निरसा से ग्राउंड रिपोर्ट / उद्योग खुलने और पानी की आस में लोग चुुनेंगे विधायक

यह कभी केएफएस का कार्यालय था। आज पेड़ों के बीच गुम हो गया है। वोटरों को आज भी इंतजार है कि यह खुलेगा और रोजगार बढ़ेगा। यह कभी केएफएस का कार्यालय था। आज पेड़ों के बीच गुम हो गया है। वोटरों को आज भी इंतजार है कि यह खुलेगा और रोजगार बढ़ेगा।
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यह कभी केएफएस का कार्यालय था। आज पेड़ों के बीच गुम हो गया है। वोटरों को आज भी इंतजार है कि यह खुलेगा और रोजगार बढ़ेगा।यह कभी केएफएस का कार्यालय था। आज पेड़ों के बीच गुम हो गया है। वोटरों को आज भी इंतजार है कि यह खुलेगा और रोजगार बढ़ेगा।

दैनिक भास्कर

Nov 17, 2019, 04:21 AM IST

निरसा (अशोक कुमार). टूटी दीवारें...। छत पर विशाल पीपल का कब्जा...। झाड़ियों के बीच छुपे दरवाजे और खिड़कियां...। कुमारधुबी के प्रो. अरुण इस खंडहर मकान को दिखाते हुए कहते हैं- यह कभी केएफएस का कार्यालय था। निरसा की चुनावी राजनीति में केएफएस और इसके जैसे ही बंद पड़े केएमसीएल का बड़ा महत्व है। यह वर्षों से यहां वोट दिलाते आए हैं।

 

प्रो. अरुण की बातों में दर्द है और गुस्सा भी...। दरअसल, निरसा विधानसभा क्षेत्र में 30 वर्षों में इसके जैसे 102 उद्योग बंद हुए हैं। बंद इन उद्योगों को पुन: चालू कराने का वादा कर नेता यहां वर्षों से चुनाव जीतते रहे हैं। 2019 की चुनाव में भी बंद उद्योगों को पुन: चालू करने की बात नेता कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो वहां पानी अब भी हलक से दूर है। गलफरबाड़ी के रहने वाले महेश कुमार कहते हैं कि निरसा के लिए मेगा जलापूर्ति योजना बनी है। इस पर काम भी हो रहा है, पर जब तक जलापूर्ति योजनाएं शुरू नहीं हो जाती, उन्हें स्थानीय तालाबों के गंदे पानी पर ही निर्भर रहना होगा। 

 

भाजपा-मासस में टक्कर  
एकबार फिर भाजपा-मासस में सीधी टक्कर होगी। लाल झंडे के इस गढ़ में कमल खिलेगा या फिर मासस के अरूप चटर्जी जीत की हैट्रिक लगाएंगे...? यह सवाल यहां कौंध रहा है। भाजपा ने यहां अपर्णा सेनगुप्ता को प्रत्याशी बनाया है। 

 

बड़े मुद्दे...कब खुलेगा केएफएस-केएमसीएल

  • 1.राेजगार : निरसा में उद्योग-धंधों के बंद होने से राेजगार कम हो गया है। इसके कारण यहां के लोगों को रोजी-रोटी के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
  • 2.पेयजल : निरसा के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की काफी किल्लत है। इसके कारण किसान सिंचाई से वंचित हैं। शहरी अभी भी तालाब के पानी पर निर्भर हैं।
  • 3.उद्याेग-धंधे : केएफएस, केएमसीएल जैसे 102 उद्योग धंधे निरसा में बंद हो चुके हैं। यही कारण है कि अब नए लोग भी यहां उद्योग लगाने को तैयार नहीं हैं।
  • 4.शिक्षा : ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का हाल बेहाल है। यहां कई प्राथमिक स्कूलों में भी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। बार-बार आश्वासन के बाद हालात नहीं सुधरे।

 

3 चुनावों का सक्सेस रेट

  • 2014 : अरूप चटर्जी मासस, वाेट- 51581, गणेश मिश्रा भाजपा-50546
  • 2009 : अरूप चटर्जी मासस, वोट-68965, अशोक कुमार मंडल भाजपा 33388
  • 2005 : अपर्णा सेनगुप्ता, फाब्ला, वोट-50533, अरूप चटर्जी मासस, 48196

 

वोटर्स बोले, इस बार मुकाबला अच्छा होगा

  • चटर्जी हमेश जनता के बीच रहे। लोगों को उनका व्यवहार पसंद है। बीजेपी से मुकाबला अच्छा होगा। -मंजीत सिंह, ट्रांसपोर्टर
  • अरूप ने बड़ा कुछ नहीं किया तो नुकसान भी नहीं पहुंचाया। हालांकि अपर्णा सेनगुप्ता की छवि ज्यादा अच्छी है। - हाजी अफरोज अहमद

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