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विधानसभा बजट सत्र; बोकारो के कसमार में युुवक की मौत मामले पर भाजपा विधायकों का प्रदर्शन

5 महीने पहले
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प्रदर्शन करते भाजपा के विधायक।
  • कुछ दिन पूर्व हुई थी कसमार के भूखल घांसी की मौत, भाजपा विधायकों का आरोप- भूख से हुई है मौत
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रांची. झारखंड विधानसभा बजट सत्र के 12वें दिन गुरुवार को भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर सांकेतिक रूप से धरना प्रदर्शन किया। भाजपा विधायकों ने बोकारो के कसमार में छह मार्च को हुई कथित तौर पर भूख से हुई 42 वर्षीय भूखल घासी की मौत के मामले पर प्रदर्शन किया।


उधर, सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल से पहले भाजपा के विधायक वेल में पहुंचकर हंगामा करने लगे। भूखल घासी के आश्रितों को 10 लाख रुपए मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भाजपा विधायकों ने की।


चंदनकियारी विधायक सह पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा कि सरकार कसमार प्रखंड के सिंहपुर गांव के भूखल घासी के परिजनों को 10 लाख रुपS का मुआवजा दे। साथ ही बेहतर जीवकोपार्जन के लिए उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति, गरीब, दलित आदि के नाम पर ही सत्ता में आई है। ऐसे में सरकार को इसके प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है। 

उन्होंने सरकार के अधिकारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से बीडीओ ने भूखल घासी के परिवार को 25 हजार रुपए का प्रलोभन दे कर भूखल की मौत का कारण बीमारी बताने को कहा था.. वह निंदनीय है। सरकार को इसपर संज्ञान लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस घर में खाने के लिए बर्तन तक नहीं है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि उसके परिजनों को आर्थिक मदद करें। वहीं उन्होंने कहा कि बुधवार को ही सीएम हेमंत सोरेन के ट्विटर पर मैंने देखा कि भूखल घासी जैसी ही स्थिति सोनाहातू के लोहरा परिवार की है। उसके घर में भी पिछले तीन दिनों से चूल्हा नहीं जला है। उन्होंने पार्टी के तरफ से मांग की कि सरकार राज्य में ऐसी व्यवस्था बनाए कि भूखल घासी जैसी घटना दोबारा राज्य में न हो।

विधानसभा की ध्यानाकर्षण समिति करेगी टीवीएनएल के श्रमिकों को ग्रेच्यूटी समेत अन्य सुविधाएं न मिलने की जांच
विधानसभा की ध्यानाकर्षण समिति टीवीएलएन में कार्यरत श्रमिकों के ग्रेच्यूटी, इएसआई कार्ड और इपीएफ की कटौती नहीं किये जाने के मामले की जांच करेगी। आजसू विधायक लंबोदर महतो द्वारा ध्यानाकर्षण के माध्यम से गुरुवार उठाये गये सवाल पर स्पीकर ने यह नियमन दिया। अपने ध्यानाकर्षण में लंबाेदर महतो ने कहा कि पीटीपीएस ललपनियां में 710 श्रमिक कार्यरत थे। उनमें 13 श्रमिकों की मृत्यु भी हो गई लेकिन अभी तक उन्हें ग्रेच्यूटी का भुगतान नहीं किया गया है। जो श्रमिक हैं, उनका इएसआई कार्ड तक नहीं है। उन्होंने इनके नियमितिकरण का भी मामला उठाया। 


इस पर प्रभारी मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि संविदा पर रखे गए श्रमिकों के नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। भविष्य में कोई नियम बनेगा तो सुधार होगा। संवेदक के माध्यम से जो भी श्रमिक कार्यरत हैं उन सभी का दो महीने में इएसआई कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। जहां तक ग्रेच्यूटी का सवाल है तो पांच साल से कम लगातार नौकरी नहीं होने पर ग्रेच्यूटी नहीं दी जा सकती है। पांच साल लगातार काम करने पर ही श्रमिक ग्रेच्यूटी के हकदार होते हैं। यहां श्रमिक एक या दो साल संविदा पर रहते हैं। इसलिए उन्हें ग्रेच्यूटी नहीं मिलेगी। जिन श्रमिकों की मौत हुई है उस संबंध में जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विधायक लंबाेदर महताे ने कहा कि ग्रेच्यूटी किसे दिया जाना है इसके लिए केंद्र सरकार का एक्ट है। वह एक्ट टीवीएनएल पर भी लागू है। वहां 25 सालों से श्रमिक काम कर रहे हैं। इसलिए वे ग्रेच्यूटी के हकदार हैं। अभी इएसआई कार्ड देने की बात कही जा रही है जो हैरानी की बात है। उन्होंने कहा कि वहां इपीएफ कटौती का भी मामला है। इसके बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने मामले काे विधानसभा की ध्यानाकर्षण समिति काे भेज दिया।

4800 मेगावाट बिजली के लिए सरकार ने किया है एकरानामा : चंपई सोरेन
प्रभारी मंत्री चंपई साेरेन ने कहा कि राज्य में बिजली की मांग काे पूरा करने के लिए सरकार ने विभिन्न स्त्रोतों से 4800 मेगावाट बिजली उपलब्ध करने के लिए एकरानामा किया है। विधायक लंबोदर महतो ने गुरुवार काे सदन अल्सूचित प्रश्न उठाकर पूछा था कि वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन पीक आवर में 2400 मेगावाट बिजली की उपलब्धता है। जबकि राज्य के 68 लाख घरों में 24 गुणा सात बिजली उपलब्ध कराने के लिए पांच हजार मेगावाट बिजली की जरूरत है। एेसे में सरकार ने शेष 2500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता के लिए क्या योजना बनायी है। प्रभारी मंत्री चंपई साेरेन ने बताया कि राज्य को लगभग 2500 मेगावाट बिजली का आवंटन है। एनटीपीसी से 621, एनएचपीसी से 70, पीटीसी से 155, डीवीसी से 700, टीवीएनएल से 420, एपीआरएनएल से 189, इनलैंड पावर से 63, सिकिदिरी से 130, एबीसीएल से 11, रूंगटा से 04, विंड पावर से 300 और सोलर पावर से 26 मेगावाट यानी कुल 2625 मेगावाट बिजली मिलती है।


मंत्री ने बताया कि इस आवंटन के विरूद्ध झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की मांग लगभग 2100 मेगावाट की रहती है। यह भी कहा कि राज्य के 68 लाख घरों में 24 गुणा 7 बिजली उपलब्ध कराने के लिए 4000 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है। इसलिए शेष बिजली की उपलब्धता के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने विभिन्न स्त्रोतों से बिजली उपलब्ध करने के लिए एकरारनामा किया है। इसमें विंड पावर से 200, सोलर पावर से 700, पीयूवीएनएल पतरातू से 3400 और नॉर्थ कर्णपुरा से 500 यानी कुल 4800 मेगावाट बिजली के लिए एकरारनामा किया है। इस पर लंबोदर ने कहा एकरारनामा उपलब्धता नहीं हो जाती है। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार ने बिजली पर अब तक कितनी राशि खर्च की है। इस पर मंत्री ने कहा कि पूरा खर्च बताने के लिए समय लगेगा इसलिए बाद मे इसकी जानकारी दी जाएगी।

जरूरत 2100 की, बांट रहे हैं 2600 मेगावाट : सरयू
इसी चर्चा के क्रम में सरयू राय ने सरकार द्वारा दिये गये जवाब पर ही सवाल खड़ा करते हुए कहा कि राज्य को 2100 मेगावाट बिजली की जरूरत है लेकिन सरकार का जवाब है कि वह करीब 2600 मेगावाट बिजली दे रही है। एेसे में बाकी 4000 मेगावाट बिजली कहां जा रहा है। संसदीय कार्यमंत्री अालमगीर अालम जबाव देते हुए कहा कि राज्य के 68 लाख घरों में 24 गुणा सात बिजली उपलब्ध कराने के लिए 4000 मेगावाट बिजली की जरूरत बताई गई है।

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