रिपोर्ट / पिछली बार विधानसभा चुनाव में 410 करोड़ रु हुए थे खर्च, इस बार 500 कराेड़ से ज्यादा हो सकते हैं



Jharkhand Assembly Election: Report on Election Expenditure
X
Jharkhand Assembly Election: Report on Election Expenditure

  • चुनाव आयोग ने हर प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा 28 लाख रुपए तक तय की है
  • कई दावेदारों ने तो चुनाव की घोषणा से पहले ही अब तक लाखों रुपए खर्च कर डाले हैं

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 03:08 AM IST

रांची. विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ एक नया ‘बाजार’ सजने लगा है। झारखंड में 45 दिनों में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा इस बाजार में आएंगे। यह वो राशि होगी, जो 81 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियां और प्रत्याशी खर्च करेंगे। राज्य में पांच चरण में चुनाव होंगे। इसमें बाजी मारने के लिए प्रत्याशी पानी की तरह पैसा बहाएंगे।

 

चुनाव आयोग ने हर उम्मीदवार की खर्च की सीमा 28 लाख रुपए रखी है। लेकिन कई दावेदारों ने तो चुनाव की घोषणा से पहले ही लाखों खर्च कर डाले हैं। राजनीतिक विश्लेषक उदय कुमार वर्मा व वीएन सिंह के अनुसार, झारखंड की 30% सीट, यानी 25 विधानसभा क्षेत्रों में कुछ प्रत्याशी एक करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करते हैं। इसी तरह पार्टियां भी अरबों खर्च करती हैं। 2015 के चुनाव में 81 सीटों पर 400 करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ था। प्रत्याशियों ने करीब 160 करोड़ अौर पार्टियों ने 250 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस बार चुनाव में 500 करोड़ से  ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।

 

2015 चुनाव में 1100 से ज्यादा प्रत्याशी, औसतन 14 लाख खर्च
2015 के विधानसभा चुनाव में 1136 उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया था। आयोग को दिए गए ब्योरे के अनुसार प्रत्याशियों ने अधिकतम 22 लाख  रुपए तक खर्च किए थे। कई खर्च का हिसाब-किताब नहीं हाेता। औसत 14 लाख रुपए भी मानें तो पिछले चुनाव में उम्मीदवारों के 160 करोड़ खर्च हुए। पांच साल में 20-25% भी खर्च बढ़ा तो इस बार प्रत्याशी 200 करोड़ से ज्यादा  पैसा बहाएंगे।

 

इस बार 20% ज्यादा भी खर्च बढ़ा तो पार्टियां होंगी 300 करोड़ के पार
2015 चुनाव में राजनीतिक दलों ने करीब 250 करोड़ रुपए खर्च किए थे। दलों ने ये राशि रैली, सभा, स्टार प्रचारक के आने-जाने, चुनावी प्रचार, खाने की व्यवस्था समेत अन्य मदों में खर्च किए। भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों ने निर्वाचन आयोग को चुनावी खर्च का हिसाब-किताब दिया है। इसके अनुसार, भाजपा ने सबसे ज्यादा खर्च किए थे। इस साल 20% भी खर्च बढ़ा तो पार्टियां 300 करोड़ से ज्यादा राशि लगाएंगी।

 

चुनाव के मौसम में 50 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

चुनाव के मौसम में बाजार में आने वाले पैसे से झारखंड के करीब 50 हजार लोगांे को रोजगार मिलेगा। चुनावी खर्च से रोजगार का सृजन होगा और ट्रांसपोर्ट, पोस्टर, बैनर, हैंड बिल, होटल व टेंट कारोबार से जुड़े लोग, खाना-पीना बनाने वाले कारीगर और मजदूरों को काम मिलेगा। दलों के एक उम्मीदवार से करीब 100 लोगाें को रोजगार मिलता ही है। इसके अलावा शराब-कपड़े बांटने और कार्यकर्ताओं पर भी पैसे खर्च किए जाएंगे।

 

दो सर्वे से जानें कैसे करोड़ों का हो जाता है चुनाव

  • उत्तर प्रदेश के 2017 चुनाव में 5500 करोड़ : सीएमएस प्री पोल पोस्ट स्टडी के सर्व में यह बात सामने आई थी कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी और पार्टियों ने मिलकर 5500 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इनमें से एक हजार करोड़ रुपए नोट के बदले वोट पर खर्च किए गए थे।
  • 2018 कर्नाटक चुनाव में 10500 करोड़ : सीसीएम के सर्वे के मुताबिक, कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में 10500 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। यह राशि 2013 में हुए चुनाव के खर्च से दोगुनी थी।

 

report

 

स्रोत:चुनाव आयोग को प्रत्याशियों के दिए खर्च के आधार पर

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना