झारखंड / हेमंत सोरेन अपनी सरकार में सबसे युवा, रामेश्वर उरांव सबसे उम्रदराज; कैबिनेट की औसत आयु 57 साल

मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन की यह दूसरी पारी है। मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन की यह दूसरी पारी है।
आलमगीर आलम पाकुड़ से विधायक चुने गए हैं। आलमगीर आलम 20 अक्टूबर 2006 से 26 दिसंबर 2009 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं। आलमगीर आलम 2000, 2005 और 2014 में भी पाकुड़ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। आलमगीर आलम पाकुड़ से विधायक चुने गए हैं। आलमगीर आलम 20 अक्टूबर 2006 से 26 दिसंबर 2009 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं। आलमगीर आलम 2000, 2005 और 2014 में भी पाकुड़ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे।
रामेश्वर उरांव लोहरदगा से विधायक चुने गए हैं। वे मनमोहन सिंह की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। झारखंड पुलिस के एडीजी पद से 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने राजनीति करियर शुरू किया था। रामेश्वर उरांव लोहरदगा से विधायक चुने गए हैं। वे मनमोहन सिंह की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। झारखंड पुलिस के एडीजी पद से 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने राजनीति करियर शुरू किया था।
सत्यानंद भोक्ता चतरा से विधायक चुने गए हैं। भोक्ता इससे पहले चतरा विधानसभा क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।  वर्ष 2000 में पहली बार विधायक बनने के बाद सत्यानंद भोक्ता पेयजल व स्वच्छता मंत्री बने थे। जबकि वर्ष 2005 में दूसरी बार विधायक बनने पर वे झारखंड सरकार में कृषि मंत्री बनाए गए थे। सत्यानंद भोक्ता चतरा से विधायक चुने गए हैं। भोक्ता इससे पहले चतरा विधानसभा क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2000 में पहली बार विधायक बनने के बाद सत्यानंद भोक्ता पेयजल व स्वच्छता मंत्री बने थे। जबकि वर्ष 2005 में दूसरी बार विधायक बनने पर वे झारखंड सरकार में कृषि मंत्री बनाए गए थे।
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मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन की यह दूसरी पारी है।मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन की यह दूसरी पारी है।
आलमगीर आलम पाकुड़ से विधायक चुने गए हैं। आलमगीर आलम 20 अक्टूबर 2006 से 26 दिसंबर 2009 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं। आलमगीर आलम 2000, 2005 और 2014 में भी पाकुड़ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे।आलमगीर आलम पाकुड़ से विधायक चुने गए हैं। आलमगीर आलम 20 अक्टूबर 2006 से 26 दिसंबर 2009 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं। आलमगीर आलम 2000, 2005 और 2014 में भी पाकुड़ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे।
रामेश्वर उरांव लोहरदगा से विधायक चुने गए हैं। वे मनमोहन सिंह की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। झारखंड पुलिस के एडीजी पद से 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने राजनीति करियर शुरू किया था।रामेश्वर उरांव लोहरदगा से विधायक चुने गए हैं। वे मनमोहन सिंह की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। झारखंड पुलिस के एडीजी पद से 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने राजनीति करियर शुरू किया था।
सत्यानंद भोक्ता चतरा से विधायक चुने गए हैं। भोक्ता इससे पहले चतरा विधानसभा क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।  वर्ष 2000 में पहली बार विधायक बनने के बाद सत्यानंद भोक्ता पेयजल व स्वच्छता मंत्री बने थे। जबकि वर्ष 2005 में दूसरी बार विधायक बनने पर वे झारखंड सरकार में कृषि मंत्री बनाए गए थे।सत्यानंद भोक्ता चतरा से विधायक चुने गए हैं। भोक्ता इससे पहले चतरा विधानसभा क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2000 में पहली बार विधायक बनने के बाद सत्यानंद भोक्ता पेयजल व स्वच्छता मंत्री बने थे। जबकि वर्ष 2005 में दूसरी बार विधायक बनने पर वे झारखंड सरकार में कृषि मंत्री बनाए गए थे।

  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 42 साल के हैं, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव 72 साल के हैं
  • हेमंत कैबिनेट में कांग्रेस के रामेश्वर उरांव सबसे धनी मंत्री, सबसे कम संपत्ति राजद के भोक्ता की

दैनिक भास्कर

Dec 29, 2019, 04:53 PM IST

रांची. झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने राज्य के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में रविवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। हेमंत सोरेन के साथ तीन अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। शपथ लेने वाले मंत्रियों में सबसे पहले आलमगीर आलम, इसके बाद रामेश्वर उरांव और आखिर में सत्यानंद भोक्ता शामिल रहे। मुख्यमंत्री के साथ तीनों मंत्रियों को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

हेमंत सोरेन अपनी सरकार में सबसे युवा हैं। हेमंत सोरेन 42 साल के हैं, जबकि उनके मंत्रिमंडल में शामिल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव सबसे ज्यादा 72 साल के हैं। हेमंत कैबिनेट की औसत आयु 57 साल है। वहीं हेमंत कैबिनेट में कांग्रेस के रामेश्वर उरांव सबसे धनी मंत्री हैं। रामेश्वर उरांव की कुल संपत्ति 28 करोड़ रुपए है जबकि राजद के सत्यानंद भोक्ता हेमंत कैबिनेट के सबसे कम संपत्ति वाले मंत्री हैं। सत्यानंद भोक्ता के पास 77 लाख रुपए की संपत्ति है। 

मुख्यमंत्री हेमंत पर दो जबकि राजद के सत्यानंद भोक्ता पर एक केस
नई सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दो मामले दर्ज हैं। वहीं हेमंत सरकार के मंत्री राजद के सत्यानंद भोक्ता पर एक केस दर्ज है। वहीं रामेश्वर उरांव और आलमगीर आलम पर एक भी मामले दर्ज नहीं हैं। वहीं हेमंत सोरेन 12वीं पास हैं जबकि आलमगीर आलम ग्रेजुएट, रामेश्वर उरांव के पास पीएचडी की डिग्री है। वहीं सत्यानंद भोक्ता 10वीं पास हैं।

15 जनवरी के बाद हो सकता है कैबिनेट का विस्तार

15 जनवरी के बाद हेमंत सोरेन की कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। फिलहाल, गठबंधन की सरकार में मंत्रियों के नाम पर आम सहमति नहीं बन पाई है। फिलहाल, कांग्रेस से दो और राजद से एक मंत्री ने शनिवार को शपथ ली है।

श्रवण नक्षत्र... यह राजनीतिक कामयाबी का फल देता है 
अपराह्न 2.12 से 2.22 बजे श्रवण नक्षत्र, चौथ तिथि और वैनायकी श्रीगणेश व्रत काल 
ज्योतिषियों के अनुसार, शपथ ग्रहण के समय रवियोग है, जो बहुत ही शुभ कहा जा सकता है। यह योग शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त, राजनीतिक कार्यों में सफलता देने वाला है। सभी वर्ग के लोगों के लिए शपथ ग्रहण लाभप्रद। 

  • हेमंत सोरेन ने 2 बजकर 19 मिनट पर शपथ लेना शुरू की। हिंदी में शपथ ली।
  • आलमगीर आलम ने 2बकर 24 मिनट पर हिंदी में शपथ लेना शुरू किया।
  • रामेश्वर उरांव ने 2 बजकर 28 मिनट पर हिंदी में शपथ लेना शुरू किया।
  • सत्यानंद भोक्ता ने 2 बजकर 32 मिनट पर हिंदी में शपथ लेना शुरू किया।

शोर इतना कि राज्यपाल को भीड़ को रोकना पड़ा...

मुख्य सचिव डीके तिवारी ने जैसे ही राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की ओर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए उनका आदेश पढ़ना शुरू किया, भीड़ ने जय झारखंड, शिबू सोरेन जिंदाबाद, हेमंत सोरेन जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस दौरान मंच पर मौजूद राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील की। 

शपथ ग्रहण के दौरान समर्थकों ने की आतिशबाजी

हेमंत सोरेन और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के दौरान मोरहाबादी मैदान के एक किनारे गठबंधन के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की। मुख्यमंत्री और तीनों मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मोरहाबादी मैदान में मौजूद समर्थक जय झारखंड और शिबू सोरेन जिंदाबाद के नारे लगाते रहे।

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