी खड़ा किया था। महागठबंधन यहां भी जल, जंगल व जमीन के मुद्दे पर कायम है। 

  2. छह विधानसभा में देवघर में भाजपा सबसे मजबूत

    इस सीट पर मुस्लिम व यादव मतदाता मिलकर निर्णायक स्थिति (करीब 37%) में हैं। ब्राह्मण वोटर की संख्या भी (करीब 11%) ठीक है। गोड्‌डा लोकसभा की छह विधानसभा में देवघर में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में है। पिछले चुनाव में यहीं भाजपा को सबसे अधिक लीड मिली थी। वहीं पौड़ेयाहाट विधानसभा जेवीएम का गढ़ है। प्रदीप यादव इसी विधानसभा के निवासी हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में एक मात्र इसी विधानसभा में उन्हें लीड मिली थी। इस बार देखना
    होगा कि दोनों ही उम्मीदवार एक-दूसरे के गढ़ में कितना वोट शेयर बढ़ा पाते हैं। इसके बाद फुरकान अंसारी के गृह क्षेत्र मधुपुर विधानसभा में मतदाता किस तरफ जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि महागठबंधन में सीट जाने का सबसे अधिक विरोध फुरकान अंसारी ने ही किया था। यहां 19 मई को मतदान होना है। 

  3. 1984 के बाद हुए 11 चुनाव में सात बार भाजपा जीती

    गोड्‌डा सीट पर 1984 के बाद 11 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें 7 बार भाजपा, तीन बार कांग्रेस व एक बार 1991 में जेएमएम को जीत मिली थी। वर्तमान भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे यहां 2009 व 2014 का चुनाव जीत चुके हैं, वहीं महागठबंधन प्रत्याशी प्रदीप यादव 2002 में हुए उपचुनाव जीते थे। उस दौरान वे भाजपा के टिकट पर लड़े थे।

  4. 2014 चुनाव में वोट शेयर

    • बीएसपी 1.99% 
    • आजसू 1.05% 
    • जेवीएम 18.44% 
    • भाजपा 36.25% 
    • कांग्रेस 30.47% 

  5. विधानसभा क्षेत्र का गणित : छह सीटों में चार भाजपा के पास

    1. गोड्‌डा : विस सीट राजद की, लोस में भाजपा की थी लीड 
    यहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के रघुनंदन मंडल ने आरजेडी के संजय प्रसाद यादव को 34486 वोटों से हराया था। रघुनंदन मंडल के निधन के बाद 2016 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र अमित मंडल ने भी आरजेडी को हरा दिया।
    2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को यहां 11238 वोटों की लीड मिली थी। 


    2. पौड़ेयाहाट : प्रदीप यादव का गृहक्षेत्र है उनका मजबूत गढ़ 
    जेवीएम उम्मीदवार प्रदीप यादव का गृहक्षेत्र, यहीं से वे तीन बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के देवेंद्रनाथ सिंह को 11158 वोटों से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी प्रदीप यादव को 3596
    वोटों की लीड मिली थी। भाजपा यहां दूसरे व कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी। सिंचाई इस क्षेत्र का प्रमुख मुद्दा है। 


    3. महागामा : प्रदूषण मुख्य मुद्दा, भाजपा के पास है विस सीट 
    यहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के अशोक कुमार ने जेवीएम के शाहीद इकबाल को 31560 वोटों से हराया था। कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी। ललमटिया कोयला खदान इसी क्षेत्र में हैं। यहां प्रदूषण प्रमुख समस्या है। 2014 के
    लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के फुरकान अंसारी को 2394 वोटों की लीड मिली थी। जेवीएम तीसरे नंबर पर रही। 

     

    4. जरमुंडी : सीट कांग्रेस के पास, लोस में भाजपा को लीड 
    यहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बादलपत्र लेख ने जेएमएम के हरिनारायण राय को 2708 वोटों से हराया था। भाजपा तीसरे और जेवीएम चौथे नंबर पर रही थी। वहीं 2014 के लोकसभा में भाजपा को यहां 5292 वोटों की लीड
    मिली थी। लोकसभा चुनाव के मतदान में में कांग्रेस दूसरे व जेवीएम तीसरे स्थान पर रही। महागठबंधन के तहत झाविमो के प्रदीप यादव यहां प्रत्याशी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में नंबर तीन थे। अब बाबूलाल मरांडी सरकार के दौरान अपने मंत्रित्व कार्यकाल की उपलब्धियां गिना लोगों के बीच पैठ बनाने की कोशिश में हैं। 
     

    5. मधुपुर : सीट भाजपा की, लोस में लीड कांग्रेस की थी 
    यहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के राज पालिवार ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के हाजी हुसैन अंसारी को 6884 वोटों से हराया था। जेवीएम तीसरे व कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस
    को यहां से 10575 वोटों की लीड मिली थी। भाजपा दूसरे व जेवीएम तीसरे नंबर पर रही। 


    6. देवघर : भाजपा ने आरजेडी को 45152 वोटों से हराया था 
    यहां भाजपा सबसे अधिक मजबूत स्थिति में है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के नारायण दास ने आरजेडी के सुरेश पासवान को 45152 वोटों से हराया था। जेएमएम तीसरे व जेवीएम चौथे स्थान पर रही थी। वहीं 2014 के लोकसभा
    चुनाव में भाजपा को यहां से सबसे अधिक 48889 वोटों की लीड मिली थी। जेवीएम तीसरे नंबर पर रही थी। 

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