बोकारो / झारखंड आंदोलन के नेता रहे काली मांझी का निधन, झामुमो के संस्थापक सदस्य थे

काली मांझी। (फाइल फोटो) काली मांझी। (फाइल फोटो)
19 फरवरी को सिविल सर्जन एवं डायरेक्टर बीजीएच ने संयुक्त रूप से काली मांझी के स्वास्थ्य एवं इलाज का जायजा लिया था। 19 फरवरी को सिविल सर्जन एवं डायरेक्टर बीजीएच ने संयुक्त रूप से काली मांझी के स्वास्थ्य एवं इलाज का जायजा लिया था।
सीएम के निर्देश पर आंदोलनकारी मांझी को दो दिन पहले बीजीएच में भर्ती कराया गया था। सीएम के निर्देश पर आंदोलनकारी मांझी को दो दिन पहले बीजीएच में भर्ती कराया गया था।
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काली मांझी। (फाइल फोटो)काली मांझी। (फाइल फोटो)
19 फरवरी को सिविल सर्जन एवं डायरेक्टर बीजीएच ने संयुक्त रूप से काली मांझी के स्वास्थ्य एवं इलाज का जायजा लिया था।19 फरवरी को सिविल सर्जन एवं डायरेक्टर बीजीएच ने संयुक्त रूप से काली मांझी के स्वास्थ्य एवं इलाज का जायजा लिया था।
सीएम के निर्देश पर आंदोलनकारी मांझी को दो दिन पहले बीजीएच में भर्ती कराया गया था।सीएम के निर्देश पर आंदोलनकारी मांझी को दो दिन पहले बीजीएच में भर्ती कराया गया था।

  • ब्रेन हेमरेज के बाद इलाज के लिए 19 फरवरी को बीजपीएच में कराया गया था भर्ती
  • शिबू सोरेन के थे करीबी मित्र, अलग झारखंड की लड़ाई में 15 दिन गए थे जेल
  • अंतिम दिन तक नहीं मिला झारखंड आंदोलनकारी पेंशन का लाभ 

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 07:07 PM IST

रांची/बोकारो. बोकारो जेनरल अस्पताल (बीजीएच) में इलाजरत झारखंड आंदोलनकारी काली मांझी का गुरुवार रात निधन हो गया। उन्हें ब्रेन हेमरेज के बाद इलाज के लिए बीजीएच में भर्ती करवाया गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल के बाद बोकारो उपायुक्त मुकेश कुमार ने झारखंड आंदोलनकारी काली मांझी के इलाज की व्यवस्था करवाई थी। इसके लिए उन्होंने सिविल सर्जन और बीजीएच के निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टर एके सिंह से बातचीत की थी। चिकित्सकों ने उनके इलाज में पांच लाख रुपए खर्च बताया था। बोकारो के डीसी के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारी मांझी का इलाज नि:शुल्क शुरू हाे गया था। मगर बीती रात इनका निधन हो गया।

जेएमएम बोकारो के ट्विटर हैंडल पर 19 फरवरी को ट्वीट कर जानकारी दी गई थी कि झारखंड आंदोलनकारी नेता काली मांझी की हालत नाजुक है। उन्हें बोकारो जरनल अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इन्हें ब्रेन हेम्ब्रज हो गया है, जितना जल्द हो सके ऑपरेशन करना होगा, तकरीबन पांच लाख रुपए का खर्च बता रहे हैं। इस संबंध में हेमंत सोरेन से इलाज में मदद की अपील की गई थी। इसके बाद हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर बोकारो के डीसी को निर्देश दिया था कि काली मांझी की मदद के लिए त्वरित उचित कार्रवाई कर सूचित करें।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ट्वीट
झारखंड आंदोलन और झामुमो परिवार के लिए आदरणीय कालीचरण मांझी ने अभूतपूर्व योगदान दिया था। उनकी मृत्यु से मन आहत है। परमात्मा आदरणीय मांझी की आत्मा को शांति प्रदान करे। श्रद्धांजलि।

मुख्यमंत्री ने इलाज कराने का दिया था निर्देश
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बोकारो के डीसी ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि सिविल सर्जन एवं डायरेक्टर बीजीएच ने संयुक्त रूप से काली मांझी के स्वास्थ्य एवं इलाज का जायजा लिया। साथ ही बीजीएच प्रबंधन से बात कर इनके इलाज  को निशुल्क कराने की व्यवस्था भी की गई।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के 86 वर्षीय नेता काली मांझी झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वे झारखंड राज्य के आंदोलनकारी दिशोम गुरु शिबू सोरेन के करीबी मित्रों में से एक थे। परिजनों ने बताया कि उन्होंने अलग झारखंड के लिए लड़ाई लड़ी थी लेकिन उनके आखिरी दिन तक झारखंड सरकार के द्वारा घोषित आंदोलनकारियों को दी जाने वाली पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया। काली मांझी जरीडीह प्रखंड अंतर्गत चिलगड्डा पंचायत के गोपालपुर ग्राम के कुकुरतोपा टोला निवासी थे। 


अलग झारखंड की लड़ाई में मृतक काली मांझी 15 दिन तक तेनुघाट कारावास में बंद भी रहे। काली मांझी दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलनों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। शिबू सोरेन द्वारा 1972 में स्थापित झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्य के रूप में वे पार्टी में शामिल हुए थे और आजीवन इसी पार्टी में बन रहे। काली मांझी के परिजनों ने बताया कि गर्मी, ठंड या फिर बारिश में वे एक ही कपड़े में रहते थे। वे घुटने से ऊपर धोती और हरे रंग की पगड़ी पहनते थे। वे अपने पीछे पुत्र पाऊरी हेम्ब्रम, पुत्री समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

2010 में मुखिया एवं 2015 में जिप सदस्य का लड़े थे चुनाव

काली मांझी ने 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जरीडीह दक्षिणी जिला परिषद क्षेत्र से जिप सदस्य के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और तीसरे स्थान पर रहे थे। इससे पूर्व 2010 में अलग झारखंड निर्माण के बाद हुई पहली बार पंचायत चुनाव के दौरान अपने ग्राम पंचायत चिलगड्डा से बतौर मुखिया उम्मीदवार के रूप में उन्होंने किस्मत आजमाया था लेकिन तीसरे स्थान पर रहे थे। 

घटना की सूचना के बाद पहुंचे शिक्षा मंत्री
काली मांझी के निधन की सूचना के बाद झारखंड के शिक्षा व मद्द निषेध मंत्री जगरनाथ महतो बोकारो बीजीएच अस्पताल पहुंचे और जानकारी ली।

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