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सुनवाई / पत्नी की निर्मम हत्या करने के मामले में पति दोषी करार, गला काटकर किया था मर्डर

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 07:44 PM IST


विनोद पाठक। (फाइल फोटो) विनोद पाठक। (फाइल फोटो)
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विनोद पाठक। (फाइल फोटो)विनोद पाठक। (फाइल फोटो)
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  • 29 जनवरी को दीवान से मिली थी लाश, 29 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाई जाएगी सजा

हजारीबाग. हजारीबाग का चर्चित व दिल दहला देने वाली अनु पाठक हत्या कांड की सुनवाई शनिवार को हुई। इस कांड के मुख्य आरोपी सीएमपीडीआई कर्मी विनोद पाठक को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। 29 जनवरी 2018 को यह घटना घटी थी। अनु पाठक की निर्मम हत्या करने के आरोपी पति सीएमपीडीआई कर्मी सह भारत स्वाभीमान ट्रस्ट के जिला अध्यक्ष विनोद पाठक को जिला एवं सत्र न्यायाधीश वन रमेश कुमार की अदालत ने दोषी माना है। अदालत ने सजा को सुरक्षित रखा है। 29 मार्च को अदालत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनाएगी। 

कोर्ट को अब तक नहीं उपलब्ध कराया जा सका चार्जशीट

  1. अनु पाठक। (फाइल फोटो)

    हजारीबाग पुलिस इस मामले में अनुसंधान की सफलता पर खुश है कि हमारा अनुसंधान सही दिशा में रहा जिसका रिजल्ट है कि आज आरोपी दोषी माना गया और अब सजा भी सुनिश्चित हो गई जो 13वें दिन सुना दी जाएगी। हालांकी आरोपी के महिला मित्र के विरूद्ध अब तक कोर्ट को चार्जशीट उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। 

  2. लाश को प्लास्टिक के बैग में पैक कर दीवान में छिपाया

    इस दीवान में छिपाई गई थी लाश। (फाइल फोटो)

    घटना शहर के जयप्रभा नगर मुहल्ला में एक किराए के मकान में घटी थी। जहां विनोद पाठक पत्नी अनु पाठक एवं दो बेटी और एक पुत्र के साथ रह रहे थे। 29 जनवरी 2018 को दिन में जब बच्चे स्कूल चले गए तब विनोद पाठक ने पत्नी अनु पाठक की हत्या गला काट कर कर दिया था और लाश को प्लास्टिक में पैक कर दीवान के बाक्स में छिपा दिया था। जब बच्चे वापस घर लौटे तो उन्हे पाठक ने बता दिया था कि तुम्हारी मां रांची मायके चली गई है। लेकिन पाठक कमरा को छोड़ नहीं रहा था जिससे बड़ी बेटी कृति को संदेह हुआ। 30 जनवरी को विनोद पाठक ने कमरे में ताला लगा कर बड़ी बाजार टीओपी पहुंचा और पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया कि मेरी पत्नी लापता है। इस क्रम में बेटी कृति ने कमरे का ताला तोड़ कर जब दीवान का बॉक्स खोली तो वह हैरान रह गई। उसने तुरत बड़ी बाजार टीओपी प्रभारी को फोन कर मामले की जानकारी दे दी। 

  3. सूचना मिलने के दौरान टीओपी में ही था विनोद पाठक

    मृतका के तीनों बच्चे। (फाइल फोटो)

    मृतका की बेटी ने जब पुलिस को सूचना दी तब आरोपी विनोद पाठक टीओपी में ही था। उसे संदेह हो गया कि पुलिस मेरे ही घर के सदस्य से बात कर रही है। वह आवेदन के लिए कागज लाने के बहाने टीओपी से बाहर निकला और फरार हो गया। जिसमें पाठक को एक महिला मित्र पुलिस सब इंस्पेक्टकर की मदद फरार होने में मिलने की बात सामने आई थी। बाद में पुलिस की सक्रियता से महिला मित्र को घटना के दूसरे दिन से हर रोज थाना बुलाकर गहन पूछताछ किया जाता रहा और पांचवें दिन उसे पुलिस ने जेल भेज दिया, जो वर्तमान में जमानत पर है। जबकि विनोद पाठक के उपर पारिवारिक दबाव बनाए जाने के बाद उसे यूपी के एक ठिकाने से घटना के 19वें दिन 19 फरवरी 2018 को गिरफ्तार कर हजारीबाग लाया गया और तत्काल उसे जेल भेज दिया गया। 

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