भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट / चतरा विधानसभा क्षेत्र: चेहरा देख वोटर चुनते हैं विधायक, मुद्दे वही जो दशकों पहले थे



पानी सबसे बड़ा मुद्दा...चतरा में वर्षों पहले भी ग्रामीण नदी-नाले के पानी से अपनी दिनचर्या पूरी करते थे और आज भी यही हाल है। महिलाएं दूर-दराज से पानी लाती हैं और घरों का काम निपटाती हैं। पानी सबसे बड़ा मुद्दा...चतरा में वर्षों पहले भी ग्रामीण नदी-नाले के पानी से अपनी दिनचर्या पूरी करते थे और आज भी यही हाल है। महिलाएं दूर-दराज से पानी लाती हैं और घरों का काम निपटाती हैं।
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पानी सबसे बड़ा मुद्दा...चतरा में वर्षों पहले भी ग्रामीण नदी-नाले के पानी से अपनी दिनचर्या पूरी करते थे और आज भी यही हाल है। महिलाएं दूर-दराज से पानी लाती हैं और घरों का काम निपटाती हैं।पानी सबसे बड़ा मुद्दा...चतरा में वर्षों पहले भी ग्रामीण नदी-नाले के पानी से अपनी दिनचर्या पूरी करते थे और आज भी यही हाल है। महिलाएं दूर-दराज से पानी लाती हैं और घरों का काम निपटाती हैं।

  • दलों में चलता रहा दंगल, पर चतरा, हंटरगंज, कान्हाचट्टी में आज तक सालों पुराने मुद्दे हावी
  • ग्रामीण अभी भी जी रहे नदी-नाले के भराेसे, शहरी इलाकाें का भी बुरा हाल
  • एक तो नदी-नाले का पानी पीने की मजबूरी, दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 03:26 AM IST

नौशाद आलम (चतरा). चतरा विधानसभा क्षेत्र...1857 क्रांति की रणभूमि। पर, क्रांतिवीरों की वीरता की गाथा बयां करने वाला यह स्थल राष्ट्रीय स्मारक नहीं बन सका। 1952 से 2014 विधानसभा चुनावों तक विधायक आते और जाते रहे, लेकिन बात आज तक एक स्तंभ से आगे नहीं बढ़ सकी। क्षेत्र के विकास को इससे समझा जा सकता है।  


हंटरगंज, कान्हाचट्टी या चतरा के किसी भी क्षेत्र में जाएं, मुद्दे वही हैं,जो दशकों पहले थे। इटखोरी में पावर ग्रिड बना पर शुरू नहीं हुआ। पेयजल की समस्या गंभीर है। इस विधानसभा क्षेत्र में पांच प्रखंड हैं। प्रखंडों की बात छोड़ दीजिए, जिला मुख्यालय के वार्डों-मोहल्लों में भी पेयजल की सुविधा बहाल नहीं हुई। गांवों में आज भी लोग नदी-नाले के भरोसे जी रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं भी जिला व प्रखंड से आगे नहीं बढ़ पाई। आज तक जिला मुख्यालय में एक बाईपास सड़क नहीं बन पाई। निराशा में चतरा के वोटर हर चुनाव में विधायक बदल देते हैं।

 

पिछले तीन चुनाव को देखें तो 2005 में सत्यानंद भोक्ता को विधानसभा भेजा। 2009 में जनार्दन पासवान विधायक चुने गए। मतदाताओं ने 2014 में जयप्रकाश सिंह भोक्ता पर भरोसा जताया। चतरा के स्टैंड पर चाय की दुकान पर समरेश सिंह, रिजवान आलम कहते हैं कि इस चुनाव में पार्टी और प्रत्याशी का चेहरा देखकर ही फैसला होगा। दलों में चल रहे दंगल को देखें तो भाजपा से निवर्तमान विधायक जयप्रकाश सिंह भोक्ता को टिकट मिल सकता है। हालांकि,  लाेकसभा चुनाव के दौरान अन्नपूर्णा देवी के साथ राजद से भाजपा में आए जनार्दन पासवान भी टिकट के दावेदार हैं।

 

2014 में झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सत्यानंद भोक्ता इस बार राजद के उम्मीदवार हो सकते हैं। सत्यानंद भोक्ता भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पिछली बार टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने भाजपा छोड़ झाविमो से चुनाव लड़ा था। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश सिंह भोक्ता को कड़ी टक्कर दी थी। इस बार झाविमो प्रत्याशी के भी यहां से चुनाव लड़ने की संभावना है। अशोक गहलौत इस दल से टिकट के प्रबल दावेदार हैं।

 

चुनाव में सबसे बड़ा फैक्टर

  1. पेयजल : शहर के आधे हिस्से में पेयजल आपूर्ति नहीं होती। प्रखंड मुख्यालयों और गांवों की स्थिति बदतर है। गांवों में लोग नदी-नाला के पानी पर आश्रित हैं।  
  2. बिजली : पांचों प्रखंडों में नियमित बिजली आपूर्ति के लिए इटखोरी में पावर ग्रिड बना। जिला मुख्यालय के लिए चतरा के पकरिया में भी ग्रिड बना, शुरू नहीं हुआ। जिला मुख्यालय में औसतन 10 से 15 घंटे और प्रखंडों में चार से छह घंटे बिजली मिलती है।
  3. सड़क : जिला मुख्यालय में बाईपास सड़क अबतक नहीं बनी। जर्जर एनएच-99 की मरम्मत के मुद्दे पर कई आंदोलन हुए, पर सुनवाई नहीं हुई।
  4. स्वास्थ्य : सदर अस्पताल में चिकित्सक कम हैं। महिला चिकित्सक शुरू से नहीं हैं। इस जिले के प्रभारी मंत्री खुद स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी हैं, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी। सदर अस्पताल में गंभीर बीमारी और घायलों का इलाज नहीं होता।

 

3 चुनावों में पार्टियों का सक्सेस रेट

  • 2014 : जयप्रकाश सिंह भोक्ता, भाजपा : 69744, सत्यानंद भोक्ता, झाविमो : 49169, जनार्दन पासवान, राजद : 37320
  • 2009 : जनार्दन पासवान, राजद : 67441, सुबेदार पासवान, भाजपा : 28886, सहिंद्रा राम, कांग्रेस :18883
  • 2005 : सत्यानंद भोक्ता, भाजपा : 50332, जनार्दन पासवान, राजद : 45650, संजय लाल पासवान, कांग्रेस : 5412

 

वोटरों के बोल

 

हम ऐसे उम्मीदवार को समर्थन देंगे, जो क्षेत्र में रहे और हमारी बात सुने। चुनाव जीत लापता होने वाले को नहीं।  इस बार पहले उम्मीदवार देंखेंगे, फिर पार्टी। -दयानंद कुमार भारती, हंटरगंज


 

कोई कार्य नहीं हुआ। सड़कों की स्थिति जर्जर है। पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। बिजली में सुधार नहीं हुआ। इस बार सोच-समझकर वोट करेंगे। -मो. रियाजउद्दीन, चतरा

 

हर चुनाव में नेता वादा करते हैं। मगर इस बार हमलोग पार्टी और प्रत्याशियों के बहकावे में नहीं आएंगे। उम्मीदवार का मिट्‌टी से लगाव देखकर ही समर्थन देंगे।  -उपेंद्र सिंह, कान्हाचट्टी

 

चतरा में 369987 कुल वोटर हैं। 194159 पुरुष और 175828 महिला हैं। 31109 नए मतदाता बढ़े हैं।

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