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ब्लैकआउट के बीच गैस रिसाव की घटना के बाद आईस फैक्ट्री सील, मृतका के पुत्र के बयान पर एफआईआर दर्ज

एक वर्ष पहले
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जांच पड़ताल करती एनडीआरएफ की टीम। - Dainik Bhaskar
जांच पड़ताल करती एनडीआरएफ की टीम।
  • गुरुवार देर रात घनी आबादी के बीच आइस फैक्ट्री में नाइट्राेजन का हुआ था रिसाव, महिला की माैत, 22 अस्पताल में किए गए थे भर्ती

हजारीबाग. स्थानीय बड़ा बाजार स्थित मल्लाह टोली में जगदीश प्रसाद की आइस फैक्टरी को सील कर दिया गया है। घनी आबादी के बीच यह फैक्ट्री पिछले 50 वर्षों से संचालित थी। जांच में पाया गया है कि फैक्टरी के संचालन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई है। अमोनियम गैस का रिसाव इसी अनदेखी का नतीजा है। गैस रिसने से मोहल्ले के दर्जनों लोग इसकी चपेट में आ गए। देर रात बडा बाजार धोबी गली निवासी कंचन देवी नामक एक महिला की मौत हो गई। शाम में वह सब्जी खरीदने जा रही थी, तभी वह बदहवाश होकर गिर पडी। मृतका के पुत्र पींटू कुमार के फर्द बयान पर बडा बाजार टीओपी में एफआईआर दर्ज किया गया है। 


इस बीच शुक्रवार दोपहर एनडीआरएफ की 20 सदस्यीय टीम ने आईस फैक्ट्री का मुआयना किया। टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर मोहम्मद कलाम ने बताया कि टंकी में गैस खाली हो चुका है। अब यहां कोई खतरा नहीं है। गैस की टंकी का वल्व काफी जर्जर अवस्था में था। जिसके कारण गैस का रिसाव हुआ। जांच में पाया गया कि मशीन का मेनटेनेंस जीरो था। 

अधिक कुलिंग के लिए 255 सेक्शन प्रेशर में मशीन चलाने के कारण मशीन का रिसिवर पाईप फटी और गैस का रिसाव हुआ
हजारीबाग में पिछले चार दिनों से ब्लैक आउट की स्थिति है। फैक्ट्री के संचालक को इसी हाल में अधिक बर्फ का उत्पादन करने की ललक थी। इसके पास कुशल ऑपरेटर भी नहीं थे, जो कुलिंग सिस्टम से संचालक को समझा पाते। फैक्ट्री के संचालकों ने अधिक कुलिंग के लिए 255 सेक्शन प्रेसर में मशीन को चला दिया जिससे मशीन और रिसिवर गर्म हो गया। इसका साईड इफेक्ट यह हुआ कि रिसिवर पाईप तथा उस पर लगा वल्ब फट गया और गैस का रिसाव होने लगा। यदि कुशल ऑपरेटर होता तो रिसिवर के गर्म होने की स्थिति में वाटर स्प्रे करता पर ऐसा नहीं हो पाया और पाईप फट गई। आईस फैक्ट्री का संचालन करने वाले एक्सपर्ट बताते हैं कि कुलिंग के लिए सेक्शन प्रेसर 180 होना चाहिए। 


गर्मियों में अधिकतम 220 सेक्शन प्रेसर पर कुलिंग किया जाता है। जबकि यहां 255 सेक्शन प्रेसर पर कुलिंग किया जा रहा था, यही घातक हुआ। एक्सपर्ट के मुताबिक नाइट्रोजन और हाईड्रोजन गैस के मिश्रण से अमोनिया गैस तैयार होता है। यह जहरीला नहीं होता है। पर शरीर के अंदर प्रवेश कर जाने पर सांस की कठिनाई बढ जाती है। इससे लोगोंं का दम घुंटने लगता है। इस गैस से आंखों में जलन होता है। रात में गैस का रिसाव होने के कारण कबूतरों के आंखों पर इसका प्रभाव पडा और वे जमीन पर गिर कर मरने लगे। 


फैक्ट्री के संचालक जगदीश प्रसाद के पुत्र संजय कुमार ने बताया कि बिजली के फ्लैक्चुवेशन के कारण पॉवर अप डाउन हुआ इससे वल्ब क्षतिग्रस्त हुआ और गैस का रिसाव होने लगा। हमलोग वल्ब को बंद करने की बहुत कोशिश किये पर वह टूट गया। कहा कि फैक्ट्री पिछले 50 साल से संचालित है। 


भाजपा पिछडी जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमरदीप यादव ने कहा कि गैस रिसाव की यह तीसरी घटना है। चार साल पहले भी ऐसी स्थिति बनी थी तब हमलोगों ने फैक्ट्री को घनी आबादी से दूर शिफ्ट करने का आग्रह करते हुए एसडीओ को आवेदन दिया था। पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 


इस बीच जिला प्रशासन ने गैस पीड़ितों के इलाज के लिए राज्य आपदा मोचन निधी से छह लाख रुपए का आवंटन किया है। डीसी डॉक्टर भुवनेश प्रताप सिंह ने बताया कि फैक्ट्री को सील कर संचालक के विरूद्घ आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। 

जांच में जो पाया गया...

  • मेंंटेनेंस शून्य पाया गया।
  • घनी आबादी के बीच फैक्ट्री का संचालन नॉर्म्स के खिलाफ पाया गया।
  • पॉवर कट के बीच हाई प्रेशर में मशीन का संचालन होने से पाईप फटी और गैस का रिसाव हुआ।
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