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आर्मी डे / उरी और पुलवामा के शहीदों के परिवार से किए वादे पूरा नहीं कर सकी सरकार

शहीद जावरा मुंडा के परिजन। (फाइल) शहीद जावरा मुंडा के परिजन। (फाइल)
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शहीद जावरा मुंडा के परिजन। (फाइल)शहीद जावरा मुंडा के परिजन। (फाइल)

  • उरी हमले में झारखंड के तीन जबकि पुलवामा हमले में एक जवान हुआ था शहीद
  • सरकारी सुविधा पाने के लिए रांची तक जाना पड़ता है, होती है काफी परेशानी

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 06:38 AM IST

रांची. 15 जनवरी को इंडियन आर्मी डे है। पुलवामा और उरी में हुए आतंकी हमले में झारखंड के चार जवान शहीद हुए थे। इंडियन आर्मी डे पर दैनिक भास्कर ने इनके परिवार की वर्तमान परिस्थितियों को जानने की कोशिश की। सामने आया कि कई परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी बेहतर नहीं है, जितनी होनी चाहिए। राज्य सरकार ने जो वादे किए, वो पूरे नहीं हो सके और यहां तक की सरकारी सुविधा लेने के लिए कागजात बनवाने के लिए रांची तक आना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें काफी मुसिबतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, परिजनों को इसका गर्व भी है कि उनका बेटा, भाई, पति देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए।

बच्चों को फ्री एजुकेशन का वादा नहीं हुआ पूरा
18 सितम्बर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकी हमले में खूंटी मुरहू के जावरा मुंडा शहीद हो गए थे। सिपाही जावरा मुंडा झारखंड के खूंटी स्थित मेरला गांव के रहने वाले थे और इनकी तीन पीढ़ियां सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करती आई है। शहीद जावरा मुंडा की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी संध्या धनवार 11वीं में,मझली बेटी सुषमा क्लास 6 व सबसे छोटी बेटी शिल्पा एलकेजी की छात्रा है।

शहीद जावरा मुंडा की पत्नी झींगी देवी बताती हैं कि झारखंड सरकार ने जो भी वायदे किए, वो पूरे नहीं हुए। बच्चों को फ्री एजुकेशन की बात कही गई थी पर उन्हें दो बेटियों की पढ़ाई का खर्च अब भी उठाना पड़ रहा है। सुषमा की फीस माफ कर दी गई है। सरकार ने खूंटी और समाधि स्थल पर शहीद जावरा मुंडा की प्रतिमा लगाने की भी बात कही थी। पर अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब भी उन्हें पुराने मकान में ही रहने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि नया घर देने तक की बात कही गई थी।

शहीद संतोष गोप। (फाइल)

सरकारी सुविधा के लिए रांची आकर बनवाने पड़ रहे कागजात
18 सितम्बर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकी हमले में गुमला चैनपुर के संतोष गोप शहीद हो गए थे। वे गुमला जिला के बसिया प्रखंड क्षेत्र के टेंगरा गांव के रहने वाले थे। संतोष अविवाहित थे। शहीद संतोष की भाभी बिंदेश्वरी देवी कहती हैं कि उस समय सरकार द्वारा कुछ राशि सहयोग के तौर पर दी गई थी। लेकिन उसके बाद कोई सहयोग नहीं मिला। सरकारी राशि प्राप्त करने के लिए बहुत से कागजात मांगे जा रहे हैं, जिसे बनवाने के लिए गुमला से रांची दौड़ना पड़ रहा है। शहीद के परिजन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

शहीद विजय सोरेंग पत्नी के साथ। (फाइल)

आज भी सरकारी मदद पूरी नहीं मिली
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ जवानों के ऊपर हुए हमले में गुमला स्थित बसिया प्रखंड के फरसमा गांव के 42 वर्षीय विजय सोरेंग शहीद हो गए थे। विजय सोरेंग के घर में उनके पिता ब्रीस सोरेंग, मां लक्ष्मी सोरेंग, भाई संजय सोरेंग व बेटा अरुण सोरेंग हैं। पत्नी फिलहाल जैप वन में महिला कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। शहीद की परिवारिक स्थिति आज भी सरकार सुधार करने में कामयाब नहीं हो पाई। विजय सोरेंग के छोटे भाई संजय सोरेंग कहते हैं कि सरकार द्वारा मिलने वाली आज भी सरकारी मदद पूरी नहीं की जा सकी है। उन्होंने कहा कि पहले थोड़ी बहुत धनराशि मिली थी। आज भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विजय सोरेंग की पत्नी और उनका बेटा रांची में रहते हैं। मां-पिताजी गुमला में रहते हैं।

परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना एक्का। (फाइल)

परमवीर चक्र विजेता के गांव में सुविधाओं का अभाव
गुमला स्थित जारी के लांस नायक अलबर्ट एक्का ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के अलावा 1971 के भारत पाक युद्ध में अपनी बहादूरी दिखाई थी। परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का ने इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना को डेढ़ किलोमीटर तक पीछे धकेल दिया था और गंगासागर अखौरा को पाक फौज के नापाक कब्जे से आजाद करवा दिया था। इस अभियान के समय वे काफी घायल हो गये थे और 3 दिसम्बर 1971 को शहीद हो गए थे। लांस नायक अलबर्ट एक्का बिहार रेजीमेंट के चौदहवीं बटालियन में थे। ये पूर्वी भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता हैं।

उनका पूरा परिवार अब पैतृक गांव जारी को छोड़कर चैनपुर में रहते हैं। पत्नी बलमदीना एक्का की आए दिन तबियत खराब रहती है। जारी में सुविधाओं का घोर अभाव है। जिस कारण सभी लोग चैनपुर में ही रहते हैं। आर्थिक स्थिति लगभग सामान्य है। परिवार में परमवीर अल्बर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना एक्का, पुत्र भीमसेन्ट एक्का, बहु रजनी एक्का व दो बेटी हैं। परमवीर अल्बर्ट एक्का के पुत्र भीमसेन्ट एक्का जारी ब्लॉक में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं।

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